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News Research - ख़बरें

  • चांद से टकराने वाला है विशाल एस्टेरॉयड? NASA की नई रिपोर्ट ने साफ किया पूरा मामला
    NASA के James Webb Space Telescope ने एस्टेरॉयड 2024 YR4 को लेकर नई ऑब्जर्वेशन की हैं, जिनसे वैज्ञानिकों ने इसकी कक्षा को पहले से ज्यादा सटीक तरीके से मापा है। पहले आशंका जताई जा रही थी कि यह एस्टेरॉयड 2032 में चांद से टकरा सकता है, लेकिन अब नई गणनाओं के बाद यह संभावना लगभग खत्म हो गई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह एस्टेरॉयड बेहद धुंधला है और मौजूदा समय में इसे ट्रैक करना आसान नहीं है। Webb Telescope की संवेदनशीलता की वजह से वैज्ञानिक इसकी स्थिति को बेहतर तरीके से माप पाए, जिससे भविष्य में इसकी सटीक स्थिति का अनुमान लगाना संभव हुआ।
  • India AI Impact Summit 2026: भारत में इस जगह बनेगी पहली 'AI सिटी'
    India AI Impact Summit के दौरान Bharat1.AI ने बेंगलुरु में Humanity First AI City बनाने का विजन पेश किया है। इस पहल का पहला चरण B1 AI Superpark होगा, जो सरजापुर में 5 लाख वर्ग फुट के कैंपस के रूप में विकसित किया जाएगा। कंपनी के मुताबिक यहां 10,000 से ज्यादा AI रिसर्चर और इनोवेटर के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। फोकस Agentic और Physical AI सिस्टम्स को रियल वर्ल्ड कंडीशंस में टेस्ट करने पर रहेगा। इस परियोजना को अगले 36 महीनों में सिटी स्केल AI टेस्टबेड के रूप में विस्तार देने की योजना है।
  • सस्ते मोबाइल भूल जाओ! नए स्मार्टफोन की औसत कीमत Rs 37 हजार के पार
    स्मार्टफोन की कीमतों में बड़ी बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है। 2025 के अंत में स्मार्टफोन मार्केट ने कीमतों के मामले में नई ऊंचाई को छू लिया है। अब एक नए स्मार्टफोन की कीमत 400 डॉलर के औसत प्राइस को पार कर गई है। यानी एक नए स्मार्टफोन की औसत कीमत अब लगभग 37 हजार रुपये पहुंच गई है।
  • धरती में कहां से आया था पानी? अब चांद की मिट्टी से निकली बिल्कुल नई कहानी
    NASA की एक नई स्टडी ने धरती पर पानी की उत्पत्ति को लेकर अहम जानकारी दी है। अपोलो मिशनों के दौरान चांद से लाए गए सैंपल्स के विश्लेषण में वैज्ञानिकों को संकेत मिले हैं कि उल्कापिंडों ने धरती पर सिर्फ सीमित मात्रा में पानी पहुंचाया था। रिसर्च के मुताबिक, पृथ्वी का अधिकांश पानी उसके बनने के शुरुआती दौर में मौजूद मटेरियल से ही आया था। इस स्टडी में ट्रिपल ऑक्सीजन आइसोटोप्स का इस्तेमाल किया गया, जिससे अरबों साल पुराने इम्पैक्ट्स का रिकॉर्ड समझना संभव हुआ है।
  • दुनिया का सबसे छोटा रोबोट तैयार, साइज रेत जैसा लेकिन सोचने और चलने की ताकत
    University of Pennsylvania और University of Michigan के वैज्ञानिकों ने दुनिया के सबसे छोटे पूरी तरह प्रोग्रामेबल और ऑटोनॉमस रोबोट तैयार किए हैं। ये माइक्रो रोबोट रेत के एक दाने से भी छोटे हैं और लाइट की मदद से चलते व प्रोग्राम होते हैं। रिसर्च के मुताबिक, ये रोबोट अपने आसपास के माहौल को सेंस कर सकते हैं और ग्रुप में मिलकर भी काम कर सकते हैं। Science Robotics और PNAS में प्रकाशित स्टडीज़ के अनुसार, इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भविष्य में मेडिकल ट्रीटमेंट, सेल-लेवल हेल्थ मॉनिटरिंग और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।
