Cyber Fraud India

Cyber Fraud India - ख़बरें

  • Digital Arrest में ₹4 हजार करोड़ से ज्यादा गंवा चुके हैं भारतीय, आप भी भूलकर न करें ये गलतियां
    भारत में Digital Arrest Scam तेजी से बढ़ता साइबर अपराध बन गया है। सरकार के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, 2022 से मई 2026 के बीच इस तरह की ठगी से जुड़े 2.97 लाख से ज्यादा मामले दर्ज हुए और लोगों को 4,057.7 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। ठग खुद को पुलिस, CBI, ED या दूसरी सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर डराते हैं और उनसे पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं। साइबर क्राइम एजेंसियां साफ कर चुकी हैं कि भारत में Digital Arrest जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। ऐसे में किसी भी संदिग्ध कॉल पर सतर्क रहना जरूरी है।
  • WhatsApp Username विवाद के बीच श्रीधर वेम्बु का यू-टर्न, Arattai से हटेगा फीचर
    WhatsApp के Username फीचर को लेकर भारत सरकार की ओर से उठाए गए सवालों के बीच Zoho ने अपने मैसेजिंग ऐप Arattai से Username आधारित अकाउंट फीचर हटाने का फैसला किया है। Zoho के को-फाउंडर Sridhar Vembu ने कहा कि यह कदम रेगुलेटरी बदलावों के अनुपालन के लिए उठाया जा रहा है। हालांकि सरकार ने Username फीचर पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन Meta, Telegram और Signal से साइबर फ्रॉड और सिक्योरिटी जोखिमों को लेकर जवाब मांगा गया है। WhatsApp का कहना है कि उसने Username फीचर के साथ कई सिक्योरिटी उपाय भी जोड़े हैं।
  • WhatsApp Username फीचर लॉन्च से पहले फंसा! सरकार को क्यों सता रही है बड़ी चिंता?
    WhatsApp इस साल के आखिर तक Username फीचर लॉन्च करने की तैयारी में है, लेकिन इससे पहले भारत सरकार इसके रोलआउट को लेकर कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। ET की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार को चिंता है कि इस फीचर की मदद से फर्जी पहचान (Impersonation) और साइबर फ्रॉड के मामले बढ़ सकते हैं। अगर जरूरत पड़ी तो डिजिटल फ्रॉड रोकने के लिए नया कानून भी लाया जा सकता है। दूसरी ओर, एक्सपर्ट्स का कहना है कि Username फीचर से मोबाइल नंबर शेयर करने की जरूरत कम होगी, लेकिन इससे Name Squatting और फर्जी अकाउंट्स का जोखिम भी बढ़ सकता है।
  • सरकार दे रही फ्री Cyber Security Course, सिर्फ 2.5 घंटे में मिलेगा सर्टिफिकेट, ऐसे करें अप्लाई
    भारत सरकार के Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने फ्री ऑनलाइन Cyber Security Course शुरू किया है। यह कोर्स गृह मंत्रालय के तहत तैयार किया गया है और इसका मकसद लोगों को साइबर फ्रॉड से बचने के तरीके सिखाना है। कोर्स में फेक लिंक, स्कैम कॉल्स, डिजिटल पेमेंट सुरक्षा और सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल जैसे विषय शामिल हैं। इसे करीब 2.5 घंटे में पूरा किया जा सकता है और सफल प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा।
  • हर UPI यूजर को पता होनी चाहिए ये 7 सिक्योरिटी टिप्स, नहीं तो एक गलती पड़ेगी भारी!
