Nasa Mars

Nasa Mars - ख़बरें

  • NASA की मंगल पर बड़ी खोज, मिला 400 करोड़ साल पुराना पानी का सबूत!
    NASA के पर्सेवरेंस रोवर ने मंगल पर एक डेल्टा का पता लगाया है जो 400 करोड़ साल पुराना बताया जा रहा है। यह डेटा मंगल पर जीवन के बारे में अहम खुलासा करता दिखता है। इससे पता चलता है कि सैकड़ों करोड़ साल पहले मंगल पर कभी पानी बहता था। अगर ऐसा है तो जाहिर तौर पर वहां रहने लायक वातावरण भी रहा होगा। नई खोज मंगल पर जीवन की नई संभावनाओं को तलाश में अहम योगदान कर सकती है।
  • NASA ने बना लिया मंगल पर घर! देखें अंदर से कैसा है ये 3D प्रिंटेड हैबिटेट
    NASA ने इंसानों को मंगल पर भेजने की तैयारी में नया कदम उठाया है। एजेंसी ने अपना 3D-printed habitat ‘Mars Dune Alpha’ दिखाया है, जिसे Houston के Johnson Space Center में तैयार किया गया है। यहां पर इंसानों को सीमित संसाधन, कम्युनिकेशन देरी और अलगाव जैसी चुनौतियों के बीच रहना पड़ता है। इस हैबिटेट में चार लोगों के लिए रहने की जगह, मेडिकल स्टेशन और ग्रीनहाउस जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। NASA का कहना है कि इन मिशनों से मिलने वाला डेटा मंगल पर भविष्य की मानव बस्ती बसाने में मदद करेगा।
  • NASA के Perseverance रोवर ने बनाया मंगल ग्रह पर सबसे लंबी ड्राइव का रिकॉर्ड
    पिछले डेढ़ महीने से यह रोवर Jezero क्रेटर रिम की बाहरी ढलानों पर मौजूद Krokodillen पठार पर मिट्टी वाली चट्टानों की खोज कर रहा है। अगर चट्टानों के नमूनों में 'फिलोसिलिकेट्स' कहे जाने वाले मिनरल्स पाए जाते हैं तो इसका मतलब हो सकता है कि पहले इस ग्रह पर बड़ी मात्रा में पानी की मौजूदगी थी। NASA के Curiosity और Opportunity जैसे मंगल ग्रह पर अन्य रोवर्स की तुलना में इसकी स्पीड भी अधिक रही है।
  • मंगल बर्फीला नहीं, नदियों और झीलों से भरा था! नई स्टडी में दावा
    वैज्ञानिक मानते हैं कि मंगल, या लाल ग्रह, कभी पृथ्वी जैसा था। पिछले चार सालों से NASA का पर्सेवरेंस रोवर (Perseverance rover) मंगल पर उस जगह का भ्रमण कर रहा है जहां पर कभी एक क्रेटर में एक शक्तिशाली नदी आकर गिरती थी। कंप्यूटर मॉडल सुझाते हैं कि प्राचीन मंगल पर अवश्य ही बर्फ गिरती होगी, बारिश होती होगी। इसने ग्रह पर सैकड़ों झीलों और नदी घाटियों का निर्माण किया होगा।
  • क्या मंगल की सतह के नीचे पानी मौजूद है? नई रिसर्च ने पुराने दावों पर उठाए सवाल
    PNAS (Proceedings of the National Academy of Sciences) में पब्लिश हुई एक नई स्टडी बताती है कि यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बोल्डर के सीनियर रिसर्च साइंटिस्ट ब्रूस जाकोस्की ने इस विचार पर सवाल उठाए हैं कि मंगल की मिड-क्रस्ट (सतह के नीचे की परत) पानी से भरी हो सकती है। इससे पहले, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के वॉन राइट और उनकी टीम ने NASA के InSight मिशन के डेटा का विश्लेषण करके बताया था कि मंगल की गहराई में मौजूद दरारों वाली आग्नेय चट्टानें पानी जमा करने की क्षमता रखती हैं।
  • मंगल पर कहां से आए रंगीन बादल! नासा की यह फोटो कर रही हैरान
    नासा के क्यूरियोसिटी रोवर ने मंगल ग्रह के आकाश में रंगीन बादलों की अद्भुत तस्वीरें भेजी हैं जिनमें लाल और हरे रंग की छटा देखी जा सकती है। ये बादल मंगल के वातावरण और जलवायु को समझने में मदद कर सकते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार ये इंद्रधनुषी बादल कार्बन डाइऑक्साइड की बर्फ से बने होते हैं और सूर्य की रोशनी के बिखरने के कारण चमकते हैं।
  • मंगल पर दिखी रहस्यमय बनावट! Elon Musk बोले- 'जांच के लिए मिशन भेजना चाहिए'
    Elon Musk ने मंगल पर एक खोजी अभियान भेजकर जांच करने की बात कही है। दरअसल नासा के मार्स ग्लोबल सर्वेयर (MGS) के मार्स ऑर्बिटर कैमरा (MOC) ने मंगल पर एक फोटो खींची थी जिसमें एक सटीक चौकोर आकृति दिखाई दे रही है। यह एक सटीक वर्ग जैसा दिखता है। Musk ने कहा है कि इसके बारे में सीधे जाकर खोज करनी चाहिए कि आखिर इस स्क्येअर शेप का रहस्य क्या है।
