मंगल की सतह पर 8.8 किलोमीटर नीचे छुपे हैं 'एलियन लाइफ' के निशान!

मंगल पर उत्तरी गोलार्ध पर Acidalia Planitia नामक एक मैदान है जो 3 हजार किलोमीटर चौड़ा है।

मंगल की सतह पर 8.8 किलोमीटर नीचे छुपे हैं 'एलियन लाइफ' के निशान!

वैज्ञानिकों ने मंगल पर जीवन के बारे में नया शोध किया है।

ख़ास बातें
  • मंगल पर उत्तरी गोलार्ध पर Acidalia Planitia नामक मैदान
  • 3 हजार किलोमीटर चौड़ा है मैदान
  • यहां पर मिथेनोजंस के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां हो सकती हैं
विज्ञापन
मंगल पर जीवन की तलाश अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के लिए महत्वाकांक्षी मिशन है। नासा समेत दुनियाभर की स्पेस एजेंसी लाल ग्रह पर जीवन के सबूत तलाशने में जुटी हैं। लेकिन सवाल है कि कभी तपता और गीला रहा ये ग्रह अब भी जीवन के लिए अनुकूल बन सकता है? या इस पर अभी भी कहीं जीवन के निशान मिल सकते हैं? वैज्ञानिकों की एक टीम ने इस बारे में एक नई स्टडी पेश की है जो कहती है मंगल के एक खास हिस्से पर सूक्ष्मों जीवों की प्रजाति कभी रही होगी। 

एंड्रिया बूटूरिनी के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने शोध पेश किया है। शोध कहता है कि मंगल के मैदान Acidalia Planitia में कभी सूक्ष्म जीव पनपे होंगे। ये मिथेनोजंस रहे होंगे जो इसकी सतह के नीचे मौजूद थे। New Scientist की रिपोर्ट में इसके बारे में लिखा गया है। दरअसल इस टीम ने मंगल पर हुए विभिन्न मिशनों के तहत मिले डेटा का विश्लेषण किया और पाया कि मंगल पर एक सब-सरफेस जोन यानी सतह के नीचे की दुनिया भी मौजूद है। यह 4.3 किलोमीटर से लेकर 8.8 किलोमीटर गहराई तक मौजूद बताया गया है। 

इस परत के बारे में कहा गया है कि यहां पर माइक्रोब यानी सूक्ष्म जीवाणुओं की गतिविधियों के लिए संगत वातावरण रहा होगा। यह परत बाहरी वातावरण की कठिन परिस्थितियों से बची हुई है। यहां पर पुराने समय में मौजूद पानी और जियोथर्मल हीट के निशान भी छुपे हो सकते हैं। ये दोनों ही चीजें जीवन के अहम तत्वों के रूप में जानी जाती हैं। हालांकि मंगल पर इस तरह के जीवाणुओं की खोज कर पाना बहुत दूर की बात लगती है, लेकिन इस शोध ने एक उम्मीद तो जगा दी है। 

मंगल पर कई ऑर्बिटर और रोवर जा चुके हैं। शोधकर्ताओं ने इनसे डेटा इकट्ठा किया। वैज्ञानिकों ने पाया कि मंगल पर उत्तरी गोलार्ध पर Acidalia Planitia नामक एक मैदान है जो 3 हजार किलोमीटर चौड़ा है। इसके बारे में शोध कहता है कि यहां पर मिथेनोजंस के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां हो सकती हैं। मिथेनोजंस ऐसे बैक्टीरिया होते हैं जो मिथेन बनाते हैं। लेकिन इनके बारे में गहराई से स्टडी करने के लिए वैज्ञानिकों को इसकी सतह के नीचे मीलों की खुदाई करनी होगी जिसके लिए बेहद एडवांस्ड मिशन मंगल पर भेजने होंगे। वर्तमान में इस तरह की टेक्नोलॉजी उपलब्ध नहीं है। 
 
Comments

लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।

हेमन्त कुमार

हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर सब-एडिटर हैं और विभिन्न प्रकार के ...और भी

संबंधित ख़बरें

Share on Facebook Gadgets360 Twitter ShareTweet Share Snapchat Reddit आपकी राय google-newsGoogle News

विज्ञापन

Follow Us

विज्ञापन

#ताज़ा ख़बरें
  1. 200MP कैमरा और 7800mAh बैटरी वाली Vivo X500 Series की प्री-बुकिंग शुरू, 25 नवंबर को लॉन्च!
  2. Samsung Galaxy A38 में मिल सकती है 6,000mAh की बैटरी, 50 मेगापिक्सल प्राइमरी कैमरा
  3. फ्री में देखें बॉलीवुड फिल्में और म्यूजिक, LG Channels में 170 से ज्यादा चैनल पर मिलेगा एंटरटेनमेंट!
  4. Vivo X500 FE में मिल सकती है 6,500mAh बैटरी, IMDA डेटाबेस पर हुई लिस्टिंग
  5. Apple की iPhone 18 के लॉन्च की तैयारी, 6.3 इंच हो सकता है डिस्प्ले
  6. Delhi Air Pollution: Air Purifier खरीदने का प्लान? ऐसे चुनें अपने घर के लिए सही डिवाइस
  7. Oppo Find X10 Ultra में मिल सकता है MediaTek Dimensity 9600 Pro चिपसेट
  8. Karbonn Rebel, Rebel Pro की सेल शुरू, मिल रहा दिवाली सेल में डिस्काउंट भी, जानें कितनी होगी बचत
  9. Samsung Galaxy S25 FE पर ₹20 हजार तक की बचत, Big Billion Days Sale से भी कम हुई कीमत
  10. Excitel दिवाली धमाका ऑफर: 3 महीने तक फ्री मिल रहा 200Mpbs की स्पीड वाला इंटरनेट
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.
ट्रेंडिंग प्रॉडक्ट्स »
लेटेस्ट टेक ख़बरें »