    UPI पेमेंट आज के समय में सबसे आसान और तेज तरीका बन चुका है, लेकिन इसके साथ फ्रॉड का खतरा भी बढ़ा है। कई यूजर्स छोटी-छोटी गलतियों के कारण अपने पैसे गंवा देते हैं। ऐसे में UPI ऐप में मौजूद कुछ जरूरी सेटिंग्स को ऑन रखना बेहद जरूरी है, जैसे App Lock, ट्रांजैक्शन अलर्ट और डेली लिमिट सेट करना। इसके अलावा अनजान रिक्वेस्ट और फर्जी ऐप्स से बचना भी जरूरी है। सही सावधानी और सेटिंग्स के जरिए आप अपने अकाउंट को सुरक्षित रख सकते हैं और फ्रॉड के रिस्क को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
  • 81 साल के पिता ने बेटे को बचाया ‘डिजिटल अरेस्ट’ से, ऐन वक्त पर रोकी ₹12 लाख की ठगी
    पुणे के निगडी इलाके में एक 81 वर्षीय व्यक्ति ने अपने बेटे को 12 लाख रुपये की साइबर ठगी से बचा लिया। ठगों ने खुद को मुंबई पुलिस अधिकारी बताकर “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाया और वीडियो कॉल के जरिए पैसे ट्रांसफर कराने की कोशिश की। इंजीनियर को शक होने पर उन्होंने अपने पिता को जानकारी दी, जिन्होंने तुरंत पुलिस को सूचित किया। पुलिस के पहुंचते ही ठगों ने कॉल काट दी। इस घटना में साइबर अवेयरनेस सेशन और मोबाइल ऐप की जानकारी ने अहम भूमिका निभाई।
  • WhatsApp Web से करोड़ों की ठगी, CEOs के नाम पर बड़ा साइबर स्कैम!
    हैदराबाद में साइबर ठगों ने एक नया और खतरनाक फ्रॉड तरीका अपनाया है, जिसमें बड़ी कंपनियों के CEO और CFO के नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, इस स्कैम की शुरुआत फिशिंग ईमेल से होती है, जिसमें दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही सिस्टम हैक हो जाता है। इसके बाद हैकर्स WhatsApp Web के जरिए अधिकारियों के अकाउंट से मैसेज भेजकर अकाउंटेंट्स को तुरंत पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहते हैं। चूंकि मैसेज असली अकाउंट से आते हैं, कर्मचारी उन्हें सही मान लेते हैं और ठगी का शिकार हो जाते हैं।
  • YouTube वीडियो से शुरू हुआ खेल, नकली ऐप और WhatsApp ग्रुप ने कराई 11.8 लाख की ठगी
    एक महिला ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कैम का शिकार हो गई, जिसमें उससे 11.8 लाख रुपये ठग लिए गए। शिकायत के मुताबिक उसने YouTube पर एक ट्रेडिंग वीडियो देखा, जिसके बाद उसे WhatsApp ग्रुप में जोड़ लिया गया। यहां उसे निवेश के लिए प्रेरित किया गया और अलग-अलग बैंक अकाउंट्स में पैसे ट्रांसफर करवाए गए। महिला ने 6 मार्च से 14 मार्च के बीच कई किश्तों में रकम जमा की, लेकिन उसे कोई रिटर्न नहीं मिला। मामले में IT Act और BNS के तहत केस दर्ज किया गया है।
  • AI स्कैम गैंग्स की हिट लिस्ट में भारत दूसरे नंबर पर, Meta की इस रिपोर्ट में सामने आया पूरा फ्रॉड गेम
    Meta की 2026 Adversarial Threat Report में बताया गया है कि ऑनलाइन स्कैम अब पहले से ज्यादा एडवांस हो चुके हैं और इनमें AI का बड़ा रोल है। स्कैमर्स अब फेक प्रोफाइल, डीपफेक और नेचुरल बातचीत के जरिए लोगों को आसानी से झांसा दे रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ये ठगी अब एक पूरी इंडस्ट्री की तरह काम कर रही है, जिसमें अलग-अलग स्टेज पर प्लानिंग की जाती है। साउथईस्ट एशिया से ऑपरेट होने वाले बड़े स्कैम नेटवर्क्स भारत समेत कई देशों को टारगेट कर रहे हैं। इसके अलावा फेक रेंटल और फेक फ्यूनरल जैसे नए स्कैम भी सामने आए हैं।
  • Fake Traffic Challan Scam: 500 रुपये बचाने गए और गंवा दिए लाखों, ऐसे बचें इस नए साइबर स्कैम से
