भारत में जल्द सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस लॉन्च कर सकती है Elon Musk की Starlink

स्टारलिंक को अंतिम स्वीकृति इंटर-मिनिस्ट्रियल स्टैंडिंग कमेटी से लेनी होगी। इसके बाद कंपनी को प्रोविजनल स्पेक्ट्रम एलॉट किया जाएगा

भारत में जल्द सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस लॉन्च कर सकती है Elon Musk की Starlink

Amazon के सैटेलाइट इंटरनेटसे जुड़े प्रोजेक्ट Kuiper को अप्रूवल नहीं मिला है

ख़ास बातें
  • स्टारलिंक को DoT की ओर से जल्द GMPCS लाइसेंस मिल सकता है
  • कंपनी को अंतिम स्वीकृति इंटर-मिनिस्ट्रियल स्टैंडिंग कमेटी से लेनी होगी
  • इसके बाद स्टारलिंक को प्रोविजनल स्पेक्ट्रम एलॉट किया जाएगा
विज्ञापन
बिलिनेयर Elon Musk की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस उपलब्ध कराने वाली Starlink जल्द देश में अपनी सर्विस लॉन्च कर सकती है। स्टारलिंक को टेलीकॉम डिपार्टमेंट (DoT) की ओर से ग्लोबल मोबाइल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट (GMPCS) लाइसेंस मिल सकता है। 

इस लाइसेंस से सैटेलाइट बेस्ड नेटवर्क सर्विस प्रोवाइडर्स को सैटेलाइट टर्मिनल्स लगाने की अनुमति मिलती है। एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि स्टारलिंक को लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) में बताई गई सिक्योरिटी कम्प्लायंस से जुड़ी शर्तों को 7 जून तक पूरा करने की समयसीमा दी गई थी और कंपनी ने इसे पूरा कर दिया है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि स्टारलिंक की सर्विस तुरंत शुरू हो सकती है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनी को गेटवेज स्थापित करने होंगे। यह नेटवर्क ऑपरेशंस सेंटर होता है और इसमें कुछ महीने लग सकते हैं। 

स्टारलिंक को अंतिम स्वीकृति इंटर-मिनिस्ट्रियल स्टैंडिंग कमेटी से लेनी होगी। इसके बाद कंपनी को प्रोविजनल स्पेक्ट्रम एलॉट किया जाएगा। हालांकि, अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी Amazon के सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस से जुड़े प्रोजेक्ट Kuiper को देश में सर्विस शुरू करने के लिए अप्रूवल नहीं मिला है। एमेजॉन को इस सर्विस के लिए DoT की ओर से LoI जारी नहीं किया गया है। स्टारलिंक को मस्क की रॉकेट कंपनी SpaceX ने डिवेलप किया है। यह सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से कई देशों में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट सर्विस उपलब्ध करा रही है। सामान्य इंटरनेट सर्विसेज के लिए जियोस्टेशनरी सैटेलाइट्स का इस्तेमाल किया जाता है। इसके विपरीत, स्टारलिंक सबसे बड़े लो अर्थ ऑर्बिट कॉन्स्टेलेशन का इस्तेमाल करती है। 

Reliance Jio और Bharti Airtel जैसे टेलीकॉम कंपनियों ने कहा है कि अगर सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का प्राइस कम रखा जाता है तो इससे उनके बिजनेस को नुकसान होगा। इन कंपनियों का कहना है कि इससे स्टारलिंक कंपनियों को फायदा हो सकता है। पिछले महीने टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए उनके वार्षिक रेवेन्यू का चार प्रतिशत केंद्र सरकार को भुगतान करने का प्रपोजल दिया था। स्टारलिंक ने सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का ऑक्शन नहीं करने के लिए लॉबीइंग की थी। इस कंपनी का कहना था कि इसके लिए इंटरनेशनल ट्रेंड के अनुसार लाइसेंस दिया जाना चाहिए। स्टारलिंक की दलील थी कि यह एक नेचुरल रिसोर्स है जिसकी कम्युनिकेशन से जुड़ी कंपनियों को शेयरिंग करनी चाहिए। 
 
Comments

लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।

आकाश आनंद

Gadgets 360 में आकाश आनंद डिप्टी न्यूज एडिटर हैं। उनके पास प्रमुख ...और भी

Share on Facebook Gadgets360 Twitter ShareTweet Share Snapchat Reddit आपकी राय google-newsGoogle News
Turbo Read

विज्ञापन

Follow Us

विज्ञापन

#ताज़ा ख़बरें
  1. सॉफ्टवेयर मेकर Strategy ने बढ़ाया क्रिप्टो का रिजर्व, 26 करोड़ डॉलर में खरीदे 2,932 बिटकॉइन 
  2. नया Aadhaar ऐप लॉन्च, अब घर बैठे मोबाइल नंबर और एड्रेस कर पाएंगे अपडेट, जानें कैसे
  3. 1.2 करोड़ यूजर्स, टारगेट से दोगुना कमाई! चीन का ये AI टूल अब Google और OpenAI की सबसे बड़ी टेंशन?
  4. Apple के फोल्डेबल iPhone को टक्कर देने के लिए Samsung की नया फोल्डेबल स्मार्टफोन लॉन्च करने की तैयारी
  5. Vivo X200T vs iQOO 13 vs Realme GT 7 Pro: जानें कौन सा फोन है बेस्ट?
  6. VIP ट्रैवल में फेवरेट Learjet 45XR: इसी प्राइवेट जेट में सवार थे अजीत पवार, जानें इस हाई-टेक एयरक्राफ्ट के बारे में सब कुछ
  7. 7560mAh बैटरी, डाइमेंसिटी 8500 अल्ट्रा वाले Redmi Turbo 5 के स्पेसिफिकेशंस हुए लीक
  8. Xiaomi 17 Max में मिल सकता है 200 मेगापिक्सल का प्राइमरी कैमरा 
  9. टेकी ने अपनी ही कंपनी से चुराया 88 करोड़ रुपये का सॉफ्टवेयर डाटा, दर्ज हुआ केस
  10. वॉयस असिस्टेंट बना जासूस? नहीं मानी गलती, लेकिन फिर भी 623 करोड़ का जुर्माना भरेगा Google
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.
ट्रेंडिंग प्रॉडक्ट्स »
लेटेस्ट टेक ख़बरें »