सरकार ने अपने आदेश में कहा था कि सभी स्मार्टफन मैन्युफैक्चरर्स और इम्पोर्टर्स को यह पक्का करना होगा कि देश में बिकने वाले डिवाइसेज पर संचार साथी ऐप को प्री-इंस्टॉल किया जाए
इस ऐप से स्मार्टफोन्स यूजर्स को नकली या चोरी किए गए हैंडसेट का पता लगाने में आसानी होगी
देश में बिकने वाले स्मार्टफोन्स में Sanchar Saathi ऐप को प्री-इंस्टॉल किए जाने के केंद्र सरकार के आदेश के बाद विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि, टेलीकॉम मिनिस्टर Jyotiraditya Scindia ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि यूजर्स के लिए संचार साथी ऐप अनिवार्य नहीं है।
सरकार ने अपने आदेश में कहा था कि सभी स्मार्टफन मैन्युफैक्चरर्स और इम्पोर्टर्स को यह पक्का करना होगा कि देश में बिकने वाले डिवाइसेज पर संचार साथी ऐप को प्री-इंस्टॉल किया जाए। टेलीकॉम डिपार्टमेंट (DoT) की ओर से जारी इस आदेश का उद्देश्य डिजिटल फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों को रोकने के साथ ही स्मार्टफोन्स के सेकेंड हैंड मार्केट में नकली डिवाइसेज की बिक्री पर नियंत्रण करना है। सिंधिया ने बताया, "यह ऐप पूरी तरह वैकल्पिक है। अगर आप इसे डिलीट करना चाहते हैं, तो आप कर सकते हैं। अगर आप रजिस्टर नहीं करना चाहते, तो आपको रजिस्टर नहीं करना चाहिए और इसे कभी भी हटा सकते हैं।"
स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरर्स को इन बदलावों को लागू करने के लिए 90 दिनों की समयसीमा दी गई है। इस ऑर्डर के तहत, नया मोबाइल डिवाइस (Android या iPhone) को खरीदने पर सरकार का संचार साथी ऐप पहले से उसमें इंटीग्रेटेड होगा। DoT के ऑर्डर में यह भी कहा गया है कि यूजर्स को डिवाइसेज के पहली बार सेटअप करने के दौरान यह ऐप तुरंत दिखना चाहिए। इसके साथ ही स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरर्स पर ऐप के एक्सेस और फंक्शंस में रुकावट डालने पर भी रोक लगाई गई है। स्मार्टफोन्स में इस ऐप को पूरी तरह एनेबल करना होगा।
हालांकि, यह ऑर्डर नए हैंडसेट की खरीदारी के लिए है लेकिन इनवेंटरी में मौजूद बिना बिके स्मार्टफोन्स के लिए भी मैन्युफैक्चरर्स को ओवर-द-एयर सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए ऐप को इंस्टॉल करने का निर्देश दिया गया है। देश में सेकेंड हैंड स्मार्टफोन्स की बड़ी संख्या में बिक्री होती है। इनमें चोरी किए गए या ब्लैकलिस्टेड डिवाइसेज भी शामिल होते हैं। अगर बायर्स चोरी किए गए या ब्लैकलिस्टेड स्मार्टफोन्स खरीदते हैं तो उन्हें मुश्किल हो सकती है। सायबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई है। केंद्र सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए सायबर क्राइम हेल्पलाइन शुरू करने जैसे कुछ उपाय भी किए हैं। हालांकि, इसके बावजूद सायबर अपराधों के मामले बढ़ रहे हैं।
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