  • 10 दिन बिस्तर पर लेटे रहने के मिलेंगे 4.75 लाख रुपये! यह कंपनी दे रही मौका
    यूरोप की स्पेस एजेंसी 10 दिनों के एक्सपेरिमेंट के लिए भागीदारों को 4.75 लाख रुपये देने का दावा कर रही है। भागीदारों से कोई काम नहीं करवाया जाएगा बल्कि उन्हें बस एक खास तरह के बिस्तर के अंदर लेटे रहना होगा। कंपनी अपने विवाल्डी (Vivaldi) एक्सपेरिमेंट का तीसरा और आखिरी कंपैन आयोजित करने जा रही है। यह फ्रांस के टूलूस के मेडेस स्पेस क्लिनिक में होगा।
  • वैज्ञानिकों का काम खत्‍म! AI भी कर सकता है सौर तूफान की भविष्‍यवाणी
    एक नई स्‍टडी में कहा गया है कि AI, पिछले साल मई में पृथ्वी पर आए शक्तिशाली सौर तूफान (solar storm) की भविष्यवाणी कर सकता था। वह तूफान सूर्य पर एक्टिव AR13664 नाम के सनस्‍पॉट से निकला था। जेनोआ यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स का मानना है कि ऐतिहासिक सौर घटनाओं पर एआई को ट्रेनिंग दी जाए तो वह कोरोनल मास इजेक्शन (CME) से पहले के पैटर्नों की पहचान कर सकता है।
  • पृथ्‍वी से 1.5 लाख किलोमीटर दूर से आई चिड़‍ियों के ‘चहचहाने’ जैसी आवाज! जानें पूरा मामला
    वैज्ञानिक वर्षों से ऐसी चहकती (chirping) तरंगों के बारे में जानते हैं, जो खतरनाक रेडिएशन से जुड़ी हैं। ये तरंगें इंसानों और सैटेलाइट्स दोनों को प्रभावित कर सकती हैं। अब खगोलविदों की एक इंटरनेशनल टीम ने अंतरिक्ष के एक नए क्षेत्र में इन तरंगों का पता लगाया है। इससे सवाल पैदा हुआ है कि आखिर इन तरंगों की उत्‍पत्‍त‍ि कहां से होती है। ये तरंगें अंतरिक्ष में मौजूद सबसे पावरफुल नेचुरल इलेक्‍ट्रोमैग्‍नेटिक रेडिएशन में से एक हैं।
  • क्‍या हमारी दुनिया से पहले भी पृथ्‍वी पर कोई दुनिया थी जो डूब गई? वैज्ञानिकों को मिला सबूत
    जियोफ‍िजिसिस्‍ट की एक टीम ने पृथ्वी के आंतरिक भाग को लेकर नई जानकारी जुटाई है। वैज्ञानिकों ने अंतरिक भाग की ट्रेडिशनल प्‍लेट बाउंड्री से दूर डूबी हुई टेक्टोनिक प्लेटों के अवशेषों का पता लगाया है। यह रिसर्च ETH ज्यूरिख और कैलिफोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्‍नॉलजी की एक टीम ने की है। उन्‍होंने पृथ्‍वी के नीचे ऐसे टेक्टोनिक प्लेटों जैसे क्षेत्र का पता लगाया है, जो महासागरों के नीचे हैं।
  • पानी ‘छुपाकर’ बैठा है यूरेनस का चंद्रमा मिरांडा! वैज्ञानिकों ने कर दी बड़ी खोज
    वैज्ञानिकों ने माना है कि यूरेनस के चंद्रमा मिरांडा की बर्फीली सतह के नीचे कोई महासागर छिपा हो सकता है। रिसर्चर्स ने वॉयजर 2 स्‍पेसक्राफ्ट से ली गई इमेजेस पर स्‍टडी के बाद यह सुझाव दिया है। खास यह है कि वॉयजर 2 स्‍पेसक्राफ्ट साल 1986 में मिरांडा के पास से गुजरा था। तब उसने इसके दक्षिणी गोलार्ध की तस्वीरें ली थीं।
