5 किलो का रोवर करेगा चांद पर खोज! प्राइवेट कंपनी अगले साल भेजेगी मिशन

ispace 2nd Moon Mission : राेवर में में एचडी कैमरा फ‍िट किया गया है, जो चांद की तस्‍वीरें कैप्‍चर करेगा।

5 किलो का रोवर करेगा चांद पर खोज! प्राइवेट कंपनी अगले साल भेजेगी मिशन

Photo Credit: iSpace

इस उड़ान को पूरा करने के लिए आईस्‍पेस ने ‘मिशन 2 फ्लाइट’ की तैयारी की है।

ख़ास बातें
  • जापानी कंपनी आईस्‍पेस कर रही दूसरे मून मिशन की तैयारी
  • इस साल अप्रैल में क्रैश हो गया था पहला मून मिशन
  • दूसरे मून मिशन में मिनी रोवर को किया जाएगा लॉन्‍च
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जापानी कंपनी ‘आईस्‍पेस' (ispace) का मून मिशन (Moon Mission) इस साल फेल हो गया था। अप्रैल में आईस्‍पेस का HAKUTO-R M1 लैंडर चंद्रमा पर सुरक्षित नहीं उतर सका और क्रैश लैंडिंग में बर्बाद हो गया। हालांकि कंपनी के हौसले बुलंद हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, आईस्‍पेस ने एक मिनी रोवर तैयार किया है, जो अगले साल चांद पर लैंड होने के लिए उड़ान भरेगा। खास यह है कि रोवर का वजन सिर्फ 5 किलो है। इसमें एचडी कैमरा फ‍िट किया गया है, जो चांद की तस्‍वीरें कैप्‍चर करेगा। 

रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रो रोवर को अगले साल की सर्दियों तक लॉन्‍च किया जा सकता है। यह रोवर 10.24 इंच लंबा, 12.4 इंच चौड़ा और 21.26 इंच लंबा है। माइक्रो रोवर का वजन 5 किलोग्राम होगा। इसके फ्रंट में एचडी कैमरा लगा होगा, जो चांद की सतह की तस्‍वीरें लेगा। 

इस उड़ान को पूरा करने के लिए आईस्‍पेस ने ‘मिशन 2 फ्लाइट' की तैयारी की है। लैंडर का डिजाइन भी फाइनल हो गया है। कंपनी ने दिसंबर 2022 में अपना पहला मून मिशन लॉन्‍च किया था। उसके तहत हकुतो-आर लैंडर को रवाना किया गया था। अप्रैल 2023 में लैंडर ने चांद पर उतरने की कोशिश की, लेकिन स्‍पेसक्राफ्ट के ऑनबोर्ड कंप्‍यूटर ने लैंडर और चांद की सतह की ऊंचाई का गलत अनुमान लगा लिया। इस वजह से लैंडर चांद की सतह से टकराकर क्रैश हो गया। 

आईस्‍पेस का कहना है कि उसने पहले मिशन की गलत‍ियों से सीखकर बेहतर सॉफ्टवेयर को दूसरे मिशन के लिए तैयार किया है। कंपनी एक और मून मिशन पर काम कर रही है, जो साल 2026 में लॉन्‍च होगा। चांद पर दुनिया के चुनिंदा देश ही अपना मिशन लैंड करा पाए हैं। इनमें अमेरिका, रूस, चीन और भारत शामिल हैं। भारत दुनिया का पहला और इकलौता देश है, जिसने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अपने मिशन को लैंड कराया है। 

आईस्‍पेस अपने मिशन में कामयाब होती है तो दुनिया की पहली प्राइवेट कंपनी बन जाएगी, जिसका मिशन चांद पर लैंड करेगा। 
 
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