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ऑस्ट्रेलियाई सुपर कंप्यूटर ने कैद की 15 हजार प्रकाशवर्ष दूर स्थित सुपरनोवा रैमनेंट की फोटो

ताजा इमेज में जो एमिशन दिखाया गया है वह अत्य़धिक ऊर्जावान इलेक्ट्रॉन्स के कम्प्रेस्ड मेग्नेटिक फील्ड में फंस जाने के कारण बना है।

ऑस्ट्रेलियाई सुपर कंप्यूटर ने कैद की 15 हजार प्रकाशवर्ष दूर स्थित सुपरनोवा रैमनेंट की फोटो

नए सुपरकम्प्यूटर द्वारा सुपरनोवा रैमनेंट की यह इमेज तैयार की गई है।

ख़ास बातें
  • सुपरनोवा रैमनेंट्स मरते हुए तारों के विस्फोट के अवशेषों से बनते हैं
  • इनका मलबा तारामंडल में सुपरसोनिक स्पीड से बिखरता है
  • य़ह रास्ते में आने वाली गैसों या अन्य चीजों को अपने साथ समेटता जाता है
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ऑस्ट्रेलिया में एक नए सुपर कंप्यूटर द्वारा एक सुपरनोवा रैमनेंट (remnant) या अवशेष की एक इमेज तैयार की गई है। सुपरनोवा रैमनेंट या सुपरनोवा अवशेष उन पदार्थों को कहा जाता है जो मरते हुए तारों में होने वाले विस्फोट के बाद शेष रह जाते हैं। आस्ट्रेलिया में एक नए सुपरकम्प्यूटर की मदद से रेडियो टेलीस्कोप ऑब्जर्वेशंस को मिलाकर सुपरनोव रैमनेंट की एक डिटेल्ड इमेज तैयार की गई है। पावसे सुपर कम्प्यूटिंग रिसर्च सेंटर में मौजूद Setonix ने ऑस्ट्रेलियन स्क्येअर किलोमीटर एर्रे (ASKAP) रेडियो टेलीस्कोप के डेटा का मिलाकर इस इमेज को तैयार किया है। पर्थ में कॉमेनवेल्थ साइंटिफिक इंडस्ट्रियल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन में मौजूद ASKAP रेडियो टेलीस्कोप में 36 डिश लगे हुए हैं। ये सभी डिश एक साथ मिलकर एक टेलीस्कोप की तरह काम करते हैं। 

इन सभी डिश द्वारा जो डेटा कलेक्ट किया जाता है उसे हाई स्पीड ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से पावसे सेंटर पर ट्रांसफर किया जाता है, जहां यह प्रोसेस होता है और इमेज तैयार की जाती है। 

CSIRO के वसीम राजा और पास्कल जहां इलाही ने एक आर्टिकल में लिखा है कि सुपरनोवा रैमनेंट, जिसे G261.9+5.5 कहा गया है, की नई इमेज Setonix द्वारा 24 घंटे से भी कम समय में तैयार की गई है। Setonix का पहला फेज जुलाई में लाइव हो गया था। G261.9+5.5 धरती से 10 हजार से 15 हजार प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। इसे खगोल वैज्ञानिक Eric R. Hill द्वारा 1967 में एक सुपरनोवा रैमनेंट की तरह क्लासिफाई किया गया था। उस वक्त उन्होंने एजेंसी का पार्कीज रेडियो टेलीस्कोप मुर्रियांग इस्तेमाल किया था। 

जैसा कि पहले बताया गया है, सुपरनोवा रैमनेंट्स मरते हुए तारों के विस्फोट के अवशेषों से बनते हैं। विस्फोट होने के बाद इनका मलबा तारामंडल में सुपरसोनिक स्पीड से बिखरता है और रास्ते में आने वाली गैसों या अन्य चीजों को अपने साथ समेटता जाता है और उन्हें बहुत ज्यादा गर्म करके कम्प्रेस कर देता है। विस्फोट से जो शॉकवेव निकलती है वह तारामंडल की मेग्नेटिक फील्ड को भी कम्प्रेस कर देती है। 

ताजा इमेज में जो एमिशन दिखाया गया है वह अत्य़धिक ऊर्जावान इलेक्ट्रॉन्स के कम्प्रेस्ड मेग्नेटिक फील्ड में फंस जाने के कारण बना है। ASKAP की मदद से जो इमेज तैयार की गई है वह इस रैमनेंट के बारे में स्टडी करने की दिशा में नया मोड़ ला सकती है और साथ ही तारामंडलीय माध्यम के भौतिक गुणों को डिटेल में समझने के लिए काम आ सकती है, जैसा अब तक पहले कभी नहीं हुआ है। अभी तक Setonix की इंस्टॉलेशन की पहली स्टेज ही पूरी हुई है। इसकी सेकंड स्टेज साल के अंत तक पूरी हो जाएगी। उसके बाद वैज्ञानिक रेडियो आकाश में छुपी और भी चीजों तक पहुंचने में कामयाब हो जाएंगे। 
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