भारत में AI अब सिर्फ चैटबॉट तक सीमित नहीं है। NeuroRank, jUMPP, Vigyanlabs और Techmaster जैसी टेक्नोलॉजी अलग-अलग तरीकों से डिजिटल एक्सपीरिएंस बदलने पर काम कर रही हैं।
Photo Credit: AI Generated
भारत में बन रही AI टेक्नोलॉजी सर्च और डिजिटल एक्सपीरिएंस को बदल रही हैं
AI का इस्तेमाल अब सिर्फ सवालों के जवाब पाने या फोटो-वीडियो बनाने तक सीमित नहीं रह गया है। लोग ChatGPT, Gemini, Claude और Perplexity जैसे AI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल प्रोडक्ट की जानकारी लेने, कंपनियों की तुलना करने और किसी सर्विस के बारे में राय जानने के लिए भी कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ AI का इस्तेमाल पर्सनल फाइनेंस, डेटा सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग और टेक्नोलॉजी को आसान भाषा में समझाने के लिए भी बढ़ रहा है। भारत में भी कई कंपनियां ऐसे AI आधारित सॉल्यूशंस पर काम कर रही हैं, जिनका असर आने वाले समय में आम यूजर्स के डिजिटल एक्सपीरिएंस पर देखने को मिल सकता है। आइए ऐसी ही 5 Made-in-India AI टेक्नोलॉजी पर नजर डालते हैं।
पैसे से जुड़े कामों के लिए आज यूजर्स को अलग-अलग ऐप का इस्तेमाल करना पड़ता है। बैंकिंग के लिए अलग ऐप, UPI के लिए अलग प्लेटफॉर्म, निवेश के लिए अलग ऐप और खर्च का हिसाब रखने के लिए अलग सर्विस। इसी परेशानी को कम करने के लिए भारत में बना jUMPP एक ही प्लेटफॉर्म पर कई तरह की फाइनेंशियल सर्विसेज को लाने की कोशिश करता है। इसमें jAI नाम का AI असिस्टेंट भी दिया गया है, जो यूजर के खर्च, बजट और फाइनेंशियल गोल्स से जुड़ी जानकारी को समझकर पर्सनलाइज्ड इनसाइट्स देने के लिए डिजाइन किया गया है। प्लेटफॉर्म में मल्टी-लैंग्वेज इंटरैक्शन का सपोर्ट भी है।
आसान शब्दों में कहें तो इसका मकसद सिर्फ यह दिखाना नहीं है कि आपने कितना पैसा खर्च किया, बल्कि आपके खर्च को समझकर उसे ज्यादा उपयोगी तरीके से पेश करना है। अगर ऐसे AI फाइनेंस टूल्स ज्यादा बेहतर होते हैं, तो आम यूजर के लिए अपने पैसे को मैनेज करना आसान हो सकता है।
जब हम AI की बात करते हैं तो आमतौर पर ChatGPT जैसे ऐप या AI फीचर्स वाले स्मार्टफोन ही याद आते हैं। लेकिन इनके पीछे बड़ी कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है। खासकर जब कंपनियां AI को बड़े स्तर पर इस्तेमाल करती हैं, तब डेटा, GPU कंप्यूटिंग, सिक्योरिटी और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर महत्वपूर्ण हो जाते हैं। DeepTech कंपनी Vigyanlabs इसी क्षेत्र में काम कर रही है। कंपनी प्राइवेट AI क्लाउड, एज कंप्यूटिंग, माइक्रो डेटा सेंटर और इंटेलिजेंट इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट जैसे सॉल्यूशंस पर काम करती है।
इसके FEMTO प्लेटफॉर्म को हाई-डेंसिटी GPU कंप्यूटिंग और लोकल AI कैपेबिलिटी के लिए डिजाइन किया गया है, जबकि Virtune प्राइवेट क्लाउड मैनेजमेंट और AI वर्कलोड ऑर्केस्ट्रेशन पर फोकस करता है। इसका सीधा असर आम यूजर को शायद किसी ऐप के फीचर की तरह नजर न आए, लेकिन सुरक्षित और लोकल AI इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ने से आने वाले समय में AI सर्विसेज को ज्यादा बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।
