Secure

Secure - ख़बरें

  • UMANG App में यूजर्स का डेटा खतरे में? सरकारी ऐप की सिक्योरिटी को लेकर बड़ा दावा
    एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि केंद्र सरकार के UMANG पोर्टल में कई सुरक्षा खामियां मौजूद थीं, जिनकी वजह से EPFO, LPG बुकिंग और Aadhaar से जुड़ी जानकारी जोखिम में पड़ सकती थी। साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर्स के मुताबिक, ये कमजोरियां लंबे समय से मौजूद हो सकती हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इन खामियों की पुष्टि करते हुए कहा है कि जरूरी सुधार और सुरक्षा उपाय लागू किए जा रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार, संबंधित APIs में मौजूद प्लेन टेक्स्ट डेटा को एन्क्रिप्ट किया गया है और सिस्टम की लगातार निगरानी की जा रही है।
  • Spam कॉल्स और मैसेज पर कसने वाली है लगाम! TRAI का Meta और Google के साथ बड़ा प्लान
    रिपोर्ट के मुताबिक, TRAI Meta और Google के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि WhatsApp और Google के इनबिल्ट फोन डायलर पर दर्ज स्पैम शिकायतों को टेलीकॉम ऑपरेटर्स के सिस्टम और DND पोर्टल से जोड़ा जा सके। प्रस्तावित सिस्टम के जरिए स्पैम कॉल और मैसेज भेजने वाले नंबरों की पहचान तेजी से हो सकेगी और उनके खिलाफ जल्दी कार्रवाई की जा सकेगी। फिलहाल इस योजना पर चर्चा जारी है और Meta, Google या TRAI की ओर से इसके लागू होने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
  • TRAI ने दिया फरमान, 1600 और 140 सीरीज के फोन नंबर्स को ब्लॉक नहीं कर सकते Truecaller जैसे ऐप्स
    TRAI ने बताया है कि उसने बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) से जुड़ी फर्मों के लिए 1600 सीरीज के फोन नंबर्स का इस्तेमाल को अनिवार्य किया था। इसके अलावा 1600 सीरीज के फोन नंबर्स का इस्तेमाल 'गवर्नमेंट टु सिटीजन कम्युनिकेशन' में शामिल एंटिटीज के लिए भी अनिवार्य बनाया गया था। इस वजह से 1600 सीरीज के फोन नंबर्स को कॉल मैनेजमेंट ऐप्स और इस तरह के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ब्लॉक नहीं कर सकते।
  • TRAI से क्यों भिड़ गया Truecaller? स्पैम कॉल्स को लेकर छिड़ी नई बहस
    Truecaller ने भारत के टेलीकॉम रेगुलेटर TRAI की एंटी-स्पैम नीतियों पर सवाल उठाए हैं। कंपनी का कहना है कि 1400 और 1600 नंबर सीरीज पर लागू नियमों के कारण वह कम्युनिटी-रिपोर्टेड स्पैम जानकारी नहीं दिखा पा रही है, जिससे यूजर्स का भरोसा कम हो रहा है। Truecaller के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में इन नंबरों से आने वाली बड़ी संख्या में कॉल्स को यूजर्स ने नजरअंदाज या ब्लॉक किया है। वहीं, रिपोर्ट्स के मुताबिक TRAI कॉलर आईडी ऐप्स पर निगरानी बढ़ाने के लिए अतिरिक्त अधिकार भी चाहता है।
  • Digital Arrest में ₹4 हजार करोड़ से ज्यादा गंवा चुके हैं भारतीय, आप भी भूलकर न करें ये गलतियां
    भारत में Digital Arrest Scam तेजी से बढ़ता साइबर अपराध बन गया है। सरकार के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, 2022 से मई 2026 के बीच इस तरह की ठगी से जुड़े 2.97 लाख से ज्यादा मामले दर्ज हुए और लोगों को 4,057.7 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। ठग खुद को पुलिस, CBI, ED या दूसरी सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर डराते हैं और उनसे पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं। साइबर क्राइम एजेंसियां साफ कर चुकी हैं कि भारत में Digital Arrest जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। ऐसे में किसी भी संदिग्ध कॉल पर सतर्क रहना जरूरी है।
