चीन के 14 वर्षीय छात्र Jia Mingxuan ने ऐसी सिंचाई तकनीक डेवलप की है, जो हवा में मौजूद नमी को पानी की बूंदों में बदलकर पेड़ों की जड़ों तक पहुंचाती है। जानिए यह टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है और इसे क्यों खास माना जा रहा है।
Photo Credit: XINHUA
चीन के 14 वर्षीय छात्र जिया मिंगशुआन (Jia Mingxuan) ने कुछ समय पहले एक ऐसी सिंचाई तकनीक डेवलप की थी, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा। इस प्रोजेक्ट को जर्मनी में आयोजित International Trade Fair "Ideas, Inventions and New Products (iENA)" में गोल्ड मेडल भी मिला। यह तकनीक खासतौर पर सूखे और रेगिस्तानी इलाकों में नए लगाए गए पेड़ों को जिंदा रखने के लिए डिजाइन की गई है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें किसी पाइपलाइन, पंप या बाहरी पानी की जरूरत नहीं पड़ती। सिस्टम हवा में मौजूद नमी का इस्तेमाल करके पौधों तक पानी पहुंचाने की कोशिश करता है।
यह सिस्टम किसी जादुई तरीके से पानी नहीं बनाता, बल्कि हवा में मौजूद जलवाष्प (Water Vapour) को संघनित (Condense) करके उसे पानी की बूंदों में बदलता है। इसका सिद्धांत बिल्कुल वैसा ही है, जैसा ठंडी बोतल के बाहर या खाना बनाते समय बर्तन के ढक्कन पर पानी की बूंदें बनने पर होता है।
Stdaily के मुताबिक, सिस्टम में एक खोखला स्टील पाइप जमीन में सीधा गाड़ा जाता है। पाइप का ऊपरी हिस्सा जमीन के बाहर रहता है, जबकि बाकी हिस्सा मिट्टी के अंदर होता है। ऊपर लगे स्पेशल विंड कैप या एयर इनलेट के जरिए हवा पाइप के अंदर आती है।
जब बाहरी गर्म हवा पाइप के अंदर नीचे की ओर जाती है, तो जमीन के अंदर अपेक्षाकृत कम तापमान के कारण पाइप की सतह ठंडी रहती है। इसी तापमान के अंतर से हवा में मौजूद नमी संघनित होकर छोटी-छोटी पानी की बूंदों में बदल जाती है। ये बूंदें पाइप के अंदर से नीचे बहती हुई सीधे पेड़ की जड़ों तक पहुंचती हैं, जिससे पौधे को लगातार थोड़ी-थोड़ी नमी मिलती रहती है।
इस सिस्टम की एक और खास बात यह है कि इसे चलाने के लिए किसी पंप, मोटर या बाहरी जल स्रोत की जरूरत नहीं होती। हवा का प्राकृतिक फ्लो और जमीन के ऊपर-नीचे के तापमान का अंतर ही इसकी पूरी फंक्शनैलिटी का आधार है। यही वजह है कि इसे ऐसे इलाकों के लिए उपयोगी माना जा रहा है, जहां पानी और बिजली दोनों की कमी होती है।
इस तकनीक को लेकर कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इससे "रेगिस्तान में पानी बनाया जा सकता है"। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऐसा कहना पूरी तरह सही नहीं होगा। यह सिस्टम बड़े खेतों की सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी तैयार करने का दावा नहीं करता। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से नए लगाए गए पौधों और पेड़ों की जड़ों तक इतनी नमी पहुंचाना है कि वे सूखे वातावरण में भी जीवित रह सकें।
ChinaDaily के मुताबिक, जिया मिंगशुआन को यह आइडिया घर में खाना बनाते समय मिला। उन्होंने देखा कि गर्म भाप ठंडे ढक्कन से टकराकर पानी की बूंदों में बदल जाती है। इसी सिद्धांत को उन्होंने प्राकृतिक वातावरण में लागू करने की कोशिश की। इसके बाद उन्होंने कई प्रोटोटाइप तैयार किए और अलग-अलग परिस्थितियों में उनका टेस्ट किया।
हालांकि इस प्रोजेक्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है, लेकिन अभी तक इसकी कोई पीयर-रिव्यूड वैज्ञानिक रिसर्च या विस्तृत तकनीकी डेटा सार्वजनिक नहीं किया गया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह सिस्टम प्रतिदिन कितनी मात्रा में पानी इकट्ठा कर सकता है, किन आर्द्रता (Humidity) और तापमान की परिस्थितियों में सबसे बेहतर काम करता है या बड़े पैमाने पर इसका व्यावसायिक इस्तेमाल कितना प्रैक्टिकल होगा। ऐसे में इसे फिलहाल एक उम्मीद जगाने वाला प्रोटोटाइप माना जा रहा है, जो भविष्य में जल संकट वाले इलाकों के लिए उपयोगी समाधान साबित हो सकता है।
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