Artificial Intelligence News

Artificial Intelligence News - ख़बरें

  • जो चीज दिख रही है, वही खरीदना चाहते हैं? Amazon का AI करेगा काम आसान, नए टूल्स हुए रिलीज
    Amazon ने अपने शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर कई नए AI-आधारित विजुअल सर्च फीचर्स पेश किए हैं। कंपनी के मुताबिक, इनकी मदद से यूजर्स टेक्स्ट, तस्वीर और स्मार्टफोन कैमरे का उपयोग करके प्रोडक्ट्स को ज्यादा आसानी से खोज सकेंगे। नए फीचर्स में रियल-टाइम AI इमेज जनरेशन, Shop by Style, Amazon Lens Live, Circle to Search और More Like This शामिल हैं। Amazon Lens के जरिए यूजर्स तस्वीर अपलोड कर टेक्स्ट निर्देश भी जोड़ सकते हैं। कंपनी का कहना है कि इन टूल्स का उद्देश्य खरीदारी के दौरान सही प्रोडक्ट ढूंढने की प्रक्रिया को अधिक आसान और विजुअल बनाना है।
  • कब रुकेगा Layoffs का सिलसिला? Meta में 10% कर्मचारियों की छंटनी, AI पर बड़ा दांव!
    Meta इस हफ्ते बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी करने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी करीब 10 प्रतिशत कर्मचारियों को निकाल सकती है। इसके साथ Meta अपने AI आधारित वर्कफ्लो और इंटरनल सिस्टम्स को मजबूत करने के लिए बड़े ऑर्गनाइजेशन बदलाव भी कर रही है। कंपनी करीब 7 हजार कर्मचारियों को नए AI प्रोजेक्ट्स में ट्रांसफर करेगी, जबकि कई मैनेजरियल रोल्स खत्म किए जाएंगे। Meta का फोकस अब AI एजेंट्स और ऑटोमेशन सिस्टम्स पर बढ़ रहा है। इन बदलावों को लेकर कर्मचारियों के बीच नाराजगी भी सामने आई है और कई लोगों ने प्राइवेसी से जुड़े टूल्स का विरोध किया है।
  • भारत में AI फोटो का क्रेज बेकाबू! ChatGPT Images 2.0 ने पार किया 1 अरब का आंकड़ा
    OpenAI के सीईओ Sam Altman ने खुलासा किया है कि भारत में यूजर्स ChatGPT Images 2.0 के जरिए 1 अरब से ज्यादा AI इमेज बना चुके हैं। कंपनी ने हाल ही में भारत को ChatGPT Images 2.0 का सबसे बड़ा ग्लोबल मार्केट भी बताया था। OpenAI के मुताबिक भारतीय यूजर्स इस टूल का इस्तेमाल एनीमे स्टाइल फोटो, सिनेमैटिक एडिट्स, फेक न्यूजपेपर डिजाइन और फैशन मूड बोर्ड जैसे क्रिएटिव कंटेंट बनाने के लिए कर रहे हैं। कंपनी का कहना है कि नया मॉडल पहले के मुकाबले ज्यादा सटीक इमेज जनरेट कर सकता है और हिंदी व बंगाली जैसी भाषाओं को भी बेहतर सपोर्ट करता है।
  • Amazon पर AI बनाएगा शॉपिंग आसान, सुझाव से तुलना तक बोलकर होगा सबकुछ!
    Amazon ने “Alexa for Shopping” नाम का नया AI शॉपिंग असिस्टेंट पेश किया है, जो यूजर्स को ज्यादा पर्सनल और बातचीत जैसी शॉपिंग सुविधा देगा। कंपनी के मुताबिक यह फीचर यूजर्स की शॉपिंग हिस्ट्री, पसंद और खरीदारी की आदतों को समझकर प्रोडक्ट सुझाव देगा। यूजर्स नेचुरल भाषा में सवाल पूछ सकेंगे, प्रोडक्ट तुलना कर सकेंगे और कीमत कम होने पर नोटिफिकेशन भी पा सकेंगे। इसके अलावा AI ऑटोमैटिक ग्रॉसरी री-ऑर्डर, कार्ट मैनेजमेंट और दूसरे रिटेलर्स से खरीदारी जैसे काम भी कर सकेगा। फिलहाल यह फीचर अमेरिका में रोलआउट किया जा रहा है।
  • WhatsApp पर प्राइवेट चैट, कंपनी भी नहीं पढ़ेगी आपकी बातें! जानें क्या है Incognito Chat फीचर
    WhatsApp ने Meta AI के लिए नया “Incognito Chat” फीचर पेश किया है। कंपनी के मुताबिक यह फीचर Private Processing टेक्नोलॉजी पर आधारित है और इसमें होने वाली बातचीत पूरी तरह प्राइवेट रहेगी। WhatsApp का दावा है कि Meta भी इन चैट्स को नहीं पढ़ पाएगा। Incognito Chat में मैसेज सुरक्षित वातावरण में प्रोसेस होंगे और डिफॉल्ट रूप से गायब भी हो जाएंगे। कंपनी का कहना है कि यह फीचर उन यूजर्स के लिए उपयोगी होगा जो AI से हेल्थ, फाइनेंस या दूसरी निजी चीजों से जुड़े सवाल पूछते हैं। यह फीचर आने वाले महीनों में WhatsApp और Meta AI ऐप पर रोलआउट होगा।
  • Android को पर्सनल AI एजेंट बनाने की तैयारी में Google, आपकी पूरी डिजिटल लाइफ संभालेगा!
