इंटरनेट सर्च पर गूगल की गैर कानूनी मोनोपॉली, अमेरिकी कोर्ट का फैसला

इस वर्ष की शुरुआत में iPhone बनाने वाली Apple के खिलाफ स्मार्टफोन मार्केट में गलत तरीके से मोनोपॉली बनाने के आरोप में अमेरिका में कानूनी मामला दर्ज हुआ था

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Written by आकाश आनंद, अपडेटेड: 6 अगस्त 2024 18:37 IST
ख़ास बातें
  • कोर्ट ने फैसले में कहा कि गूगल ने एंटी-ट्रस्ट कानून का उल्लंघन किया है
  • इससे गूगल को चलाने वाली कंपनी Alphabet के शेयर में बड़ी गिरावट हुई है
  • Alphabet ने बताया कि उसकी योजना इस फैसले के खिलाफ अपील करने की है

इससे कंपनी के कामकाज में बड़े बदलाव को तय करने के लिए दूसरे मुकदमे का रास्ता खुल गया है

अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी Google को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका के एक कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि गूगल ने एंटी-ट्रस्ट कानून का उल्लंघन किया है। दुनिया का डिफॉल्ट सर्च इंजन बनने के लिए इसने अरबों डॉलर खर्च किए हैं और इंटरनेट सर्च में गैर कानूनी मोनोपॉली बनाई है। बड़ी टेक कंपनियों के मार्केट पर दबदबे के खिलाफ फेडरल अथॉरिटीज की यह पहली बड़ी जीत है। 

इस फैसले से गूगल के कामकाज में बड़े बदलाव को तय करने के लिए दूसरे मुकदमे का रास्ता खुल गया है। अमेरिका में वॉशिंगटन के डिस्ट्रिक्ट जज Amit Mehta ने अपने फैसले में कहा, "कोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि गूगल की ओर से मोनोपॉली की जाती है।" हालांकि, डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अपील की जा सकती है। इससे गूगल को चलाने वाली कंपनी Alphabet के शेयर में लगभग 4.5 प्रतिशत की गिरावट हुई। पिछले वर्ष Alphabet की कुल सेल्स में गूगल को एडवर्टाइजिंग से मिलने वाले रेवेन्यू का 77 प्रतिशत हिस्सा था। 

Alphabet ने बताया कि उसकी योजना इस फैसले के खिलाफ अपील करने की है। गूगल ने एक स्टेटमेंट में कहा, "इस फैसले से यह पता चलता है कि गूगल बेस्ट सर्च इंजन की पेशकश करता है लेकिन इसका निष्कर्ष है कि हमें इसे आसानी से उपलब्ध कराने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।" इस वर्ष की शुरुआत में iPhone बनाने वाली Apple के खिलाफ स्मार्टफोन मार्केट में गलत तरीके से मोनोपॉली बनाने के आरोप में अमेरिका में कानूनी मामला दर्ज हुआ था। यह मामला अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस की ओर से दाखिल किया गया गया था। 

अमेरिकी सरकार ने बड़ी टेक कंपनियों पर शिकंजा कसा है। इससे पहले सोशल मीडिया साइट Facebook को कंट्रोल करने वाली Meta Platforms और ई-कॉमर्स कंपनी Amazon के खिलाफ भी कानूनी मामले दर्ज किए गए थे। एपल पर आरोप है कि यह अपने स्मार्टफोन्स पर मैसेजिंग ऐप्स और स्मार्टवॉचेज के चलने को मुश्किल बनाती है। इसके ऐप स्टोर की गेम्स के लिए स्ट्रीमिंग सर्विसेज से जुड़ी पॉलिसी से कॉम्पिटिटर्स को नुकसान हुआ है। कंपनी के खिलाफ यूरोप, दक्षिण कोरिया और जापान में भी बिजनेस करने के तरीकों को लेकर जांच हुई है। इसके अलावा Epic Games जैसे राइवल्स ने भी कंपनी को कोर्ट में खींचा था। 
 

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