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भारत ने पिछले वर्ष जोड़ी रिकॉर्ड 10 गीगावॉट की सोलर कैपेसिटी

पिछले वर्ष के दौरान पावर इंस्टॉलेशंस में बड़े स्तर के सोलर प्रोजेक्ट्स का योगदान 83 प्रतिशत था, जो वर्ष-दर-वर्ष आधार पर लगभग 230 प्रतिशत की बढ़ोतरी है

भारत ने पिछले वर्ष जोड़ी रिकॉर्ड 10 गीगावॉट की सोलर कैपेसिटी

नई पावर कैपेसिटी में सोलर की हिस्सेदारी 62 प्रतिशत की रही

ख़ास बातें
  • पावर इंस्टॉलेशंस में बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स का योगदान 83 प्रतिशत रहा
  • राजस्थान 4.5 GW की सोलर कैपेसिटी इंस्टॉलेशन के साथ सबसे आगे रहा
  • इस वर्ष सोलर पावर के लिए डिमांड मजबूत रहने का अनुमान है
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देश में पिछले वर्ष 10 गीगावॉट (GW) की रिकॉर्ड सोलर कैपेसिटी इंस्टॉल जोड़ी गई है। यह वर्ष-दर-वर्ष आधार पर लगभग 212 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। इससे पिछले वर्ष देश ने लगभग 3.2 GW की सोलर कैपेसिटी इंस्टॉल की थी। पिछले वर्ष के अंत में देश में सोलर पावर की कुल इंस्टॉल्ड कैपेसिटी लगभग 49 GW थी। 

Mercom India Research ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि पिछले वर्ष देश में अभी तक की सबसे अधिक सोलर कैपेसिटी जोड़ी गई है। नई पावर कैपेसिटी में सोलर की हिस्सेदारी 62 प्रतिशत की रही। पिछले वर्ष के दौरान पावर इंस्टॉलेशंस में बड़े स्तर के सोलर प्रोजेक्ट्स का योगदान 83 प्रतिशत था, जो वर्ष-दर-वर्ष आधार पर लगभग 230 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। रूफटॉप इंस्टॉलेशंस में 138 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। राजस्थान, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश बड़े स्तर के सोलर प्रोजेक्ट्स की कैपेसिटी के लिहाज से प्रमुख राज्य थे। इनका सोलर कैपेसिटी इंस्टॉलेशन में लगभग 50 प्रतिशत योगदान रहा। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले वर्ष राजस्थान 4.5 GW की सोलर कैपेसिटी इंस्टॉलेशन के साथ सबसे आगे रहा। 

इस वर्ष सोलर पावर के लिए डिमांड मजबूत रहने का अनुमान है। हालांकि, इंडस्ट्री के सामने कुछ चुनौतियां भी आ सकती हैं। इनमें बेसिक कस्टम्स ड्यूटी, इम्पोर्ट पर बंदिशें और टैक्स शामिल है। इसके अलावा सप्लाई चेन से जुड़ी मुश्किलें भी बरकरार रह सकती हैं। इंडस्ट्री को कमोडिटी की कीमतें महंगी होने की समस्या से भी जूझना होगा। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वर्ष सोलर प्रोजेक्ट्स की एवरेज कॉस्ट अधिक रही। रॉ मैटीरियल और फ्रेट के प्राइसेज बढ़ने से कॉस्ट पर असर पड़ा है। पिछले वर्ष सोलर प्रोजेक्ट्स के टेंडर्स में 4.3 प्रतिशत और ऑक्शंस में 2.6 प्रतिशत की कमी आई। पावर सेल एग्रीमेंट्स (PSA) साइन करने में देरी और इन प्रोजेक्ट्स पर लगने वाले चार्जेज स्पष्ट नहीं होने जैसे कारणों से टेंडर्स और ऑक्शंस में गिरावट हुई है। केंद्र सरकार ने रिन्यूएबल एनर्जी की कैपेसिटी बढ़ाने के लिए उपाय किए हैं। इससे सोलर प्रोजेक्ट्स के बढ़ने की संभावना है। हालांकि, इन प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण इक्विपमेंट्स का इम्पोर्टेड होना एक बड़ी रुकावट हो सकती है। इन इक्विपमेंट्स का अधिकतर इम्पोर्ट चीन से होता है। इन इक्विपमेंट्स पर इमपोर्ट ड्यूटी होने की वजह से इनका प्राइस अधिक रहता है जिससे प्रोजेक्ट की कॉस्ट में बढ़ोतरी होती है। 


(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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ये भी पढ़े: Solar, Capacity, Demand, Government, Cost, Projects, Import
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