    Google कथित तौर पर Gemini AI को एक नए AI एजेंट सिस्टम में बदलने पर काम कर रहा है, जिसका इंटरनल नाम “Remy” बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह AI यूजर्स की तरफ से कई काम खुद पूरा कर सकेगा। इसमें ऑनलाइन खरीदारी, डॉक्युमेंट भेजना, दूसरे लोगों से बातचीत और scheduled tasks संभालना शामिल हो सकता है। Gemini के Personal Intelligence फीचर्स पहले से Gmail और Google Photos जैसी सेवाओं से जानकारी लेकर जवाब तैयार करते हैं। माना जा रहा है कि नया सिस्टम इन्हीं personal context डेटा का इस्तेमाल करके यूजर की लाइफ को ज्यादा ऑटोमेटेड बनाने की कोशिश करेगा।
  • AI से काम आसान, लेकिन दिमाग को लग रही “शॉर्टकट” की आदत! स्टडी में बड़ा खुलासा
    एक नई स्टडी में पाया गया है कि सिर्फ 10 मिनट तक AI का इस्तेमाल करने से लोगों की सोचने की क्षमता और किसी समस्या पर टिके रहने की आदत प्रभावित हो सकती है। रिसर्च में 1,200 से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया, जहां AI की मदद से उनकी परफॉर्मेंस बेहतर रही, लेकिन बाद में बिना AI के उनकी क्षमता कम हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, AI आसान जवाब देता है, जिससे दिमाग की मेहनत कम होती है और “पर्सिस्टेंस” यानी धैर्य घट सकता है। यह ट्रेंड लंबे समय में सीखने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
  • मार्क जुकरबर्ग खुद को बदल रहे हैं AI में? Meta में CEO का डिजिटल अवतार संभालेगा कमान!
    Meta एक फोटोरियलिस्टिक AI-पावर्ड डिजिटल CEO पर काम कर रही है, जिसे Mark Zuckerberg के आधार पर तैयार किया जा रहा है। यह AI कर्मचारियों से बातचीत कर सकेगा और इंटरनल कामकाज में मदद करेगा। यह प्रोजेक्ट कंपनी की AI-फर्स्ट रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत Meta ऑटोमेशन और AI सिस्टम्स को तेजी से बढ़ा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश भी कर रही है।
  • AI आपकी नौकरी लेने को बैठा है तैयार! सर्वे में खुलासा
    दुनियाभर की तमाम कंपनियां आपकी जगह AI को देने के लिए तैयार बैठी हैं। ResumeBuilder की ओर से एक सर्वे किया गया है जो मार्च 2026 का ही सर्वे बताया जा रहा है। सर्वे में सामने आया है कि कंपनियां खुशी-खुशी इंसानों का काम AI को सौंपने के लिए तैयार बैठी हैं। स्टडी में अमेरिका के वरिष्ठ बिजनेस लीडर्स के बयान भी शामिल किए गए हैं
  • Elon Musk का ChatGPT पर तीखा निशाना, बोले "बच्चों को इससे दूर रखें"
    Elon Musk ने OpenAI के ChatGPT को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह AI चैटबॉट बच्चों और मानसिक रूप से कमजोर लोगों के लिए सुरक्षित नहीं हो सकता। यह बयान कनाडा में हुई एक स्कूल शूटिंग के बाद सामने आया है, जिसमें आरोप है कि संदिग्ध हमलावर ने घटना से पहले ChatGPT के साथ कई बातचीत की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन चैट्स को OpenAI के सिस्टम ने फ्लैग किया था, लेकिन कंपनी ने पुलिस को सूचना नहीं दी। इस मामले के बाद AI चैटबॉट्स की जिम्मेदारी और सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
  • AI कर रहा है 'भेजा फ्राई'? ज्यादा AI टूल्स का यूज आपके लिए खतरा! नई स्टडी में दावा
