भारत सरकार स्मार्टफोन सिक्योरिटी को लेकर नए नियमों पर काम कर रही है, जिसमें Apple और Samsung से सोर्स कोड शेयर करने की मांग शामिल है। कंपनियों ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है।
Photo Credit: Unsplash/ Andrey Matveev
भारत सरकार के नए मोबाइल सिक्योरिटी नियमों पर Apple और Samsung की चिंता
भारत सरकार स्मार्टफोन सिक्योरिटी को लेकर एक बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। नए प्रस्तावित नियमों के तहत Samsung, Apple समेत सभी स्मार्टफोन कंपनियों से न सिर्फ सॉफ्टवेयर में बदलाव की मांग की जा सकती है, बल्कि पहली बार सोर्स कोड तक सरकार की पहुंच भी मांगी जा रही है। यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है, जब भारत में ऑनलाइन फ्रॉड और डेटा लीक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन मार्केट बन चुका है। हालांकि इस प्लान को लेकर टेक इंडस्ट्री के बड़े नाम पर्दे के पीछे कथित तौर पर कड़ा विरोध जता रहे हैं और इसे ग्लोबल प्रैक्टिस से अलग बता रहे हैं। चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
Reuters की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट बताती है कि भारत सरकार द्वारा तैयार किए गए इस प्रस्ताव में कुल 83 नए सिक्योरिटी स्टैंडर्ड्स शामिल हैं। इनका मकसद यूजर्स के डेटा को सुरक्षित रखना और फोन के जरिए होने वाले साइबर अपराधों पर लगाम लगाना बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इन नियमों को कानूनी रूप से लागू करने पर विचार कर रही है, जिस पर फिलहाल कंपनियों से बातचीत चल रही है।
इन प्रस्तावों में सबसे संवेदनशील मांग है सोर्स कोड का एक्सेस है। जिन्हें नहीं पता, सोर्स कोड वही बेसिक प्रोग्रामिंग कोड होते हैं, जिनसे स्मार्टफोन का पूरा सिस्टम चलता है। सरकार चाहती है कि कंपनियां अपना सोर्स कोड भारत में तय लैब्स में जांच के लिए उपलब्ध कराएं, ताकि किसी भी संभावित कमजोरी का पता लगाया जा सके। हालांकि, इंडस्ट्री का कहना है कि यह मांग प्रोप्राइटरी टेक्नोलॉजी को खतरे में डाल सकती है।
Apple और Samsung जैसे दिग्गज स्मार्टफोन मेकर्स ने इस पैकेज पर आपत्ति जताई है। रिपोर्ट बताती है कि इंडस्ट्री मीटिंग्स में कंपनियों ने कहा कि दुनिया के किसी भी बड़े बाजार में इस तरह की शर्तें अनिवार्य नहीं हैं। आईटी मंत्रालय के एक डॉक्यूमेंट में कंपनियों की तरफ से कहा गया है कि "दुनिया के किसी भी बड़े देश में इस तरह के सिक्योरिटी नियम अनिवार्य नहीं किए गए हैं।"
आईटी सेक्रेटरी एस. कृष्णन ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा, (अनुवादित) "इंडस्ट्री की किसी भी जायज चिंता को खुले दिमाग से सुना जाएगा। अभी इस पर ज्यादा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।" सरकार का तर्क है कि भारत में करीब 75 करोड़ स्मार्टफोन यूजर्स हैं और डेटा सिक्योरिटी को लेकर सख्त कदम उठाना जरूरी हो गया है।
सरकार के प्रस्तावों में सिर्फ सोर्स कोड ही नहीं, बल्कि कई और बदलाव शामिल हैं। इनमें प्री-इंस्टॉल ऐप्स को अनइंस्टॉल करने का ऑप्शन, बैकग्राउंड में कैमरा और माइक्रोफोन एक्सेस को ब्लॉक करने की सुविधा और नियमित मैलवेयर स्कैनिंग शामिल है। इसके अलावा, कंपनियों को बड़े सॉफ्टवेयर अपडेट और सिक्योरिटी पैच से पहले सरकार को सूचना देनी होगी।
मोबाइल एंड एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MAIT) ने सरकार को दिए एक गोपनीय जवाब में कहा है कि नियमित मैलवेयर स्कैनिंग से फोन की बैटरी तेजी से खत्म हो सकती है। वहीं, हर सॉफ्टवेयर अपडेट के लिए सरकारी मंजूरी लेना व्यवहारिक नहीं है, क्योंकि कई अपडेट तुरंत जारी करने पड़ते हैं। MAIT ने कहा, "एक साल तक फोन के लॉग्स स्टोर करने के लिए डिवाइस में पर्याप्त जगह ही नहीं होती।"
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