  • अंतरिक्ष से पानी में लैंड करेंगे भारतीय एस्‍ट्रोनॉट तो क्‍या होगा? इसरो ने की टेस्टिंग, देखें फोटोज
    भारत अपने गगनयान मिशन को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहा है। बीते सप्‍ताह एक नकली गगनयान क्रू मॉड्यूल को पानी में डालकर उसे उठाया गया। यह एक प्रकार की एक्‍सरसाइज थी यह देखने के लिए कि जब एस्‍ट्रोनॉट्स अंतरिक्ष से पानी में लैंड करेंगे, तब किस प्रकार की तैयारियां चाहिए होंगी। इसरो ने इंडियन नेवी के साथ मिलकर आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम के तट पर बंगाल की खाड़ी में यह एक्‍सरसाइज की।
  • चीनी रोवर ने मंगल ग्रह पर खोजे 3.42 अरब साल पुराने महासागर के सबूत
    कई शोधों में इस बात की तस्‍दीक हुई है कि मंगल ग्रह पर कभी महासागर हुआ करता था। नासा समेत यूरोपीय स्‍पेस एजेंसी ने इसके सबूत खोजे हैं। अब चीन के झुरोंग रोवर की मदद से वैज्ञानिकों ने नए सबूत जुटाए हैं। इनसे पता चलता है कि अरबों साल पहले मंगल ग्रह पर महासागर था। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, झुरोंग रोवर 2021 में मंगल के उत्तरी निचले इलाकों में उतरा था। उसके स्‍पेसक्राफ्ट ने ग्रह की परिक्रमा की थी।
  • क्‍या है ToxicPanda? 1500 एंड्रॉयड स्‍मार्टफोन्‍स में मिला, 16 बैंकों को किया टार्गेट
    टॉक्सिकपांडा (ToxicPanda) नाम का एक संभावित बैंकिंग ट्रोजन अपने डेवलपमेंट के शुरुआती स्‍टेज में है। यूरोप और लैटिन अमेरिका के रिसर्चर्स ने इसका पता लगाया है। टॉक्सिकपांडा की मदद से हैक किए गए स्‍मार्टफोन्‍स पर मौजूद अकाउंट्स को रिमोट यानी दूर से कंट्रोल किया जाता है। टॉक्सिकपांडा को कथित तौर पर 1,500 से ज्‍यादा डिवाइसेज में पाया गया था। हमलावरों ने 16 बैंकिंग संस्थानों के यूजर्स को टार्गेट किया था।
  • स्‍मार्टफोन्‍स शिपमेंट में इस ब्रैंड ने झंडे गाड़े, Vivo, Xiaomi, Oppo भी रह गए पीछे
    भारत में स्मार्टफोन शिपमेंट में साल-दर-साल (YoY) 3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। काउंटरपॉइंट की एक नई रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है। 2024 में जुलाई से सितंबर के बीच यह बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 23 फीसदी मार्केट शेयर के के साथ स्मार्टफोन मार्केट में सैमसंग (Samsung) टॉप पोजिशन पर है। दूसरे नंबर पर ऐपल (Apple) और तीसरे पर वीवो (Vivo) रही।
  • नकली नोट नहीं बना पाएंगे जालसाज! वैज्ञानिकों ने बनाई अनोखी स्‍याही
    भारतीय रिसर्चर्स ने चमकदार नैनो मटीरियल की मदद से एडवांस्‍ड सिक्‍योरिटी फीचर्स वाली एक अनोखी स्याही यानी इंक डेवलप की है। यह इंक करेंसी, डॉक्‍युमेंट्स, ब्रांडेड आइटम्‍स और दवाइयों की जालसाजी को रोकने में मददगार हो सकती है। नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनएसटी) ने यह खोज की है। इसे नकल-प्रूफ विभिन्न चीजों पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें करेंसी, डॉक्‍युमेंट्स, दवाईयां और ब्रांडेड प्रोडक्‍ट शामिल हैं।

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