Google Threat Intelligence Group ने IPIDEA नाम के एक बड़े रेजिडेंशियल प्रॉक्सी नेटवर्क को बाधित करने की जानकारी दी है। Google के मुताबिक, यह नेटवर्क Android स्मार्टफोन और Windows PC समेत लाखों डिवाइसेज़ को बिना यूजर की जानकारी साइबर अटैक्स में इस्तेमाल कर रहा था। रेजिडेंशियल इंटरनेट कनेक्शन के जरिए ट्रैफिक रूट कर हमलावर अपनी पहचान छुपा पा रहे थे। Google ने इस नेटवर्क से जुड़े डोमेन्स बंद कराए और प्रभावित ऐप्स को ब्लॉक करने के लिए Play Protect में बदलाव किए हैं।
भारत सरकार ने स्मार्टफोन कंपनियों से सोर्स कोड एक्सेस लेने की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। PIB Fact Check ने सोशल मीडिया पर साफ किया कि सरकार ने Apple, Samsung या Xiaomi जैसी कंपनियों को सोर्स कोड साझा करने के लिए मजबूर करने का कोई प्रस्ताव नहीं रखा है। यह सफाई Reuters की एक रिपोर्ट के बाद आई, जिसमें नए मोबाइल सिक्योरिटी नियमों के तहत सोर्स कोड एक्सेस की बात कही गई थी। सरकार के मुताबिक, फिलहाल मोबाइल सिक्योरिटी को लेकर सिर्फ इंडस्ट्री के साथ स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन चल रहा है और कोई अंतिम नियम तय नहीं किए गए हैं।
भारत सरकार स्मार्टफोन सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए नए नियमों पर विचार कर रही है, जिसके तहत Apple और Samsung जैसी कंपनियों से मोबाइल सॉफ्टवेयर का सोर्स कोड एक्सेस मांगा जा सकता है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार करीब 83 नए सिक्योरिटी स्टैंडर्ड लागू करने की तैयारी में है। इनमें बड़े सॉफ्टवेयर अपडेट की जानकारी पहले देने और कुछ सिस्टम लेवल बदलाव भी शामिल हैं। टेक कंपनियों का कहना है कि ऐसा करने से उनकी प्रॉप्रायटरी टेक्नोलॉजी और यूजर प्राइवेसी को खतरा हो सकता है। फिलहाल इस प्रस्ताव पर सरकार और कंपनियों के बीच बातचीत जारी है।
अगर आपके पास कोई पुराना स्मार्टफोन बेकार पड़ा है, तो उसे आप सिक्योरिटी कैमरा की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। सही ऐप्स और बेसिक सेटअप की मदद से Android या iPhone दोनों को निगरानी के लिए बदला जा सकता है। इस तरीके में लाइव वीडियो फीड, मोशन डिटेक्शन और अलर्ट जैसे फीचर्स मिलते हैं, जिससे घर या ऑफिस की सिक्योरिटी बढ़ाई जा सकती है। इंटरनेट कनेक्शन और चार्जिंग की व्यवस्था के साथ यह तरीका काफी किफायती साबित होता है। महंगे CCTV सिस्टम की बजाय पुराने फोन को सिक्योरिटी टूल बनाना एक स्मार्ट ऑप्शन है।
स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरर्स को इन बदलावों को लागू करने के लिए 90 दिनों की समयसीमा दी गई है। इस ऑर्डर के तहत, नया मोबाइल डिवाइस (Android या iPhone) को खरीदने पर सरकार का संचार साथी ऐप पहले से उसमें इंटीग्रेटेड होगा। DoT के ऑर्डर में यह भी कहा गया है कि यूजर्स को डिवाइसेज के पहली बार सेटअप करने के दौरान यह ऐप तुरंत दिखना चाहिए।
इससे यह पक्का किया जा सकेगा कि जो व्यक्ति किसी कम्युनिकेशन ऐप पर वेब सेशन का इस्तेमाल कर रहा है वह उस एकाउंट से जुड़े SIM का वास्तविक एक्सेस रखता है। इससे दूरदराज के इलाकों से आपराधिक गतिविधियों को चलाने वाले स्कैमर्स पर नियंत्रण किया जा सकेगा। इस प्रकार का एक सिक्योरिटी फीचर Google Pay और PhonePe जैसे पेमेंट सर्विसेज से जुड़े ऐप्स में पहले से एक स्टैंडर्ड के तौर पर मौजूद है।
जाली दस्तावेजों, फ्रॉड के जरिए SIM कार्ड खरीदने वाले भी मुश्किल में फंस सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति के नाम पर जारी SIM कार्ड को गैर कानूनी गतिविधियों में शामिल किसी अपराधी को दिया जाता है जो जिसके नाम पर वह SIM कार्ड जारी किया गया है, वह व्यक्ति भी दोषी माना जा सकता है। DoT ने मोबाइल सब्सक्राइबर्स को कॉलिंग लाइन आइडेंटिटी में बदलाव करने वाले मोबाइल एप्लिकेशंस का इस्तेमाल नहीं करने की भी सलाह दी है।
