वैज्ञानिकों का मानना है कि धरती के अपनी धुरी पर घूमने की रफ्तार पर ग्लेशियर्स का पिघलना भी असर डाल सकता है। धरती पर अल नीनो और ला नीना जैसी मौसम से जुड़ी स्थितियां भी एक कारण हो सकती हैं। इनसे धरती पर भार का वितरण बदलता है जिससे इसके घूमने की गति पर असर हो सकता है। इसके लिए चंद्रमा भी जिम्मेदार हो सकता है।
एक भारतीय खगोलशास्त्री दोर्जे अंगचुक (Dorje Angchuk) ने बेहतरीन टाइम-लैप्स वीडियो बनाया है। इसे लद्दाख में शूट किया गया है। वीडियो में वहां की एक साइंस लेबोरेटरी के सामने पृथ्वी को घूमते हुए दिखाया गया है। वीडियो अपने आप में यूनीक है और हमारे ग्रह की गति को लेकर अनूठा दृश्य पेश करता है। दोर्जे अंगचुक लद्दाख के हानले में स्थित ऑब्जर्वेट्री के इंजीनियर इन-चार्ज हैं।
स्टडी में कहा गया है कि पृथ्वी का इनर-कोर रोटेशन रुका हुआ है। साल 2009 में इसमें एक हॉल्ट देखा गया और फिर यह आश्चर्यजनक रूप से विपरीत दिशा में मुड़ गया।
वैज्ञानिकों ने पाया कि भातरी कोर धरती की घूमने की गति से अलग होकर इसके एक दहाई डिग्री प्रति वर्ष की स्पीड पर घूम रहा है, यह फिक्स्ड नहीं है। यह गतिमान है, हमारे पैरों के नीचे यह चलता है। हर 6 साल में यह कुछ किलोमीटर आगे पीछे डोल जाता है।