अब भाषणों को मैन्युअल तरीके से ट्रांसक्राइब करने की जगह AI-पावर्ड स्पीच-टू-टेक्स्ट सिस्टम का यूज होगा।
Photo Credit: PIB
पहले सांसद संसद भवन के लॉबी में रखे रजिस्टर या टैबलेट पर डिजिटल पेन से साइन करते थे
हर सांसद की सीट पर लगे मल्टी-मीडिया डिवाइस के ज़रिए वे अपनी उपस्थिति दर्ज करेंगे, बायोमेट्रिक या I-कार्ड और पिन की मदद से।
हां, लोकसभा सचिवालय AI आधारित स्पीच-टू-टेक्स्ट सिस्टम शुरू कर रहा है, जिससे भाषण रियल टाइम में टेक्स्ट में बदले जाएंगे।
अभी 17 भाषाओं में इंटरप्रिटेशन है, लेकिन जल्द ही इसे बढ़ाकर 22 भाषाओं तक किया जाएगा, सिंधी और डोगरी भी शामिल होंगी।
फिलहाल शुरुआत लोकसभा से होगी, लेकिन राज्यसभा में भी इसे जल्द लागू किया जा सकता है।
ट्रांजिशन को स्मूद बनाने के लिए पुराना टैबलेट-बेस्ड सिस्टम कुछ दिन तक समानांतर रूप से जारी रहेगा।
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