I4C ने बताया है कि इसमें स्कैमर्स पहले अपने शिकार को कॉल करते हैं और फिर उनके फोन पर eSIM के एक्टिवेशन का लिंक भेजा जाता है। इस लिंक को क्लिक करने पर पीड़ित के फिजिकल SIM को eSIM में बदलने की रिक्वेस्ट को ऑटोमैटिक तरीके से स्वीकार कर लिया जाता है। इसके बाद पीड़ित का फिजिकल SIM बंद हो जाता है और उसे अपने फोन पर मैसेज नहीं मिलते।
जून में इस मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को यूजर्स से 23,596 शिकायतें मिली थी। इन शिकायतों से जुड़े 1,001 एकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इसमें एकाउंट्स को बैन करना शामिल है। इन शिकायतों में से 16,069 बैन की अपील से जुड़ी थी। इसके नतीजे में 756 एकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जून में वॉट्सऐप को यूजर्स से कुल 23,596 शिकायतें मिली थी।
फोल्डेबल iPhone की मैन्युफैक्चरिंग जल्द शुरू की जा सकती है। हालांकि, कंपनी ने इस फोल्डेबल डिवाइस की पुष्टि नहीं की है। इसे अगले वर्ष लॉन्च किया जा सकता है। TF Securities के एनालिस्ट, इस वर्ष की तीसरी तिमाही के अंत में या चौथी तिमाही की शुरुआत में एपल की कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर Foxconn इस फोल्डेबल स्मार्टफोन की मैन्युफैक्चरिंग शुरू कर सकती है।
जनवरी में कंपनी ने Turbo 4 को पेश किया था। Turbo 4 Pro में प्रोसेसर के तौर पर Snapdragon 8s Gen 4 दिया जा सकता है। Turbo 4 में MediaTek Dimensity 8400-Ultra था। Redmi के जनरल मैनेजर, Thomas Wang ने बताया है कि कंपनी का एक स्मार्टफोन जल्द ही Snapdragon 8s Gen 4 SoC के साथ लॉन्च किया जाएगा। यह 4 nm ऑक्टाकोर चिपसेट 24 GB तक के LPDDR5x RAM और UFS 4.0 स्टोरेज को सपोर्ट करता है।
इस स्मार्टफोन में प्रोसेसर के तौर पर MediaTek Dimensity 7300 दिया गया है। इसमें 50 मेगापिक्सल के डुअल रियर कैमरा यूनिट है। कंपनी ने फरवरी में V50 को देश में पेश किया था। इस स्मार्टफोन के 8 GB के RAM और 128 GB की स्टोरेज वाले वेरिएंट का प्राइस 28,999 रुपये और 8 GB + 256 GB का 30,999 रुपये का है। इसके लिए प्री-बुकिंग शुरू हो गई है।
इस मैसेजिंग ऐप के यूजर्स को ऑनलाइन स्कैम और स्पैम की पहचान करने में मदद के लिए कंटेंट उपलब्ध कराया जाएगा। यह कंटेंट आठ क्षेत्रीय भाषाओं में होगा। पिछले वर्ष वॉट्सऐप ने मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के साथ मिलकर 'स्कैम से बचो' कैम्पेन शुरू किया था। वॉट्सऐप का कंट्रोल अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनी Meta के पास है।
गूगल ने बताया है कि पिछले वर्ष 1,58,000 से अधिक डिवेलपर्स को भी बैन किया है। इन डिवेलपर्स के एकाउंट्स से खतरनाक ऐप्स को पब्लिश किया जा रहा था। कंपनी ने खतरे की पहचान के लिए आर्टफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल शुरू किया है। AI से ह्युमन रिव्युअर्स को उल्लंघन के मामलों में से 92 प्रतिशत में मैलवेयर और स्पाइवेयर को पकड़ने में मदद की है।
इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने यह चेतावनी जारी की है। CERT-In ने एपल के आईफोन, टैबलेट्स और लैपटॉप्स के ऑपरेटिंग सिस्टम में सिक्योरिटी से जुड़ी कमियां पाई हैं। कंपनी के लिए भारत बड़े मार्केट्स में शामिल है। CERT-in की ओर से जारी की गई एडवाइजरी में कहा गया है कि एपल के प्रोडक्ट्स में सिक्योरिटी से जुड़ी कमियां मिली हैं। इससे हैकर्स संवेदनशील जानकारी तक पहुंच सकते हैं।