  • ई-रिक्शा के बाद अब ATM हो रहे हैं बंद? मोबाइल ऐप से कंट्रोल करने का वीडियो वायरल
    BAT BMS ऐप विवाद के बाद अब सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में एक व्यक्ति मोबाइल ऐप के जरिए कथित तौर पर ATM मशीन को ऑन और ऑफ करता दिखाई देता है। इस वीडियो ने डिजिटल सिक्योरिटी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, किसी बैंक, ATM ऑपरेटर या सरकारी एजेंसी ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
  • BAT-BMS: ई-रिक्शा रोकने वाले ऐप्स पर सरकार का बड़ा एक्शन, स्टोर से तुरंत हटाने का आदेश
    केंद्र सरकार ने BAT BMS और Epoch Li-ion नाम के दो मोबाइल ऐप्स को Google Play Store और Apple App Store से हटाने का आदेश दिया है। इन बैटरी मैनेजमेंट ऐप्स का गलत इस्तेमाल कर कुछ लोग Bluetooth के जरिए चलते हुए ई-रिक्शा बंद कर रहे थे। MeitY सचिव एस. कृष्णन ने पुष्टि की है कि दोनों ऐप्स को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सरकार का कहना है कि ऐसे संभावित खतरनाक ऐप्स को सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होने से रोकने के लिए आगे भी कदम उठाए जाएंगे।
  • यूजरनेम फीचर को लेकर Telegram और Signal को भी सरकार ने दिया नोटिस 
    मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स Telegram और Signal को इस बारे में नोटिस जारी किए हैं। हाल ही में इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp पर भी सरकार ने उसके यूजरनेम फीचर उपलब्ध कराने के प्रपोजल को लेकर शिकंजा कसा था। इसके साथ ही सरकार ने वॉट्सऐप को इस मुद्दे पर विचार-विमर्श होने तक यह फीचर उपलब्ध नहीं कराने का निर्देश दिया था।
  • WhatsApp ने तोड़ी चुप्पी! Username फीचर पर उठे सवालों का एक-एक कर दिया जवाब
    WhatsApp ने अपने आने वाले Username फीचर को लेकर उठ रही प्राइवेसी और साइबर फ्रॉड की चिंताओं पर पहली बार विस्तार से सफाई दी है। X पर शेयर किए गए पोस्ट में कंपनी ने सात बड़े सवालों के जवाब दिए और कहा कि Username फीचर पूरी तरह ऑप्शनल होगा। कंपनी के मुताबिक, पब्लिक फिगर और सरकारी संस्थाओं के Username पहले से सुरक्षित रखे गए हैं, Username सर्च नहीं किया जा सकेगा और यूजर्स को Username Key जैसी अतिरिक्त सुरक्षा भी मिलेगी। WhatsApp का दावा है कि फीचर लॉन्च से पहले सभी जरूरी सेफ्टी उपाय लागू किए जा रहे हैं।
  • WhatsApp Username फीचर लॉन्च से पहले फंसा! सरकार को क्यों सता रही है बड़ी चिंता?
    WhatsApp इस साल के आखिर तक Username फीचर लॉन्च करने की तैयारी में है, लेकिन इससे पहले भारत सरकार इसके रोलआउट को लेकर कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। ET की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार को चिंता है कि इस फीचर की मदद से फर्जी पहचान (Impersonation) और साइबर फ्रॉड के मामले बढ़ सकते हैं। अगर जरूरत पड़ी तो डिजिटल फ्रॉड रोकने के लिए नया कानून भी लाया जा सकता है। दूसरी ओर, एक्सपर्ट्स का कहना है कि Username फीचर से मोबाइल नंबर शेयर करने की जरूरत कम होगी, लेकिन इससे Name Squatting और फर्जी अकाउंट्स का जोखिम भी बढ़ सकता है।
  • अब WhatsApp खुद बताएगा नंबर भरोसेमंद है या नहीं, आ रहा नया फीचर
    WhatsApp जल्द ही Android और iPhone यूजर्स के लिए नया सिक्योरिटी फीचर रोलआउट कर सकता है। WABetaInfo की रिपोर्ट के अनुसार, अब किसी अनजान नंबर के साथ चैट शुरू करने से पहले यूजर्स को एक वार्निंग स्क्रीन दिखाई जाएगी। इसमें नंबर से जुड़ी जानकारी जैसे उसका रजिस्ट्रेशन देश, कॉन्टैक्ट स्टेटस और कॉमन ग्रुप्स की जानकारी मिल सकती है। इसका मकसद यूजर्स को संभावित स्कैम और फर्जी मैसेज से बचाना है। WhatsApp का यह फीचर यूजर्स को चैट शुरू करने से पहले अतिरिक्त जानकारी देकर बेहतर फैसला लेने में मदद कर सकता है।
