मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि शॉर्ट-टर्म में बिटकॉइन की दिशा भू-राजनितिक कारणों और मैक्रो-इकोनॉमिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। बिटकॉइन के लिए 72,000 डॉलर पर महत्वपूर्ण सपोर्ट और लगभग 79,000 डॉलर पर रेजिस्टेंस है
पिछले सप्ताह बिटकॉइन ने 78,344 डॉलर के साथ लगभग दो महीने का हाई छुआ था
अमेरिकी प्रेसिडेंट Donald Trump के ईरानके साथ संघर्षविराम को बढ़ाने की घोषणा करने के बाद क्रिप्टो मार्केट में बुधवार को तेजी थी। सबसे अधिक वैल्यू वाली क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin का प्राइस दो प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा है। दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Ethereum में भी मजबूती थी।
इस रिपोर्ट को प्रकाशित करने पर इंटरनेशनल क्रिप्टो एक्सचेंज Coinmarketcap पर बिटकॉइन का प्राइस लगभग 78,275 डॉलर पर था। Ethereum का प्राइस लगभग 2,392 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था। ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल का युद्ध शुरू होने के बाद से बिटकॉइन का प्राइस ज्यादातर 65,000 डॉलर से 75,000 डॉलर की रेंज में रहा है। हालांकि, पिछले सप्ताह इस सबसे लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी ने 78,344 डॉलर के साथ लगभग दो महीने का हाई छुआ था।
इंटरनेशनल ट्रेड के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग Hormuz जलडमरूमध्य को लेकर पिछले कुछ सप्ताह से ईरान और अमेरिका के बीच तनाव है। ईरान का दावा है कि होर्मुज उसके समुद्री क्षेत्र में है और इस वजह से इसका इस्तेमाल करने वाले जहाजों को उसकी अनुमति लेनी होगी। अमेरिका ने ईरान पर होर्मुज को खोलने के लिए दबाव बढ़ाया है। अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज की नाकाबंदी भी की थी। हालांकि, इस विवाद को लेकर इन दोनों देशों का रुख नर्म पड़ता दिख रहा है। ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्षविराम को बढ़ाने का संकेत दिया है। इससे क्रिप्टो सहित मार्केट्स में तेजी है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि शॉर्ट-टर्म में बिटकॉइन की दिशा भू-राजनितिक कारणों और मैक्रो-इकोनॉमिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। बिटकॉइन के लिए 72,000 डॉलर पर महत्वपूर्ण सपोर्ट और लगभग 79,000 डॉलर पर रेजिस्टेंस है। बिटकॉइन के 80,000 डॉलर का लेवल पार करने पर इसमें काफी तेजी आ सकती है। पिछले वर्ष अक्टूबर में बिटकॉइन ने 1,26,000 डॉलर से अधिक का हाई बनाया था। इसके बाद से इसमें लगभग 40 प्रतिशत की गिरावट हुई है। क्रिप्टो मार्केट में इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स की ओर से डिमांड मजबूत हो रही है। पिछले सप्ताह में बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेड फंड्स (ETF) में लगभग एक अरब डॉलर का इनफ्लो हुआ है। हाल ही में एक रिपोर्ट में बताया गया था कि ईरान से जुड़े कुछ ग्रुप मिलिट्री ड्रोन्स खरीदने के लिए क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके अलावा रूस के कुछ ग्रुप के भी क्रिप्टोकरेंसी से ड्रोन और पार्ट्स खरीदने का शक है।
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