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1,000 करोड़ की ठगी और 111 फर्जी कंपनियां, कैसे CBI ने इस बड़े साइबर फ्रॉड का किया खुलासा, यहां जानें

CBI ने एक इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो फर्जी लोन ऐप्स और इनवेस्टमेंट स्कीम्स से ठगी कर रहा था।

1,000 करोड़ की ठगी और 111 फर्जी कंपनियां, कैसे CBI ने इस बड़े साइबर फ्रॉड का किया खुलासा, यहां जानें
ख़ास बातें
  • CBI ने इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड नेटवर्क के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की
  • फर्जी लोन ऐप्स और MLM मॉडल से लोगों को बनाया जा रहा था शिकार
  • जांच में 111 शेल कंपनियां और 1,000 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन सामने आए
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CBI ने देशभर में फैले एक बड़े इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड नेटवर्क का खुलासा किया है, जो फर्जी लोन ऐप्स, नकली इनवेस्टमेंट स्कीम्स, झूठे पार्ट-टाइम जॉब ऑफर्स और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए हजारों लोगों को ठग रहा था। जांच एजेंसी ने इस मामले में 17 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिनमें चार विदेशी नागरिक और 58 कंपनियां शामिल हैं। CBI के मुताबिक, इस नेटवर्क से जुड़े तीन मुख्य आरोपियों को अक्टूबर में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। एजेंसी का कहना है कि यह पूरा रैकेट Ponzi स्कीम्स और MLM मॉडल के जरिए लंबे समय से एक्टिव था।

कैसे सामने आया पूरा मामला

NDTV के मुताबिक, यह केस Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C), Ministry of Home Affairs से मिली जानकारी के आधार पर दर्ज किया गया था। I4C ने ऑनलाइन इनवेस्टमेंट और जॉब फ्रॉड से जुड़े मामलों में अचानक आई बढ़ोतरी को लेकर अलर्ट किया था। शुरुआत में अलग-अलग शिकायतें अलग केस जैसी लग रही थीं, लेकिन जब CBI ने इनकी गहराई से जांच की, तो एक ही तरह के मोबाइल ऐप्स, फंड ट्रांसफर पैटर्न, पेमेंट गेटवे और डिजिटल फुटप्रिंट सामने आए। इससे एक बड़े और संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पता चला।

टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर कैसे दिया जा रहा था फ्रॉड को अंजाम

जांच में सामने आया कि आरोपी बेहद लेयर्ड और टेक-ड्रिवन तरीका अपना रहे थे। ये लोग Google Ads, बल्क SMS, SIM-box मैसेजिंग सिस्टम, क्लाउड सर्वर्स, फिनटेक प्लेटफॉर्म्स और दर्जनों म्यूल बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल कर असली कंट्रोलर्स की पहचान छुपाते थे। CBI के मुताबिक, इसी वजह से लंबे समय तक यह नेटवर्क कानून की पकड़ से बाहर रहा।

111 शेल कंपनियां और हजारों करोड़ का ट्रांजैक्शन

CBI ने बताया कि इस पूरे ऑपरेशन के केंद्र में 111 शेल कंपनियां थीं, जिन्हें फर्जी डायरेक्टर्स, नकली डॉक्यूमेंट्स, गलत पते और झूठे बिजनेस ऑब्जेक्टिव्स के जरिए बनाया गया था। इन कंपनियों के नाम पर बैंक अकाउंट्स और पेमेंट गेटवे खोले गए। जांच में यह भी सामने आया कि सैकड़ों अकाउंट्स के जरिए 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का ट्रांजैक्शन किया गया, जिसमें एक ही अकाउंट में कम समय में 152 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम आई।

विदेशी हैंडलर्स की भूमिका

CBI की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इस नेटवर्क को विदेश से ऑपरेट किया जा रहा था। एजेंसी ने बताया कि Zou Yi, Huan Liu, Weijian Liu और Guanhua Wang नाम के विदेशी नागरिक 2020 से भारत में शेल कंपनियां खड़ी करने की साजिश रच रहे थे। एक UPI ID से जुड़े दो भारतीय आरोपियों की एक्टिविटी अगस्त 2025 तक विदेश से ऑपरेट होती पाई गई, जिससे रियल-टाइम ओवरसीज सुपरविजन की पुष्टि हुई।

देशभर में छापेमारी और Operation CHAKRA-V

CBI ने इस मामले में कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, झारखंड और हरियाणा समेत छह राज्यों में 27 ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान डिजिटल डिवाइसेज, डॉक्यूमेंट्स और फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स जब्त किए गए। फॉरेंसिक जांच में विदेशी नागरिकों की सीधी ऑपरेशनल कंट्रोल की भूमिका सामने आई। CBI के मुताबिक, यह कार्रवाई Operation CHAKRA-V का हिस्सा है, जिसका मकसद देश में संगठित और इंटरनेशनल साइबर इकोनॉमिक क्राइम पर लगाम लगाना है।

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