  • 'पैसे नहीं दिए तो सब लीक...', Tata Electronics को हैकर्स की धमकी; 630GB डेटा, Apple-Tesla सीक्रेट्स खतरे में?
    Apple और Tesla की सप्लायर Tata Electronics साइबर सिक्योरिटी घटना को लेकर चर्चा में है। कंपनी ने स्वीकार किया है कि कुछ हफ्ते पहले उसके कुछ सिस्टम्स प्रभावित हुए थे। वहीं World Leaks नाम के एक रैनसमवेयर ग्रुप ने दावा किया है कि उसने कंपनी का 630GB से ज्यादा डेटा चुराकर डार्क वेब पर प्रकाशित कर दिया है। साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर्स के अनुसार, कथित लीक में Apple और Tesla से जुड़े दस्तावेज भी शामिल हो सकते हैं। इस घटना के बाद Apple ने जांच शुरू कर दी है। हालांकि, लीक हुए दस्तावेजों की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
  • WhatsApp पर आ रही इस फाइल से रहें सावधान, हैक हो सकता है आपका PC
    WhatsApp यूजर्स को निशाना बनाने वाला एक नया मालवेयर कैंपेन सामने आया है। एक साइबर सिक्योरिटी कंपनी के रिसर्चर्स ने खुलासा किया है कि अटैकर्स WhatsApp Desktop और WhatsApp Web यूजर्स को मालिशियस फाइल्स भेजकर उनके सिस्टम तक एक्सेस हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। यह कैंपेन कई देशों में देखा गया है, जिनमें मलेशिया, ब्राजील, सिंगापुर, ताइवान और वियतनाम शामिल हैं।Kaspersky ग्लोबल रिसर्च एंड एनालेसिस टीम (GReAT) ने जून 2026 में इस कैंपेन का खुलासा किया। रिसर्च के अनुसार, अटैकर पहले से हैक किए गए WhatsApp अकाउंट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन अकाउंट्स से उनके कॉन्टैक्ट्स को मालिशियस VBScript फाइल्स भेजी जाती हैं। चूंकि मैसेज किसी जान-पहचान वाले व्यक्ति के अकाउंट से आता है, इसलिए रिसीवर के फाइल खोलने की संभावना बढ़ जाती है।
  • GTA 6 गेम के चक्कर में खाली हो जाएगा आपका बैंक अकाउंट! फैल रहे हैं नकली इमेल
    GTA 6 की रिलीज से पहले गेमर्स को निशाना बनाकर नए ऑनलाइन स्कैम सामने आए हैं। Cybersecurity कंपनी NordVPN के मुताबिक, कई फर्जी वेबसाइट्स और ईमेल्स GTA 6 Beta Access और Early Access देने का दावा कर रहे हैं। इन स्कैम्स के जरिए साइबर अपराधी यूजर्स की पर्सनल जानकारी, गेमिंग अकाउंट्स और बैंकिंग डिटेल्स चुरा सकते हैं। कुछ मामलों में फर्जी डाउनलोड फाइल्स में मालवेयर भी पाया गया है, जो हमलावरों को डिवाइस तक रिमोट एक्सेस दे सकता है। फिलहाल Rockstar Games ने किसी भी आधिकारिक GTA 6 Beta Program की घोषणा नहीं की है।
  • रोबोट पुलिसवाले की गई नौकरी, डिपार्टमेंट ने 1 साल से पहले ही दिखा दिया बाहर का रास्ता
    अमेरिका के ओहायो राज्य के डबलिन शहर ने "DubBot" नाम के रोबोट पुलिसवाले को समय से पहले रिटायर कर दिया है। यह रोबोट जुलाई 2025 से एक पार्किंग गैरेज में गश्त कर रहा था और इसका मकसद अपराध रोकने, पुलिस ऑपरेशन्स को सपोर्ट करने और सार्वजनिक सुरक्षा को बेहतर बनाना था। हालांकि शहर प्रशासन ने पाया कि यह प्रोजेक्ट उनकी परिचालन जरूरतों को पूरा नहीं कर रहा है, जिसके बाद इसे सेवा से हटा दिया गया। DubBot को बनाने वाली कंपनी Knightscope को वापस भेज दिया गया है। शहर ने इस प्रोजेक्ट पर पहले साल में 1,28,080 डॉलर खर्च किए थे।

Secure - वीडियो

विज्ञापन

Follow Us
विज्ञापन
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.
ट्रेंडिंग प्रॉडक्ट्स »
लेटेस्ट टेक ख़बरें »