जूरी ने कहा कि प्लेटफॉर्म्स ने स्वयं को इस तरह से डिजाइन किया है कि यह लत लगने का कारण बनती है।
Meta और YouTube पर लत लगाने का दोषी पाए जाने के बाद जुर्माना लगाया गया है।
Meta और YouTube पर जुर्माना लगा है। वाशिंगटन में जूरी ने एक केस का फैसला सुनाते हुए दोनों प्लेटफॉर्म्स को जुर्माना देने का आदेश दिया है। सोशल मीडिया कंपनी को लेकर फैसले में कहा गया है कि मेटा ने अपने लत लगाने वाले डिजाइन और एल्गोरिदम के चलते युवा यूजर्स को हानि पहुंचाई है। यही बात यूट्यूब के लिए भी कही गई है। जूरी ने कहा कि प्लेटफॉर्म्स ने स्वयं को इस तरह से डिजाइन किया है कि यह लत लगने का कारण बनती है। जूरी का यह फैसला ऐतिहासिक कहा जा रहा है। इसके बाद सोशल मीडिया कंपनियों पर यूजर्स द्वारा अब मुकदमा दायर किया जा सकता है। यानी अपने हितों के लिए सोशल मीडिया कंपनियों को कानूनी रूप से जवाब देह बनाया जा सकता है।
Meta और YouTube पर जुर्माना लगाया गया है। एक युवा को हानि पहुंचाने का फैसला सुनाते हुए जूरी ने कहा कि मेटा को मुआवजे और दंडात्मक हर्जाने के तौर पर कुल 42 लाख डॉलर और यूट्यूब को 18 लाख डॉलर का भुगतान करना होगा। भारतीय करेंसी के अनुसार, यह 39 करोड़ और 17 करोड़ रुपये की राशि बनती है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में साफ होता है कि कंपनियों को दायर मुकदमे के तहत लत लगाने का दोषी पाया गया है।
बता दें कि इस मामले को के.जी.एम. नाम की 20 वर्षीय महिला ने दायर किया था, जिसमें उसने सोशल मीडिया कंपनियों पर सिगरेट या डिजिटल कैसीनो की तरह लत लगाने वाले प्रोडक्ट बनाने का आरोप लगाया था। अनंत स्क्रॉल और एल्गोरिथम रिकमेंडेशन जैसी सुविधाओं का हवाला देते हुए, महिला ने इंस्टाग्राम और फेसबुक की मालिक मेटा और गूगल के यूट्यूब पर मुकदमा दायर किया था। इसमें दावा किया गया था कि इनसे उसे स्ट्रेस और एंजायटी की समस्या हुई।
के.जी.एम. के मामले में आया फैसला बहुत ऐतिहासिक है। यह उन किशोरों, स्कूल जिलों और राज्य के अटॉर्नी जनरलों द्वारा दायर किए गए मुकदमों के लिए जीत जैसा है जिसमें मेटा, यूट्यूब, टिकटॉक और स्नैपचैट की मालिक स्नैप के खिलाफ लोगों ने दायर किए थे। इस फैसले ने एक नए कानूनी सिद्धांत को मान्यता दी है कि सोशल मीडिया साइट्स या ऐप किसी व्यक्ति को निजी तौर पर नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस साल सुनवाई के लिए आने वाले इसी तरह के मामलों में इसका अहम योगदान हो सकता है, जिससे इंटरनेट की दिग्गज कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके साथ ही उन्हें अपने उत्पादों में बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
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