स्मार्टफोन कंपनियों से सोर्स कोड एक्सेस लेने की खबरों को लेकर सरकार ने अब आधिकारिक तौर पर स्थिति साफ कर दी है। PIB Fact Check ने Reuters की रिपोर्ट को फर्जी बताते हुए कहा कि ऐसा कोई नियम प्रस्तावित नहीं है।
PIB Fact Check ने स्मार्टफोन सोर्स कोड एक्सेस से जुड़ी रिपोर्ट को फर्जी बताया
भारत सरकार द्वारा स्मार्टफोन कंपनियों से सोर्स कोड एक्सेस लेने की खबरों पर अब आधिकारिक सफाई सामने आ गई है। PIB Fact Check ने सोमवार को सुबह साफ तौर पर कहा है कि सरकार ने ऐसा कोई नियम प्रस्तावित नहीं किया है, जिसमें Apple, Samsung या Xiaomi जैसी कंपनियों को अपना सोर्स कोड शेयर करने के लिए “मजबूर” किया जाए। सरकार का कहना है कि इस तरह के दावे भ्रामक हैं और फिलहाल मोबाइल सिक्योरिटी को लेकर सिर्फ स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन का प्रोसेस चल रहा है।
दावा सामने आने के बाद प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर इस रिपोर्ट को फेक बताया। PIB के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मोबाइल सिक्योरिटी से जुड़े संभावित रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को लेकर इंडस्ट्री के साथ बातचीत शुरू की है, जो कि किसी भी सेफ्टी या सिक्योरिटी स्टैंडर्ड के लिए एक सामान्य प्रक्रिया होती है। सरकार ने यह भी साफ किया कि अभी तक कोई फाइनल नियम तय नहीं किए गए हैं और भविष्य में अगर कोई फ्रेमवर्क बनेगा भी, तो वह सभी पक्षों से सलाह-मशविरा करने के बाद ही किया जाएगा।
दरअसल, यह सफाई Reuters की उस रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें कहा गया था कि भारत सरकार स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरर्स से सोर्स कोड एक्सेस की मांग कर सकती है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि यह प्रस्ताव नए मोबाइल सिक्योरिटी नियमों का हिस्सा हो सकता है और Apple, Samsung, Xiaomi जैसी कंपनियां इसे लेकर चिंतित हैं। इसी रिपोर्ट के आधार पर यह चर्चा तेज हो गई थी कि सरकार फोन के सॉफ्टवेयर लेवल तक सीधी पहुंच चाहती है।
A news report by @Reuters claims that India proposes forcing smartphone manufacturers to share their source code as part of a security overhaul.
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) January 11, 2026
🔍 #PIBFactCheck
❌ This claim is #FAKE
▶️ The Government of India has NOT proposed any measure to force smartphone manufacturers to… pic.twitter.com/0bnw0KQL9Q
PIB Fact Check ने अपने बयान में यह भी समझाया कि स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन का मतलब किसी नियम को लागू करना नहीं होता। इस प्रक्रिया में इंडस्ट्री के साथ अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा की जाती है, ताकि यह समझा जा सके कि कौन सा सिक्योरिटी स्टैंडर्ड व्यवहारिक है और यूजर्स की सुरक्षा को बेहतर बना सकता है। सरकार ने दो टूक कहा है कि सोर्स कोड शेयर करने को लेकर कोई अनिवार्य प्रस्ताव मौजूद नहीं है।
जो लोग नहीं जानते, उनके लिए बता दें कि सोर्स कोड किसी भी सॉफ्टवेयर का बेस होता है, जिसमें कंप्यूटर को दिए जाने वाले सभी निर्देश लिखे होते हैं। यही वजह है कि कंपनियां इसे अपनी सबसे संवेदनशील और प्राइवेट जानकारी मानती हैं। फिलहाल सरकार की इस सफाई के बाद यह साफ हो गया है कि सोर्स कोड को लेकर जो खबरें चल रही थीं, वे आधिकारिक तौर पर सही नहीं हैं।
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