• होम
  • विज्ञान
  • ख़बरें
  • वैज्ञानिकों ने 48,500 साल पुराने सोए हुए वायरस को जगाकर Corona की तरह मोल लिया बड़ा खतरा!

वैज्ञानिकों ने 48,500 साल पुराने सोए हुए वायरस को जगाकर Corona की तरह मोल लिया बड़ा खतरा!

ये वायरस अमीबा और एक कोशिका वाले धब्बेनुमा जीवों में संक्रमण करते हैं जो पानी और मिट्टी में पाए जाते हैं।

वैज्ञानिकों ने 48,500 साल पुराने सोए हुए वायरस को जगाकर Corona की तरह मोल लिया बड़ा खतरा!

Photo Credit: The New York Times

साइबेरिया में पर्माफ्रोस्ट (जमी हुई जमीन) में वैज्ञानिकों को मिला 48,500 साल पुराना वायरस

ख़ास बातें
  • वैज्ञानिकों ने यहां 13 वायरस को खोजा है
  • ये वायरस 5 अलग जीव समूहों से ताल्लुक रखते हैं
  • इनमें से एक वायरस 48,500 साल पुराना है
विज्ञापन
धरती पर जीवों की करोड़ के लगभग प्रजातियां अभी तक खोजी जा चुकी हैं  और ये खोज निरंतर अभी भी जारी है। अब वैज्ञानिकों ने साइबेरिया में कुछ ऐसे नए वायरस खोजे हैं जो हजारों सालों से सुप्त अवस्था में वहां मौजूद थे। वायरस ऐसे जीवाणु होते हैं जो किसी माध्यम के बिना मृत अवस्था में रहते हैं और जैसे उन्हें एक माध्यम मिलता है, वे जीवित हो उठते हैं। तो क्या साइबेरिया में मिले ये नए वायरस मानव के लिए नया खतरा बन सकते हैं? या फिर यह आने वाले खतरे की पूर्व चेतावनी है? आइए आपको बताते हैं कि साइबेरिया में वैज्ञानिकों को क्या मिला है। 
 

जमी हुई जमीन में मिला 48,500 साल पुराना वायरस

साइबेरिया में पर्माफ्रोस्ट में जमे कुछ ऐसे वायरस पाए गए हैं जो आज से लगभग 48 हजार 500 वर्ष पुराने हैं। पर्माफ्रोस्ट ऐसी जगह को कहते हैं जिसकी मिट्टी पानी के जमने के तापमान से भी नीचे के तापमान पर लगातार कई सालों तक जमी रहती है। ऐसी मिट्टी सीमेंट या कंक्रीट की तरह हो जाती है जिसको खोदने के लिए भी बड़े बड़े औजारों की जरूरत होती है। साइबेरिया समेत ग्रीनलैंड, अलास्का आदि क्षेत्रों में भी पर्माफ्रोस्ट पाए जाते हैं जहां हजारों सालों मिट्टी जमी पड़ी है। साइबेरियन पर्माफ्रोस्ट में मिले ये वायरस हिमयुग के समय के बताए जा रहे हैं। 
eodnk05g

आर्कटिक का पर्माफ्रोस्ट
Photo Credit: China dialogue

वैज्ञानिकों ने यहां 13 वायरस को खोजा है और उन्हें फिर से जीवित कर दिया है। ये वायरस 5 अलग जीव समूहों से ताल्लुक रखते हैं। इनमें से एक वायरस 48,500 साल पुराना है। वहीं, तीन नए वायरस 27 हजार साल पुराने मैमथ के मल और ऊन से मिले हैं। इनका नाम पीथोवायरस मैमथ, पैंडोवायरस मैमथ और मेगावायरस मैमथ है। दो वायरस ऐसे हैं जो जमे हुए साइबेरियन भेड़िया के पेट से मिले हैं। इनका नाम पैकमैनवायरस लूपुस और पैंडोरावायरस लूपुस है। 
 

कितने संक्रामक हैं ये वायरस

ये वायरस अमीबा और एक कोशिका वाले धब्बेनुमा जीवों में संक्रमण करते हैं जो पानी और मिट्टी में पाए जाते हैं। लेकिन इनको लेकर किए गए प्रयोग इशारा करते हैं कि यह किसी जीव की कोशिका में घुस सकते हैं और सेल को रेप्लिकेट यानि कि उसकी कॉपी भी बना सकते हैं। यह खोज फ्रांस की ऐक्स मारसिली यूनिवर्सिटी की ओर से की गई है जिसने 2014 में साइबेरियन पर्माफ्रोस्ट में से ही एक 30 हजार साल पुराने वायरस की खोज की थी। लेकिन अबकी बार जो वायरस जीवित किया गया है, यह 48,500 साल पुराना है जो अब तक खोजा गया सबसे पुराना वायरस बताया जा रहा है। 

