नई खोज से मंगल ग्रह के भूविज्ञान में एक नया आयाम जुड़ गया है। इससे पृथ्वी के बाहर जीवन की खोज के लिए नई संभावनाएं खुल गई हैं।
मंगल ग्रह पर वैज्ञानिकों को पानी की मौजूदगी के नए सबूत मिले हैं।
मंगल पर वैज्ञानिकों को एक ऐसी खोज हाथ लगी है जो इस लाल ग्रह पर पानी के नए सबूतों की ओर संकेत करती है। यहां पर चीनी वैज्ञानिकों को ऐसी गुफाएं मिली हैं जो पानी के बहाव के कारण बनी हो सकती हैं। कहा गया है कि ये संभावित कार्स्ट गुफाएं किसी अन्य ग्रह पर पाई जाने वाली अपनी तरह की पहली गुफाएं हैं। इससे पहले मंगल पर ज्वालामुखीय गुफाएं भी पाई गई हैं। लेकिन नई गुफाएं पानी की मौजूदगी के सबूत पेश करती हैं। आइए जानते हैं विस्तार से।
मंगल ग्रह पर वैज्ञानिकों को पानी की मौजूदगी के नए सबूत मिले हैं। चीन से वैज्ञानिकों ने मंगल के हेबरस वेल्स क्षेत्र में नई गुफाओं के बारे में पता लगाया है जो एक अभूतपूर्व खोज है। यहां पर 8 गुफाएं खोजी गई हैं जिनके बनने का कारण पानी हो सकता है। Daily Galaxy की रिपोर्ट के अनुसार, ये नई संरचनाएं घुलनशील चट्टानों के रासायनिक विघटन के परिणामस्वरूप बनी हुई प्रतीत होती हैं।
नई खोज से मंगल ग्रह के भूविज्ञान में एक नया आयाम जुड़ गया है। इससे पृथ्वी के बाहर जीवन की खोज के लिए नई संभावनाएं खुल गई हैं। इन गुफाओं में जैविक निशान संरक्षित हो सकते हैं, जो कि भविष्य के अन्वेषण अभियानों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। स्टडी को Astrophysical Journal Letters में प्रकाशित किया गया है। जिसके लिए शोधकर्ताओं ने नासा सैटेलाइट्स के डेटा का इस्तेमाल किया है जिसमें Mars Global Surveyor भी शामिल है।
गुफाओं के क्या हैं गुण
इन गुफाओं में कुछ विशेष गुण पाए गए हैं। प्रत्येक ओपनिंग गोलाकार और गहरी है। लेकिन इसमें उल्कापिंडों के टकराने से बने गड्ढों में आमतौर पर दिखाई देने वाले ऊंचे किनारे या आसपास के मलबे का अभाव है। ये रोशनदान जैसे दिखते हैं जो ढहने वाली संरचनाएं हैं। ये भीतर की ओर खुलते हैं।
सबसे विशेष इन गुफाओं के पास मौजूद चट्टानें हैं। नासा के थर्मल एमिशन स्पेक्ट्रोमीटर (TES) का डेटा बताता है कि इनमें कार्बोनेट और सल्फेट मौजूद हैं। आखिर में शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि ये संरचनाएं संभवतः भूमिगत जल प्रवाह द्वारा घुलनशील चट्टान को घोलने से बनी थीं। लेकिन मंगल ग्रह पर पहले कभी ऐसी कोई खोज नहीं हुई और न ही दर्ज हुई। EarthSky के अनुसार, शोधकर्ताओं का मानना है कि किसी समय ये गुफाएं सूक्ष्मजीवियों के लिए एक उपयुक्त और सुरक्षित स्थान रही होंगीं। जहां पर पानी और आवश्यक रासायनिक तत्व मौजूद रहे होंगे। हो सकता है कि कभी यहां जीवन रहा हो!
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