क्लाइमेट चेंज धीमी कर रहा है पृथ्वी की गति! हो सकता है बड़ा खतरा

इससे सैटेलाइट नेविगेशन, स्पेस मिशन और ग्लोबल टाइमकीपिंग सिस्टम के लिए चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

क्लाइमेट चेंज धीमी कर रहा है पृथ्वी की गति! हो सकता है बड़ा खतरा

Photo Credit: vecteezy

क्लाइमेट चेंज न सिर्फ पृथ्वी की मौसमी गतिविधियों को बदल रहा है, बल्कि यह एक नए खतरे को जन्म दे रहा है

ख़ास बातें
  • पिघलते ग्लेशियर और बर्फ परतों के कारण पृथ्वी की रोटेशन धीमी हो रही है।
  • इससे पृथ्वी पर दिन की लम्बाई कुछ बढ़ रही है।
  • पृथ्वी का दिन अभी हर सदी में लगभग 1.33 मिलीसेकंड की दर से लंबा हो रहा।
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क्लाइमेट चेंज न सिर्फ पृथ्वी की मौसमी गतिविधियों को बदल रहा है, बल्कि यह एक नए खतरे को जन्म दे रहा है जो मनुष्य की सोच से भी बड़ा हो सकता है। एक नई स्टडी कहती है कि क्लाइमेट चेंज की वजह से पृथ्वी की घूमने की गति पर भी प्रभाव पड़ रहा है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि क्लाइमेट चेंज के कारण ग्लेशियरों पर जो प्रभाव पड़ रहा है उससे पृथ्वी की घूर्णन गति धीमी हो रही है जो कि पृथ्वी के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। 

जलवायु परिवर्तन, या क्लाइमेट चेंज पृथ्वी पर अनुमान से कहीं ज्यादा बड़ा प्रभाव डाल रहा है। इससे न सिर्फ मौसमों का पैटर्न बदल रहा है, बल्कि यह पृथ्वी की घूमने की गति को धीमी कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों ने स्टडी के आधार पर खुलासा किया है कि पघलते ग्लेशियर और बर्फ परतों के कारण पृथ्वी की रोटेशन धीमी हो रही है। इससे पृथ्वी पर दिन की लम्बाई कुछ बढ़ रही है। 

वियना यूनिवर्सिटी और ETH ज़्यूरिक के शोधकर्ताओं की एक स्टडी के अनुसार, पृथ्वी का दिन अभी हर सदी में लगभग 1.33 मिलीसेकंड की दर से लंबा हो रहा है। यह बदलाव मुख्य रूप से समुद्र स्तर के बढ़ने से जुड़ा है जो कि ग्लेशियरों के पिघलने से लगातार ऊपर जा रहा है। जैसे जैसे बर्फ पिघलती है, पानी ध्रुवों की ओर से महासागरों में जाता है। इससे पृथ्वी के चारों और द्रव्यमान का पुनर्वितरण हो रहा है। द्रव्यमान के इस बदलाव के कारण पृथ्वी की घूमने की गति धीमी हो रही है। जिसके परिणामस्वरूप दिन की लंबाई बढ़ रही है। 

हालांकि यह बदलाव बहुत छोटा है, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे सैटेलाइट नेविगेशन, स्पेस मिशन और ग्लोबल टाइमकीपिंग सिस्टम के लिए चुनौतियां पैदा हो सकती हैं, क्योंकि ये सभी पृथ्वी के घूमने के बारे में सटीक जानकारी पर निर्भर करते हैं। स्टडी को Journal of Geophysical Research: Solid Earth में प्रकाशित किया गया है। इसमें पाया गया है कि पिछले 36 लाख वर्षों में किसी भी समय दिन की लंबाई में जलवायु के कारण उतनी तेज़ी से बढ़ोतरी नहीं हुई, जितनी 2000 और 2020 के बीच दर्ज की गई।

शोधकर्ताओं ने कहा है कि पृथ्वी के घूमने की गति पर असर डालने वाला मुख्य और लंबे समय तक बना रहने वाला कारक चंद्रमा ही है। समय के साथ यह धीरे-धीरे ग्रह के घूमने की गति को धीमा करता है और दिनों की अवधि को बढ़ाता है। हालाँकि, स्टडी से पता चलता है कि कुछ स्थितियों में इस सदी के अंत तक जलवायु परिवर्तन का असर चंद्रमा के प्रभाव से भी ज़्यादा हो सकता है।
 

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हेमन्त कुमार

हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर सब-एडिटर हैं और विभिन्न प्रकार के ...और भी

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