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नए साल से बदलने जा रहा कार्ड से ऑनलाइन पेमेंट का तरीका, RBI के टोकन सिस्‍टम से इंडस्‍ट्री परेशान!

टोकनाइजेशन ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें कार्ड डिटेल एक यूनीक कोड या टोकन में बदल जाती है। यह सब एक एल्‍गोरिदम से होता है। इससे ऑनलाइन खरीदारी करते समय कार्ड डिटेल सुरक्षित रहती है।

नए साल से बदलने जा रहा कार्ड से ऑनलाइन पेमेंट का तरीका, RBI के टोकन सिस्‍टम से इंडस्‍ट्री परेशान!

मर्चेंट्स और बैंकरों का तर्क है कि उन्हें इन बदलावों का पालन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया।

ख़ास बातें
  • RBI नए साल से ग्राहकों को टोकन सिस्‍टम का ऑप्‍शन देने जा रहा है
  • कार्ड से पेमेंट करते समय यूनीक कोड जनरेट होगा
  • इंडस्‍ट्री का कहना है कि इसकी तैयारी के लिए उसे समय नहीं दिया गया
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भारतीय रिजर्व बैंक RBI नए साल से ग्राहकों को टोकन सिस्‍टम का ऑप्‍शन देने जा रहा है। इसके तहत कार्ड से पेमेंट करते समय ओरिजनल कार्ड डिटेल्स की जगह यूनीक ऑप्शनल कोड डिस्क्रिप्शन जनरेट होगा। इसको लेकर इंडस्‍ट्री सोर्सेज और बैंकों का कहना है कि RBI की ‘कार्ड टोकन' की ओर बढ़ने की योजना से कई कंपनियां, खासतौर पर ई-कॉमर्स फर्म और फूड डिलिवरी फर्म प्रभावित हो सकती हैं। RBI ने मार्च 2020 में गाइडलाइंस जारी करते हुए कहा था कि मर्चेंट्स को वेबसाइटों पर कार्ड की डिटेल सेव करने की इजाजत नहीं होगी। यह फैसला डेटा सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए लिया गया था। इस साल सितंबर में नई गाइडलाइंस आईं। इसके तहत कंपनियों को साल के अंत तक नियमों का पालन करने और कस्‍टमर्स को टोकन का विकल्प देने का समय दिया गया है। 

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, टोकनाइजेशन ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें कार्ड डिटेल एक यूनीक कोड या टोकन में बदल जाती है। यह सब एक एल्‍गोरिदम से होता है। इससे ऑनलाइन खरीदारी करते समय कार्ड डिटेल सुरक्षित रहती है।  

कंपनियों के सिस्टम से सेव क्रेडिट और डेबिट कार्ड डेटा को RBI ने 1 जनवरी 2022 से हटाने का आदेश दिया है।

मर्चेंट्स और बैंकरों का तर्क है कि उन्हें इन बदलावों का पालन करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। टोकन सिस्‍टम से बाहर आने का मतलब होगा कि ग्राहकों को ऑनलाइन शॉपिंग करने पर कार्ड डिटेल को मैनुअली दर्ज करने की जरूरत होगी, वह भी हर बार। इस वजह से कई कस्‍टमर ऑनलाइन शॉपिंग बंद कर सकते हैं। 

नई दिल्ली स्थित थिंक-टैंक, एलायंस ऑफ डिजिटल इंडिया फाउंडेशन के प्रमुख सिजो कुरुविला जॉर्ज ने कहा कि मर्चेंट्स को लगभग 20 से 40 फीसदी तक रेवेन्‍यू लॉस हो सकता है। छोटी फर्मों पर इसका ज्‍यादा असर होगा। 

इस मामले में राज्‍यों के स्वामित्व वाले बैंकों और प्राइवेट लेंडर्स के सीनियर अधिकारियों ने कहा कि उन्हें चिंता है कि इस कदम से कार्ड लेनदेन में उल्लेखनीय गिरावट आएगी और कैश पेमेंट में बढ़ोतरी होगी।

एक बैंकर ने कहा कि जनवरी तक सभी बैंक इसके लिए तैयार नहीं होंगे। अगर हो भी गए तो किसी असुविधा से बचने के लिए वन-स्टेप कैश ऑन डिलीवरी का ऑप्‍शन चुन सकते हैं। इससे न केवल कार्ड से पेमेंट में गिरावट आएगी, बल्कि कैश का सर्कुलेशन भी बढ़ेगा, जो चिंता का विषय है।

देश में क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्‍शन अक्टूबर में 1,00,000 करोड़ का आंकड़ा पार कर गया। डिजिटल पेमेंट के दूसरे तरीकों में भी पिछले कुछ साल में तेजी देखी गई है।

एक इंटरनेट फर्म के एग्‍जीक्‍यूटिव ने कहा कि इंडस्‍ट्री अभी इस चीज को लेकर क्लियर नहीं है कि कैश बैक स्‍कीम्‍स और मंथली-इंस्‍टॉलमेंट टाइप की कार्ड खरीदारी कैसे काम करेगी। इस मामले में रिजर्व बैंक से पूछा गया है। 

RBI ने इस मामले पर कमेंट के लिए भेजे गए ई-मेल का जवाब नहीं दिया है। अमेजॉन, फ्लिपकार्ट, जोमैटो जैसी कंपनियों ने भी कमेंट नहीं भेजा है। 

इंडस्‍ट्री एग्‍जीक्‍यूटिव्‍स का कहना है कि भले ही कुछ कार्ड नेटवर्क, बैंक और मचेंट्स तैयार हों, लेकिन इस प्रक्रिया को इंटीग्रेट करने और सुचारू रूप से चलाने में महीनों लग सकते हैं। 

पेमेंट्स फर्म PayU के चीफ प्रोडक्‍ट ऑफ‍िसर मानस मिश्रा ने कहा कि पूरे इकोसिस्‍टम को इसके लिए तैयार होने में लगभग 6 से 9 महीने और लग सकते हैं।

 
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