न्यू साइंटिस्ट की एक रिपोर्ट में ऐक्स मारसिली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जीन माइकल क्लावेरी ने बताया कि 48,500 साल पुराना वायरस खोजना अपने आप में एक विश्व रिकॉर्ड है। प्रकाशित स्टडी में कहा गया है कि अभी इन वायरस पर और अधिक खोज किया जाना बाकी है। 
 

क्या मानव प्रजाति को भी है खतरा?

क्लाइमेट चेंज की चिंता किसी से छुपी नहीं है। धरती का तापमान लगातार बढ़ रहा है और ध्रुवों की बर्फ भी धीरे धीरे पिघल रही है। धरती के गर्भ में क्या छिपा है इसका अंदाजा अभी तक वैज्ञानिक भी नहीं लगा पाए हैं। ऐसे में बढ़ती गर्मी बर्फ में से और कौन से वायरस निकालेगी ये भी कोई नहीं जानता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ता तापमान जमे हुए जीवाणुओं को जिंदा कर खतरा पैदा कर सकता है। इनमें कई ऐसे वायरस हो सकते हैं जो काफी संक्रामक हो सकते हैं।

जब भी कोई नया वायरस सामने आता है तो उसके संक्रमण को रोकने के लिए नई एंटीवायरल दवाईयां बनानी पड़ती हैं और वैक्सीन इजाद करनी पड़ती है। इसका उदाहरण दुनिया कोविड महामारी में देख चुकी है। वायरस भले ही किसी एक फैमिली से ही संबंध रखता हो, लेकिन उसका इलाज अलग तरीके से करना पड़ता है, ऐसा वैज्ञानिक कह रहे हैं। ऐसे में 48,500 साल पुराने इस वायरस का खोजा जाना जहां नया खतरा मोल लेने जैसा है, वहीं दूसरी ओर यह खोज हमें भविष्य के लिए भी तैयार करेगी, जब बढ़ते तापमान के कारण नए वायरस उभरने का खतरा बढ़ने लगेगा। बहरहाल वैज्ञानिक इन नए वायरसों पर शोध करके इनके संक्रमण और इलाज के बारे में समझने की कोशिश कर रहे हैं। स्टडी को हाल ही में bioRxiv में प्रकाशित किया गया था। 
Comments

लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।

हेमन्त कुमार

हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर सब-एडिटर हैं और विभिन्न प्रकार के ...और भी

Share on Facebook Gadgets360 Twitter ShareTweet Share Snapchat Reddit आपकी राय google-newsGoogle News

विज्ञापन

Follow Us

विज्ञापन

#ताज़ा ख़बरें
  1. Realme भारत में लॉन्च करने वाला है P4 Lite 5G, 'बजट' फोन के टीजर में दिखाई दिया डिजाइन
  2. इन रोमांचक PlayStation गेम्स को फ्री में खेलने का मौका, मार्च महीने की पूरी लिस्ट हुई लीक
  3. क्रिप्टो स्कैम में हैदराबाद के कंसल्टेंट के साथ 3.5 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी
  4. Poco X8 Pro Max में होगी 9,000mAh की दमदार बैटरी, अगले सप्ताह होगा लॉन्च
  5. LPG सिलेंडर की किल्लत, स्मार्ट कूकर बनेंगे मदद, ऑनलाइन भारी डिस्काउंट पर खरीदें
  6. UPI यूजर्स के लिए नया खतरा, ‘Digital Lutera’ से अकाउंट हाईजैक का दावा
  7. Samsung Galaxy S26 सीरीज की भारत में शुरू हुई बिक्री, जानें प्राइस, फीचर्स
  8. 7200mAh बैटरी, 50MP कैमरा के साथ Vivo Y51 Pro 5G लॉन्च, जानें कीमत और फीचर्स
  9. आसानी से भेजें सीक्रेट ईमेल, सिर्फ पासकोड से खुलेगा और अपने आप हो जाएगा डिलीट, जानें कैसे
  10. Xiaomi 17 Ultra भारत में Snapdragon 8 Elite Gen 5 और 200MP कैमरा के साथ लॉन्च, जानें कीमत और फीचर्स
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.
ट्रेंडिंग प्रॉडक्ट्स »
लेटेस्ट टेक ख़बरें »