Mitron ऐप के पाकिस्तानी 'कनेक्शन' का दावा

Mitron ऐप को मिले अधिकांश रिव्यू के अनुसार, इस ऐप का वास्तविक अनुभव बग्स (समस्याओं) से भरा हुआ है। आश्चर्यचकित करने वाली बात यह है कि बग्स की रिपोर्ट करने वाले यूज़र्स ने ऐप को ज्यादा रेटिंग भी दी है और इसके पीछे का कारण ऐप का भारतीय होना बाताया है।

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Mitron ऐप के पाकिस्तानी 'कनेक्शन' का दावा

Mitron ऐप को गूगल प्ले स्टोर पर 50 लाख से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है

ख़ास बातें
  • पाकिस्तान की TicTic ऐप का रीब्रांडेड वर्ज़न है Mitron
  • पाकिस्तानी डेवलपर का कहना है कि ऐप के सोर्स कोड को 2,500 रुपये में बेचा
  • मित्रों ऐप की प्राइवेसी को लेकर भी खड़े उठते हैं सवाल
Mitron ऐप भारत में नहीं बनाया गया है, लेकिन एक पाकिस्तानी सॉफ्टवेयर डेवलपर Qboxus से खरीदा गया है। इस बात का खुलासा एक रिपोर्ट ने किया है। हालांकि फिर भी भारतीय मूल का ऐप कहलाने के कारण इसे भारत में बड़े पैमाने पर डाउनलोड किया जा रहा है। मित्रों नाम से जुड़ी एक दिलचस्प बात यह भी है कि इस शब्द को अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भी कई बार बोला जाता है। मित्रों का मतलब दोस्त भी होता है और कहीं न कहीं ये लोगों को देशी ऐप होने का अहसास भी दिलाता होगा। लेकिन अब नई रिपोर्ट यह दावा कर रही है कि मित्रों ऐप वास्तव में TicTic ऐप का रीब्रांडेड वर्ज़न है, जिसे Qboxus नामक एक पाकिस्तानी डेवलपर द्वारा बनाया गया था।

TicTic ऐप बनाने वाली कंपनी Qboxus के संस्थापक और सीईओ इरफान शेख ने News18 को बताया कि उन्होंने ऐप के सोर्स कोड को Mitron के निर्माता को 34 डॉलर यानी लगभग 2,500 रुपये में बेचा है। शेख ने आगे बताया कि उनकी कंपनी सोर्स कोड बेचती है, जिससे खरीदार ऐप को कस्टोमाइज़ करते हैं। उन्होंने नेटवर्क 18 में कहा, (अनुवादित) “डेवलपर ने जो किया है, उससे कोई समस्या नहीं है। उन्होंने स्क्रिप्ट के लिए पैसा दिया है और इसका इस्तेमाल किया, जो ठीक है। लेकिन, समस्या उन लोगों से हैं, जो इसे एक भारतीय-निर्मित ऐप बता रहे हैं, जो पूरी तरह से सच नहीं है, क्योंकि डेवलपर्स ने इस ऐप में कोई बदलाव नहीं किया है।”

मित्रों के निर्माता की पहचान की अभी भी पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि यह आईआईटी रुड़की के एक छात्र द्वारा बनाया गया था। Google Play पर Mirton ऐप डेवलपर का वेब पेज एक वेबसाइट shopkiller.in पर ले जाता है, जो एक खाली पेज है।

ऐप में किसी प्रकार की प्राइवेसी पॉलिसी भी नहीं है, इसलिए जो लोग इसके लिए साइन-अप कर रहे हैं और अपने वीडियो अपलोड कर रहे हैं - उन्हें पता नहीं है कि उनके डेटा के साथ क्या किया जा रहा है। यदि ऐप द्वारा मांगी जाने वाली अनुमतियों को देखा, तो ये बहुत सारी हैं।


ऐप को मिले अधिकांश रिव्यू के अनुसार, इस ऐप का वास्तविक अनुभव बग्स (समस्याओं) से भरा हुआ है। आश्चर्यचकित करने वाली बात यह है कि बग्स की रिपोर्ट करने वाले यूज़र्स ने रिव्यू में ऐप को ज्यादा रेटिंग भी दी है और इसके पीछे का कारण ऐप का भारतीय होना बताया है। इसलिए अब इस बात का सामने आना कि यह ऐप एक पाकिस्तानी डेवलपर से खरीदा गया है, निश्चित तौर पर रेटिंग में गिरावट का कारण बन सकता है।
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गोपाल साठे Gopal Sathe is the Editor of Gadgets 360. He has covered technology for 15 years. He has written about data use and privacy, and its use in politics. He has also written ... और भी »
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