    देश में फेक ट्रैफिक चालान स्कैम तेजी से फैल रहा है, जिसमें साइबर ठग नकली मैसेज भेजकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। हाल के मामलों में पुणे के एक दुकानदार से करीब 2.76 लाख रुपये और दिल्ली के एक व्यक्ति से 2.49 लाख रुपये की ठगी हुई। इन मैसेज में चालान भरने के नाम पर लिंक दिया जाता है, जिस पर क्लिक करने से यूजर की बैंकिंग जानकारी चोरी हो जाती है। पुलिस के मुताबिक कई मामलों में रिमोट एक्सेस के जरिए फोन का कंट्रोल भी ले लिया जाता है। ऐसे में किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है।
  • Google पर डॉक्टर का नंबर खोजने से उड़ गए 18 लाख! साइबर फ्रॉड का नया तरीका
    उत्तर प्रदेश के अनुपशहर में साइबर ठगों ने एक बीमार व्यक्ति और उसकी पत्नी से करीब 18.61 लाख रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित ने डॉक्टर का नंबर खोजने के लिए Google पर सर्च किया था, जिसके बाद ठगों ने खुद को डॉक्टर से जुड़ा बताकर ‘Doctor Appointment’ नाम का ऐप डाउनलोड कराया। जांच के मुताबिक, ऐप को दी गई परमिशन के जरिए आरोपियों ने मोबाइल का रिमोट एक्सेस हासिल कर लिया और बैंक खातों से कई ट्रांजेक्शन कर पैसे निकाल लिए। पीड़ित को इस धोखाधड़ी का पता कई दिनों बाद चला।
  • SIM बदली तो WhatsApp एक्सेस हो जाएगा बंद? नए फीचर को टेस्ट कर रहा है प्लेटफॉर्म
    WhatsApp भारत में SIM बाइंडिंग फीचर जोड़ने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह बदलाव DoT के नवंबर 2025 के निर्देश के तहत किया जा रहा है, जिसमें मैसेजिंग ऐप्स के लिए SIM आधारित लॉगइन वेरिफिकेशन अनिवार्य करने की बात कही गई है। बीटा वर्जन में दिखे संकेतों के अनुसार WhatsApp समय समय पर यह जांच करेगा कि अकाउंट से जुड़ा SIM फोन में मौजूद है या नहीं। वेरिफिकेशन फेल होने पर ऐप एक्सेस सीमित हो सकता है, हालांकि चैट सुरक्षित रहेंगी।
  • OTP ठगी रोकने के लिए Airtel का AI एक्शन, कॉल के वक्त तुरंत मिलेगा फ्रॉड वार्निंग अलर्ट!
    Airtel ने OTP आधारित बैंकिंग फ्रॉड से निपटने के लिए नया AI Fraud Alert सिस्टम पेश किया है। कंपनी के मुताबिक यह फीचर नेटवर्क लेवल पर काम करता है और संभावित जोखिम वाली कॉल के दौरान ग्राहक को रियल टाइम अलर्ट देता है। अगर बैंकिंग ट्रांजैक्शन से जुड़ा OTP संदिग्ध स्थिति में डिटेक्ट होता है, तो यूजर को चेतावनी दी जाएगी। Airtel का दावा है कि इस AI आधारित समाधान को व्यापक ट्रायल में परखा गया है। फिलहाल यह फीचर हरियाणा में लाइव है और अगले दो हफ्तों में देशभर में रोलआउट किया जाएगा।
  • WinGo साइबर फ्रॉड केस ने खोली आंखें, कहीं आप भी न बन जाएं स्कैम का हिस्सा, इन बातों का रखें ध्यान
    WinGo ऐप से जुड़े साइबर फ्रॉड के खुलासे के बाद पुलिस और सरकार ने आम यूजर्स को सतर्क रहने की सलाह दी है। जांच में सामने आया है कि आसान कमाई का दावा करने वाले ऐप्स यूजर्स के मोबाइल नंबर और SMS एक्सेस का दुरुपयोग कर साइबर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे मामलों में अनजाने यूजर्स भी स्कैम नेटवर्क का हिस्सा बन सकते हैं। सरकार ने संदिग्ध ऐप्स से दूर रहने, अनावश्यक परमिशन न देने और किसी भी साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।
  • क्या आप भी Mobile पर ये App यूज कर रहे हैं? 1 ऐप, हजारों नंबर और करोड़ों का स्कैम!
    गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने ई-चालान सिस्टम से जुड़े एक साइबर फ्रॉड की जांच के दौरान WinGo नाम के एक ऐप को लेकर गंभीर खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, यह ऐप कथित तौर पर “टेलीकॉम म्यूल ऐज़ ए सर्विस” मॉडल पर काम कर रहा है, जिसमें आम लोगों के मोबाइल नंबर और SIM कार्ड का इस्तेमाल कर साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता है। यूजर्स को आसान कमाई का लालच देकर उनके नंबर से फर्जी SMS भेजे जाते हैं। पुलिस ने ऐसे ऐप्स से दूर रहने की सलाह दी है।

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