2 अरब साल पहले मंगल ग्रह पर थे महासागर! वैज्ञानिकों ने ऐसे लगाया अनुमान

मौजूदा अध्ययन में रिसर्चर्स ने पृथ्वी के जलवायु मॉडल पर बेस्‍ड त्रि-आयामी मॉडल का इस्‍तेमाल करके मंगल की प्राचीन जलवायु को दोबारा से तैयार किया।

2 अरब साल पहले मंगल ग्रह पर थे महासागर! वैज्ञानिकों ने ऐसे लगाया अनुमान

वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह के उत्तरी गोलार्ध में एक महासागर की उपस्थिति होने का अनुमान लगाया है।

ख़ास बातें
  • हालांकि कुछ सवाल अभी भी बाकी हैं
  • क्या इस ग्रह पर लगभग 3 अरब साल पहले जीवन मौजूद था
  • एक सवाल यह भी है कि सारा पानी गया कहां
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पृथ्‍वी से बाहर जीवन की संभावना की बात आती है, तो इसका सबसे बड़ा दावेदार नजर आता है मंगल (Mars) ग्रह। वर्षों से वैज्ञानिक यह जानने में जुटे हैं कि क्‍या कभी मंगल ग्रह पर जीवन था। क्‍या भविष्‍य में ऐसी कोई उम्‍मीद है? तमाम अध्‍ययन संकेत तो देते हैं, लेकिन अभी बहुत शोध बाकी है। अब पेरिस यूनिवर्सिटी की एक स्‍टडी में पता चला है कि 2 अरब साल पहले मंगल ग्रह पर तरल महासागर हो सकते थे। वैज्ञानिकों का कहना है कि तरल महासागर संभव हो सकता है अगर तापमान जमाव बिंदु यानी 4.5 डिग्री सेल्सियस से ज्‍यादा होता है। मंगल ग्रह पर ऐसी स्थितियां आज से करीब 3 अरब साल पहले मुमकिन थीं। 

हालांकि साल 2016 के एक रिव्‍यू कहा गया था कि लो सोलर रेडिएशन के कारण मंगल ग्रह की प्राचीन जलवायु बेहद ठंडी थी और एक महासागर को बरकरार नहीं रख सकती थी। वहीं, साल 2021 के एक अन्य अध्ययन में कहा गया है कि ग्रह का अपना वॉर्मिंग मैकेनिज्‍म है, जो झीलों और नदियों को पनपने दे सकता है। 

मौजूदा अध्ययन में रिसर्चर्स ने पृथ्वी के जलवायु मॉडल पर बेस्‍ड त्रि-आयामी मॉडल का इस्‍तेमाल करके मंगल की प्राचीन जलवायु को दोबारा से तैयार किया। इसे समझकर वैज्ञानिक इस निष्‍कर्ष पर पहुंचे हैं कि दो अरब साल पहले मंगल ग्रह पर महासागर हो सकते थे। वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह के उत्तरी गोलार्ध में एक महासागर की उपस्थिति होने का अनुमान लगाया है। 

हालांकि कुछ सवाल अभी भी बाकी हैं। पहला यह कि क्या इस ग्रह पर लगभग 3 अरब साल पहले जीवन मौजूद था? एक सवाल यह भी है कि सारा पानी गया कहां? इसके पीछे एक थ्‍योरी यह है कि पानी के अणुओं के हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में टूटने से वह अंतरिक्ष में वाष्‍प बनकर उड़ गया। एक अध्‍ययन यह कहता है कि मंगल ग्रह का पानी इसकी सतह के नीचे बर्फ के रूप में मौजूद है। 

पिछले साल यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने यह कहा था कि मंगल ग्रह पर बड़ी मात्रा में पानी मिला है। बताया गया था कि मंगल ग्रह की वैलेस मेरिनेरिस Valles Marineris घाटी की सतह के नीचे पानी छुपा है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और एक्सोमार्स ट्रेस गैस ऑर्बिटर (TGO) ने इस घाटी में बड़ी मात्रा में पानी की खोज की थी। हालांकि इस खोज की जांच अभी की जा रही है। 

मंगल ग्रह को लेकर कई सवाल बरकरार हैं। यहां जीवन के खोज में जुटे वैज्ञानिकों को अभी बहुत कुछ साबित करना है। उम्‍मीद है आने वाले समय में हमें कुछ और रोचक जानकारियां मिलेंगी।  
 
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