देश में इस वर्ष जून तक एक्टिव फास्टैग यूजर्स की संख्या बढ़कर लगभग 6.23 करोड़ की थी। केंद्र सरकार की योजना बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम को शुरू करने की है
पिछले वर्ष FASTag एनुअल पास स्कीम को शुरू किया गया था
पिछले कुछ वर्षों में हाइवेज और अन्य महत्वपूर्ण मार्गों पर FASTag का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। देश में इस वर्ष जून तक एक्टिव फास्टैग यूजर्स की संख्या बढ़कर लगभग 6.23 करोड़ की थी। केंद्र सरकार की योजना बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम को शुरू करने की है जिससे हाइवेज पर यात्रा करना तेज और अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।
लोकसभा में एक लिखित उत्तर में रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवेज मिनिस्ट्री ने बताया है कि देश भर में FASTag का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इस सिस्टम में RFID टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से ऑटोमैटिक टोल पेमेंट्स की जाती हैं। भारत में अधिकतर व्हीकल मालिकों के लिए यह हाइवे पर यात्रा करने का एक सामान्य हिस्सा बन चुका है। फास्टैग यूजर्स की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी के पीछे इसके लिए एनुअल पास लॉन्च होने का बड़ा योगदान है।
पिछले वर्ष अगस्त में कार, जीप और वैन जैसे नॉन-कमर्शियल व्हीकल्स के लिए FASTag एनुअल पास स्कीम को शुरू किया गया था। इस वर्ष जून तक 77 लाख से अधिक फास्टैग एनुअल पास जारी किए गए हैं। इन एनुअल पास के जरिए लगभग 63 करोड़ टोल ट्रांजैक्शंस हुई हैं। नॉन-कमर्शियल व्हीकल कैटेगरी में एनुअल पास के यूजर्स कू कुल इलेक्ट्रॉनिक्स टोल ट्रांजैक्शंस में हिस्सेदारी लगभग 33 प्रतिशत की हो गई है। फास्टैग एनुअल पास के लिए 3,075 रुपये का प्राइस है। यह हाइवेज पर अक्सर यात्रा करने वालों के लिए एक कम खर्च वाला और सुविधाजनक विकल्प है। केंद्र सरकार की योजना टोलिंग टेक्नोलॉजी के अगले दौर को लाने की है। इसमें मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम के साथ फिजिकल टोल बूथ की जरूरत नहीं रहेगी। इससे हाइवेज पर व्हीकल्स टोल चुकाने के लिए बिना रुके यात्रा कर सकेंगे।
MLFF में फास्टैग, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकोगनिशन कैमरा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ व्हीकल्स की पहचान की जाती है और टोल चार्ज ऑटोमैटिक तरीके से कट जाता है। इससे भीड़ कम होती है, फ्यूल की बचत होती है और हाइवेज पर यात्रा में लगने वाला समय बेहतर होता है। इस सिस्टम के लिए 17 टोल प्लाजा को अप्रूवल दिया गया है। इनमें से पांच पर यह सिस्टम लागू हो गया है। रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवेज मिनिस्ट्री ने बताया है कि मौजूदा नियमों के तहत, समान सड़क पर दो टोल प्लाजा के बीच अंतर 60 किलोमीटर का होता है। हालांकि, इस नियम में स्थानीय स्थितियों और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत के आधार पर बदलाव हो सकता है।
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