रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने कहा है कि UPI के यूजर्स की संख्या दोगुनी से अधिक बढ़ सकती है। UPI का मौजूदा बेस लगभग 40 करोड़ यूजर्स का है
विदेश में भी इस पेमेंट सर्विस का इस्तेमाल किया जा रहा है
देश में पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल तरीके से पेमेंट्स का दायरा तेजी से बढ़ा है। इसमें यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की बड़ी हिस्सेदारी है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने कहा है कि UPI के यूजर्स की संख्या दोगुनी से अधिक बढ़ सकती है। UPI का मौजूदा बेस लगभग 40 करोड़ यूजर्स का है।
RBI के डिप्टी गवर्नर, T Rabi Sankar ने Global Inclusive Finance India Summit में बताया, "UPI के एक्टिव यूजर्स लगभग 40 करोड़ हैं। हमारा टारगेट इसके लिए एक अरब यूजर्स का है। इसके लिए काफी गुंजाइश है और हमें एक लंबी यात्रा करने की जरूरत है।" उन्होंने कहा कि डिजिटल तरीके से पेमेंट के विस्तार ने देश में बड़ा बदलाव किया है। Rabi Sankar ने बताया कि डिजिटल पेमेंट्स में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी से ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) में 0.3 प्रतिशत की ग्रोथ हो सकती है। उन्होंने केन्या का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की तुलना में केन्या में प्रति व्यक्ति डिजिटल ट्रांजैक्शंस लगभग दोगुनी हैं।
UPI को ऑपरेट करने वाली नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के प्रमोटर्स में RBI शामिल है। भारत में कुल डिजिटल ट्रांजैक्शंस में UPI की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक की है। दुनिया में भारत डिजिटल तरीके से सबसे तेज पेमेंट्स करने वाला देश है। विदेश में भी कुछ देशों में इस पेमेंट सर्विस का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन देशों में भूटान, नेपाल, संयुक्त अरब अमीरात, मॉरीशस, श्रीलंका, फ्रांस और सिंगापुर शामिल हैं। इससे इन देशों की यात्रा करने वाले भारतीयों को आसानी से पेमेंट करने की सुविधा मिलती है।
NPCI ने UPI ट्रांजैक्शंस के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन का विकल्प भी दिया है। NPCI ने बताया था कि इससे यूजर्स को UPI के जरिए ट्रांजैक्शंस को फेस या फिंगरप्रिंट के जरिए ऑथेंटिकेट करने की अनुमति मिलेगी। इसमें छह डिजिट के PIN का इस्तेमाल नहीं करना होगा। हालांकि, UPI के जरिए पेमेंट्स को ऑथेंटिकेट करने के लिए PIN के इस्तेमाल के मौजूदा तरीके की भी अनुमति जारी रहेगी। बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन से डिवाइस के जरिए होने वाले फेस और फिंगरप्रिंट ऑथेंटिकेशन से ट्रांजैक्शंस पहले से आसान हो जाएंगी। इससे पहले UPI के जरिए की जाने वाली पेमेंट्स के लिए ट्रांजैक्शन वैल्यू की लिमिट को बढ़ाया गया था।
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