भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान गुरुवार को ऑस्ट्रेलिया में लागू 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध वाले कानून की तारीफ करते हुए कहा कि यह कदम मिसाल बन गया है।
Photo Credit: @narendramodi/Pixabay
पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया-भारत सालाना लीडर्स समिट में शामिल हुए।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान गुरुवार को ऑस्ट्रेलिया में लागू 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध वाले कानून की तारीफ करते हुए कहा कि यह कदम मिसाल बन गया है, जिससे भारत और बाकी दुनिया सीख ले सकती है। ऑस्ट्रेलिया दुनिया में पहला ऐसा देश है, जिसने सोशल मीडिया उपयोग के लिए उम्र की सीमा तय करके बाल कल्याण को प्राथमिकता देते हुए ऑफलाइन बातचीत को भी बढ़ावा दिया है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
पीएम मोदी ने की तारीफ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया-भारत सालाना लीडर्स समिट के दौरान एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सोशल मीडिया को रेगुलेट करने और युवा यूजर्स को प्रोटेक्ट करने के लिए ऑस्ट्रेलिया की कोशिश एक अहम मिसाल कायम कर रही हैं। पीएम ने ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बानीज समेत अन्य नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जिस तरह से आप सूचना प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया से संबंधित कानूनों में बदलाव ला रहे हैं और समाज की सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं। यह दुनिया के लिए बहुत प्रेरणादायक है और हम आपकी कोशिशों से बहुत कुछ सीख रहे हैं और उनसे कई सबक ले रहे हैं।
आपको बता दें कि बीते साल दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया ने आधिकारिक तौर पर 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगाया था। देश में इस नियम के बाद बच्चे फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, एक्स, रेडिट, टिकटॉक और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। किसी देश ने पहली बार नाबालिग यूजर्स को सोशल मीडिया अकाउंट बनाने से रोका गया था। ऑस्ट्रेलिया ने इस प्रतिबंध को माता-पिता को ज्यादा कंट्रोल प्रदान करने और बच्चों की सुरक्षा में मदद करने के लिए लागू किया था। जिससे बच्चों को आराम से अपना बचपन जीने की आजादी मिली और परिवारों को ज्यादा मानसिक शांति मिली।
कितना सख्त है कानून
इस कानून के लागू होने के बाद ऑस्ट्रेलिया में सभी सोशल मीडिया कंपनियां सख्त आयु वेरिफिकेशन लागू कर रही हैं। अगर इसका पालन नहीं किया जाता है तो 33 मिलियन यूएस डॉलर का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। इस बदलाव को लागू करने की जिम्मेदारी माता-पिता या बच्चों की नहीं बल्कि कंपनियों की है। यह एक प्रभावशाली पॉलिसी है। इससे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने में मदद मिलती है। इसके साइबर अटैक और खराब कंटेंट के उपयोग से बढ़ने वाली चिंताओं को दूर करने में मदद मिलती है। इस पॉलिसी से ऑस्ट्रेलिया को नाबालिगों के बीच सोशल मीडिया के उपयोग के सामाजिक प्रभावों से निपटने में मदद मिलती है।
क्यों जरूरी है यह कानून
कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का कदम मानसिक स्वास्थ्य, स्लीप पैटर्न और सामाजिक विकास पर पड़ने वाले प्रभावों का जोखिमों कम होता है। आपको बता दें कि सोशल मीडिया के ज्यादा उपयोग से युवा यूजर्स में चिंता और आत्मसम्मान में कमी आ सकती है।
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