  • चंद्रमा पर वैक्‍यूम क्‍लीनर भेज रहे वैज्ञानिक, क्‍या काम करेगा? जानें
    अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) ने एक अभूतपूर्व तकनीक को दुनिया को दिखाया है। इसका नाम लूनार प्‍लैनेटवैक (Lunar PlanetVac (LPV) है। इससे वैज्ञानिकों के चंद्रमा और अन्य ग्रहों पर मिट्टी और चट्टान के सैंपल इकट्ठा करने और उन्‍हें स्‍टडी करने के तरीके में बदलाव आएगा। रिपोर्टों के अनुसार, इस तकनीक को हनीबी रोबोटिक्स ने डेवलप किया है।
  • मंगल ग्रह पर ‘एलियंस की खोज’ के लिए Nasa बना रही नया प्‍लान, पृथ्‍वी पर लाने होंगे सबूत
    साल 2021 से ही नासा का पर्सवेरेंस रोवर (Perseverance rover) मंगल ग्रह से चट्टानों और तलछटों के सैंपल इकट्ठा कर रहा है। हालांकि अभी तक नासा कन्‍फर्म नहीं है कि सैंपलों को कबतक पृथ्‍वी पर लाया जा सकेगा। पहले नासा चाहती थी कि इस दशक के आखिर तक सैंपलों को पृथ्‍वी पर ले आया जाए, पर अब उसमें देर होती हुई दिख रही है।
  • NASA के मार्स रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर (MRO) को मंगल पर दिखा धूल में दबा यह स्पेसक्राफ्ट!
    NASA के मार्स रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर ने रिटायर्ड स्पेसक्राफ्ट इनसाइट लैंडर (InSight lander) को देखा जो कि पूरी तरह से लाल ग्रह की धूल में ढका हुआ था। MRO के HiRISE कैमरा ने ये तस्वीरें ली हैं। तस्वीरें बताती हैं कि कैसे कुछ समय पहल मंगल पर एक्टिव रहा लैंडर अब ग्रह की सतह पर दब गया है। यह वैसी ही रेत और धूल है जो कि पूरे ग्रह पर भी दिखाई देती है।
  • मंगल ग्रह पर मरकर ‘जिंदा हुआ’ Nasa का Ingenuity हेलीकॉप्‍टर, जानें पूरा मामला
    पहली बार वैज्ञानिकों ने दूसरे ग्रह पर किसी हेलीकॉप्‍टर की जांच की है। Nasa JPL के Ingenuity मिशन मैनेजरों का कहना है कि हेलीकॉप्टर को लाल ग्रह (Red Planet) पर दूसरा जीवन मिल सकता है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि हेलीकॉप्‍टर के बैटरी सेंसर काम कर रहे हैं और यह हेलीकॉप्‍टर अब एक तरह के मौसम स्टेशन (Weather Station) के रूप में काम करना जारी रखेगा।
  • NASA को मंगल पर सूर्य ग्रहण में दिखी यह किसकी आंख!
    Perseverance रोवर ने मंगल पर घूमते हुए आसमान में एक गजब नजारा देखा और उसे अपने कैमरा में कैद कर लिया। दरअसल मंगल पर उस समय आंशिक सूर्य ग्रहण घटित हो रहा था। इस दौरान मंगल का उपग्रह यानी चंद्रमा Phobos, सूर्य और मंगल के बीच में आ गया। जिससे कि उसने एक आंख की आकृति ले ली। नासा ने इसे Googly Eye नाम दिया।
  • मंगल ग्रह पर 500 दिन तक रहेगा इंसान, Nasa ने फाइनल की तारीख! आप भी जानें
    अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा, मंगल ग्रह को लेकर कई मिशन प्‍लान कर रही है, जिसमें अंतरिक्ष यात्र‍ियों को मंगल ग्रह पर भेजना भी शामिल है। नासा साल 2035 तक इंसानों को मंगल पर भेजना है। यह सफर आसान नहीं होने वाला। सिर्फ एक तरफ का सफर यानी पृथ्‍वी से मंगल तक पहुंचने में 6 से 7 महीने लगेंगे और 40 करोड़ किलोमीटर की दूरी तय की जाएगी। योजना है कि मंगल ग्रह की सतह पर एस्‍ट्रोनॉट 500 दिन रहें।
  • मंगल पर मिल गई अंतरिक्ष यात्रियों के सिर छुपाने की जगह!
    भविष्य में मंगल मिशन पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए यह सिर छुपाने की जगह के रूप में इस्तेमाल हो सकता है।
  • मंगल ग्रह जैसी जिंदगी पृथ्‍वी पर जिएंगे ये 4 साइंटिस्‍ट, कब, कहां, कैसे? जानें
    Nasa Mars House : अमेरिकी स्‍पेस एजेंसी ने धरती पर ही ऐसा सेटअप तैयार कर दिया, जिसमें मंगल ग्रह का वातावरण है।

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