पिछले वर्ष अक्टूबर में बिटकॉइन ने 1,26,000 डॉलर से अधिक का हाई लेवल बनाया था। इसके बाद से इस सबसे लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी के प्राइस में 50 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट हुई है
दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Ethereum में भी गिरावट थी
सबसे अधिक वैल्यू वाली क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin में बुधवार को गिरावट थी। मजबूत डॉलर और अमेरिका में फेडरल रिजर्व के रुख को लेकर अनिश्चितता से क्रिप्टो मार्केट पर असर पड़ रहा है। बिटकॉइन का प्राइस 59,000 डॉलर से नाचे चला गया है। बहुत सी अन्य क्रिप्टोकरेंसीज में भी नुकसान था।
इस रिपोर्ट को पब्लिश करने पर क्रिप्टो एक्सचेंज CoinmarketCap पर बिटकॉइन का प्राइस लगभग 58,660 डॉलर पर था। दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Ethereum में भी गिरावट थी। Ethereum का प्राइस लगभग 1,574 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था। गिरावट वाली अन्य क्रिप्टोकरेंसीज में Tron, XRP, Monero और BNB शामिल थे। क्रिप्टो का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 2.06 लाख करोड़ डॉलर पर था।
बिटकॉइन में जून में 20 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट हुई है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनवेस्टर्स का फोकस फेडरल रिजर्व के चेयरमैन, Kevin Warsh के संबोधन पर है जिससे आगामी मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर कोई संकेत मिल सकता है। फेडरल रिजर्व की ओर से पॉजिटिव स्टेटमेंट आने पर बिटकॉइन के दोबारा 60,000 डॉलर के लेवल को पार करने की संभावना है। अमेरिका में स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) में 30 जून को कुछ आउटफ्लो हुआ है। इससे बड़े इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के क्रिप्टो मार्केट से कुछ दूरी बनाने का पता चल रहा है। पिछले वर्ष अक्टूबर में बिटकॉइन ने 1,26,000 डॉलर से अधिक का हाई लेवल बनाया था। इसके बाद से इस सबसे लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी के प्राइस में 50 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट हुई है।
अमेरिकी प्रेसिडेंट Donald Trump का बिटकॉइन और Ethereum सहित क्रिप्टोकरेंसीज में 10 करोड़ डॉलर से ज्यादा का इनवेस्टमेंट है। बिटकॉइन की सबसे बड़ी कॉरपोरेट होल्डर Strategy ने भी हाल ही में अपने क्रिप्टो के रिजर्व को बढ़ाया है। Strategy (पहले MicroStrategy) के पास कुल 8,45,256 बिटकॉइन हैं। इस अमेरिकी कंपनी की बिटकॉइन होल्डिंग की वैल्यू लगभग 52 अरब डॉलर की है। Strategy के को-फाउंडर और एग्जिक्यूटिव चेयरमैन, Michael Saylor ने बताया था कि इसके लिए प्रति बिटकॉइन लगभग 75,680 डॉलर का औसत प्राइस दिया गया है। इस वर्ष फरवरी में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद बिटकॉइन के प्राइस में तेजी आई थी। इससे मार्केट एनालिस्ट्स अनिश्चितता की स्थिति में बिटकॉइन का हेज के तौर पर दर्जा देने पर विचार कर रहे थे। हालांकि, यह तेजी ज्यादा नहीं चली और इसमें इसका प्राइस काफी गिरा है। इसके पीछे ETF से फंड का विड्रॉल भी एक बड़ा कारण है।
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