मान लीजिए आप Google पर किसी प्रोडक्ट की जानकारी खोजने के बजाय ChatGPT से पूछते हैं कि “मेरे लिए कौन सा स्मार्टफोन अच्छा रहेगा?” या “भारत में सबसे अच्छी इलेक्ट्रिक कार कौन सी है?” ऐसे सवालों के जवाब में AI अलग-अलग कंपनियों और प्रोडक्ट्स के नाम सुझा सकता है। ऐसे में किसी कंपनी के लिए सिर्फ Google Search में ऊपर आना ही काफी नहीं रह जाता।
इसी बदलाव पर NeuroRank काम कर रहा है। यह एक AI Visibility Intelligence प्लेटफॉर्म है, जो यह समझने में मदद करता है कि ChatGPT, Gemini, Claude और Perplexity जैसे AI सिस्टम किसी ब्रांड को किस तरह पेश कर रहे हैं। प्लेटफॉर्म यह मॉनिटर करता है कि किसी कंपनी का नाम AI के जवाबों में आ रहा है या नहीं, उसकी जगह कोई दूसरी कंपनी सुझाई जा रही है या उसके बारे में गलत जानकारी दिखाई जा रही है।
इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में जब यूजर किसी प्रोडक्ट या कंपनी के बारे में AI से सवाल पूछेगा, तब कंपनियों के लिए यह जानना भी जरूरी होगा कि AI उन्हें किस तरह समझ रहा है। यानी डिजिटल दुनिया में Google पर दिखने के बाद अब AI के जवाब में दिखना भी एक नई चुनौती बन रही है।
आज कोई नया फोन, लैपटॉप या AI टूल खरीदने से पहले यूजर सिर्फ कंपनी की वेबसाइट पर दी गई स्पेसिफिकेशंस नहीं देखता। YouTube वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट, रिव्यू, तुलना और एक्सपीरिएंस भी खरीदारी के फैसले को प्रभावित करते हैं। टेक्नोलॉजी जितनी जटिल हो रही है, उसे आसान भाषा में समझाने की जरूरत भी उतनी ही बढ़ रही है। Techmaster इसी टेक्नोलॉजी और डिजिटल कंटेंट के बीच काम करता है। इसका फोकस टेक्नोलॉजी, डिजिटल कंटेंट और कंज्यूमर टेक एक्सपीरिएंस के आसपास है।
AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ यह बदलाव और महत्वपूर्ण हो रहा है। अब यूजर सिर्फ यह नहीं जानना चाहता कि किसी फोन में कौन सा प्रोसेसर या कितने मेगापिक्सल का कैमरा है। वह यह भी जानना चाहता है कि इन फीचर्स का असल इस्तेमाल में क्या फायदा होगा। ऐसे में टेक कंटेंट और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका सिर्फ जानकारी देने से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी को समझने में मदद करने वाली हो सकती है।
भारत में AI का इकोसिस्टम अब सिर्फ जनरेटिव AI या चैटबॉट बनाने तक सीमित नहीं दिख रहा है। कुछ कंपनियां यह देख रही हैं कि AI के जवाबों में ब्रांड कैसे दिखाई देते हैं, कुछ पर्सनल फाइनेंस को आसान बनाने पर काम कर रही हैं, तो कुछ AI के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री-स्पेसिफिक टूल्स तैयार कर रही हैं।
इन टेक्नोलॉजी का बड़ा असर शायद किसी एक AI फीचर के रूप में नहीं, बल्कि हमारे रोजमर्रा के डिजिटल एक्सपीरिएंस में धीरे-धीरे दिखाई देगा। आज हम किसी कंपनी या प्रोडक्ट को Google पर खोजते हैं, कल उसी सवाल का जवाब सीधे AI से ले सकते हैं। इसी तरह पैसे मैनेज करने, ऑनलाइन सर्विस लेने या किसी टेक प्रोडक्ट को समझने का तरीका भी AI की मदद से बदल सकता है। यही वजह है कि भारत का अगला AI बूम सिर्फ नए AI मॉडल बनाने के बजाय उन समस्याओं को हल करने पर ज्यादा केंद्रित हो सकता है, जिनका सामना यूजर्स और कंपनियां रोज करते हैं।
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