    वर्कप्लेस पर AI टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और कई कर्मचारी एक साथ कई AI सिस्टम का यूज कर रहे हैं। हालांकि एक नई स्टडी में सामने आया है कि लगातार इन टूल्स को मॉनिटर और मैनेज करना मानसिक थकान पैदा कर सकता है, जिसे “AI Brain Fry” कहा गया है। Harvard Business Review में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक कुछ कर्मचारियों को ध्यान लगाने में कठिनाई, निर्णय लेने में देरी और सिरदर्द जैसी समस्याएं महसूस हुईं। स्टडी यह भी बताती है कि जिन कर्मचारियों पर AI टूल्स की निगरानी का दबाव ज्यादा होता है, उनमें निर्णय थकान और गलतियों की संभावना भी बढ़ सकती है।
  • क्या कंपनियां AI को बना रही हैं छंटनी का बहाना? Sam Altman ने बताई चौंकाने वाली सच्चाई
    OpenAI के CEO Sam Altman ने CNBC TV-18 को दिए इंटरव्यू में कहा कि कुछ कंपनियां AI के नाम पर छंटनी को सही ठहराने की कोशिश कर रही हैं, जिसे उन्होंने “AI washing” कहा। उनके मुताबिक, हर जॉब कट AI की वजह से नहीं हो रहा, हालांकि कुछ सेक्टर में असली बदलाव भी देखने को मिल रहा है। Altman ने माना कि आने वाले सालों में AI का रोजगार पर प्रभाव और स्पष्ट होगा, लेकिन नई तरह की नौकरियां भी पैदा होंगी। AI इंडस्ट्री के अन्य लीडर्स ने भी इस मुद्दे पर अलग अलग राय रखी है।
  • AI Impact Summit: डेटा के बाद अब AI को सस्ता बनाएगा Reliance Jio, 10 लाख करोड़ का होगा निवेश
    रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने India AI Impact Summit में ऐलान किया कि जियो अगले सात साल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर में 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेगा। उनके मुताबिक, यह निवेश इसी साल से शुरू होगा और इसका फोकस भारत के लिए सॉवरेन कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर रहेगा। जियो इंटेलिजेंस गीगावॉट स्तर के डेटा सेंटर स्थापित करेगा, ताकि AI को सस्ता और सुलभ बनाया जा सके। अंबानी ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य हर नागरिक और हर सेक्टर तक AI पहुंचाना है।
  • इंसानों की जरूरत खत्म? 15 AI एजेंट्स से पूरी कंपनी चला रहा है यह फाउंडर
    AI के बढ़ते असर के बीच Florida के डिफेंस टेक फाउंडर Aaron Sneed ने दावा किया है कि वह अपनी पूरी कंपनी AI एजेंट्स के सहारे चला रहे हैं। उन्होंने “The Council” नाम से करीब 15 AI एजेंट्स का सिस्टम तैयार किया है, जो HR, लीगल, सप्लाई चेन और डेटा मैनेजमेंट जैसे काम संभालता है। Sneed के मुताबिक इससे हर हफ्ते लगभग 20 घंटे की बचत होती है और लागत भी कम होती है। हालांकि उन्होंने माना कि अंतिम कानूनी और रणनीतिक फैसलों के लिए अभी भी मानव विशेषज्ञों की जरूरत पड़ती है।
  • कोडिंग करने वालों की जॉब खतरे में? OpenAI से Anthropic तक, AI लिख रहा है 90% से ज्यादा कोड
    AI अब सिर्फ कोडिंग असिस्टेंट नहीं रहा, बल्कि खुद सॉफ्टवेयर का मुख्य लेखक बनता जा रहा है। San Francisco बेस्ड AI लैब Cognition के को-फाउंडर Scott Wu ने बताया कि उनकी कंपनी में 90 प्रतिशत से ज्यादा कोड AI सिस्टम्स द्वारा लिखा जा रहा है और इंजीनियर्स को 10 प्रतिशत से भी कम कोड खुद टाइप करना पड़ता है। OpenAI ने भी हाल ही में खुलासा किया कि उसकी एक टीम ने पूरा प्रोडक्ट AI से जनरेट कोड पर शिप किया। Anthropic और xAI जैसे नाम भी इसी ट्रेंड की ओर इशारा कर रहे हैं, जिससे पारंपरिक कोडिंग की परिभाषा बदलती नजर आ रही है।

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