भारत सरकार ने मई में लॉन्च किए गए Cell Broadcast System को फिलहाल अस्थायी रूप से रोक दिया है। NDMA ने 12 जून से सेवा निलंबित करने का आदेश जारी किया है।
Photo Credit: Unsplash/ Dominic Wajda
भारत सरकार ने Cell Broadcast System को फिलहाल अस्थायी रूप से रोका
भारत सरकार ने हाल ही में लॉन्च किए गए Cell Broadcast System (CBS) को फिलहाल अस्थायी रूप से रोक दिया है। यह सिस्टम प्राकृतिक आपदाओं और अन्य आपात स्थितियों के दौरान लोगों को तुरंत अलर्ट भेजने के लिए शुरू किया गया था। हालांकि लॉन्च के करीब एक महीने बाद ही इसे होल्ड पर डाल दिया गया है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के एक आदेश के अनुसार यह सेवा 12 जून से अगली सूचना तक निलंबित रहेगी। फिलहाल इस फैसले के पीछे की सटीक वजह सार्वजनिक नहीं की गई है।
NDMA ने 12 जून को जारी अपने आदेश में कहा कि अधिकारियों द्वारा उठाए गए कुछ मुद्दों के कारण Cell Broadcast Service को अस्थायी रूप से निलंबित किया जा रहा है। आदेश में यह नहीं बताया गया कि आखिर कौन सी समस्या सामने आई है, लेकिन सर्विस को अगले निर्देश तक रोकने की बात कही गई है।
वहीं, The Hindu की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि यह फैसला एक ऐसे डिजास्टर अलर्ट के बाद लिया गया, जो कथित तौर पर आधी रात को प्रधानमंत्री के मोबाइल नंबर पर पहुंच गया था। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
Cell Broadcast System को इस तरह डिजाइन किया गया है कि अलर्ट मिलते ही यूजर्स का तुरंत ध्यान उस पर जाए। इसके तहत मोबाइल फोन साइलेंट मोड में होने पर भी तेज अलर्ट टोन बजाते हैं और स्क्रीन पर इमरजेंसी मैसेज दिखाई देता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 12 जून की रात हरियाणा और उत्तर प्रदेश की डिजास्टर मैनेजमेंट यूनिट्स की ओर से कुछ अलर्ट भेजे गए थे, जिसके बाद कई यूजर्स के फोन आधी रात को बज उठे।
भारत सरकार ने मई 2026 में Cell Broadcast System को देशभर में लॉन्च किया था। इसे देश के डिजास्टर वॉर्निंग और इमरजेंसी कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना गया था। यह तकनीक दुनिया के कई देशों में पहले से इस्तेमाल की जा रही है और प्राकृतिक आपदाओं, सुरक्षा संबंधी घटनाओं तथा अन्य आपात स्थितियों में लोगों तक रियल-टाइम अलर्ट पहुंचाने का काम करती है।
पारंपरिक SMS अलर्ट के मुकाबले Cell Broadcast System की खासियत यह है कि यह इंटरनेट पर निर्भर नहीं करता और नेटवर्क भीड़भाड़ के दौरान भी काम कर सकता है। इसके जरिए किसी क्षेत्र में मौजूद लाखों मोबाइल यूजर्स को एक साथ अलर्ट भेजा जा सकता है। दूरसंचार मंत्रालय के मुताबिक यह टेक्नोलॉजी प्रभावित इलाकों तक लगभग रियल-टाइम में अलर्ट पहुंचाने में सक्षम है।
यह अलर्ट मोबाइल स्क्रीन पर पॉप-अप नोटिफिकेशन के रूप में दिखाई देता है और इसके साथ तेज अलर्ट साउंड भी सुनाई देती है। कुछ सपोर्टेड डिवाइसेज में यह मैसेज पढ़कर भी सुनाया जा सकता है, जिससे ज्यादा लोगों तक जानकारी पहुंच सके।
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