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News Research - ख़बरें

  • 3.2 करोड़ मच्छरों की फौज तैयार कर रहा Google, खुले में छोड़ने के लिए मांगी मंजूरी
    Google अमेरिका में एक अनोखे प्रयोग की तैयारी कर रहा है। कंपनी ने फ्लोरिडा और कैलिफोर्निया में अगले दो वर्षों के दौरान 3.2 करोड़ लैब में तैयार किए गए नर मच्छरों को छोड़ने की अनुमति मांगी है। यह प्रोजेक्ट Debug पहल का हिस्सा है, जिस पर Google 2014 से काम कर रहा है। योजना के तहत मच्छरों को Wolbachia pipientis नाम के बैक्टीरिया से संक्रमित किया जाएगा, जिससे उनके प्रजनन पर असर पड़ सकता है। कंपनी का मानना है कि इससे समय के साथ मच्छरों की आबादी कम करने और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
  • AI से काम आसान, लेकिन दिमाग को लग रही “शॉर्टकट” की आदत! स्टडी में बड़ा खुलासा
    एक नई स्टडी में पाया गया है कि सिर्फ 10 मिनट तक AI का इस्तेमाल करने से लोगों की सोचने की क्षमता और किसी समस्या पर टिके रहने की आदत प्रभावित हो सकती है। रिसर्च में 1,200 से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया, जहां AI की मदद से उनकी परफॉर्मेंस बेहतर रही, लेकिन बाद में बिना AI के उनकी क्षमता कम हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, AI आसान जवाब देता है, जिससे दिमाग की मेहनत कम होती है और “पर्सिस्टेंस” यानी धैर्य घट सकता है। यह ट्रेंड लंबे समय में सीखने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
  • क्या AI आपको गलत बातों पर यकीन दिला रहा है? ये नई रिसर्च आपके होश उड़ा देगी!
    एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि AI चैटबॉट्स का “sycophancy” व्यवहार यूजर्स को गलत दिशा में ले जा सकता है। arXiv पर प्रकाशित इस स्टडी के मुताबिक जब चैटबॉट्स यूजर की हर बात से सहमत होते हैं, तो एक “delusional spiraling” शुरू हो सकता है, जिसमें यूजर का भरोसा गलत जानकारी पर बढ़ता जाता है। यह समस्या सिर्फ कमजोर यूजर्स तक सीमित नहीं है, बल्कि तार्किक सोच रखने वाले लोग भी इसका शिकार हो सकते हैं। रिसर्च के अनुसार मौजूदा सेफ्टी उपाय भी इस जोखिम को पूरी तरह खत्म नहीं कर पा रहे हैं।
  • लंबे नाखून से फोन नहीं चलता? स्टूडेंट ने बनाई अनोखी नेल पॉलिश, ऐसे करेगी काम
    लंबे नाखून रखने वाले यूजर्स के लिए स्मार्टफोन चलाना अक्सर मुश्किल होता है, लेकिन अब इस समस्या का समाधान खोजा जा रहा है। ACS में पेश की जाने वाली एक स्टडी के मुताबिक वैज्ञानिक एक ऐसी clear नेल पॉलिश पर काम कर रहे हैं, जो नाखूनों को टचस्क्रीन के साथ compatible बना सकती है। यह पॉलिश हल्की conductivity पैदा कर स्क्रीन को टच रजिस्टर करने में मदद करती है। फिलहाल यह टेक्नोलॉजी शुरुआती स्टेज में है और इसे ज्यादा सुरक्षित और लंबे समय तक असरदार बनाने के लिए और रिसर्च जारी है।
  • NASA के चांद मिशन में एस्ट्रोनॉट्स के हाथ में होगा खास बैंड, जानें कैसे करेगा काम
    NASA का Artemis II मिशन 2 अप्रैल 2026 को लॉन्च होने वाला है, जो Apollo के बाद पहला crewed deep-space मिशन होगा। इस मिशन में चार astronauts चांद के आसपास यात्रा करेंगे। खास बात यह है कि इस बार “Archer” स्टडी के तहत astronauts रिस्टबैंड पहनेंगे, जो उनकी नींद, स्ट्रेस, मूवमेंट और टीमवर्क से जुड़ा डेटा रिकॉर्ड करेंगे। कंपनी के मुताबिक यह रिसर्च भविष्य के Moon और Mars मिशन के लिए अहम साबित हो सकती है, क्योंकि इससे डीप स्पेस में इंसानों के व्यवहार और हेल्थ पर पड़ने वाले असर को समझने में मदद मिलेगी।
  • चांद से टकराने वाला है विशाल एस्टेरॉयड? NASA की नई रिपोर्ट ने साफ किया पूरा मामला
    NASA के James Webb Space Telescope ने एस्टेरॉयड 2024 YR4 को लेकर नई ऑब्जर्वेशन की हैं, जिनसे वैज्ञानिकों ने इसकी कक्षा को पहले से ज्यादा सटीक तरीके से मापा है। पहले आशंका जताई जा रही थी कि यह एस्टेरॉयड 2032 में चांद से टकरा सकता है, लेकिन अब नई गणनाओं के बाद यह संभावना लगभग खत्म हो गई है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह एस्टेरॉयड बेहद धुंधला है और मौजूदा समय में इसे ट्रैक करना आसान नहीं है। Webb Telescope की संवेदनशीलता की वजह से वैज्ञानिक इसकी स्थिति को बेहतर तरीके से माप पाए, जिससे भविष्य में इसकी सटीक स्थिति का अनुमान लगाना संभव हुआ।
  • India AI Impact Summit 2026: भारत में इस जगह बनेगी पहली 'AI सिटी'
    India AI Impact Summit के दौरान Bharat1.AI ने बेंगलुरु में Humanity First AI City बनाने का विजन पेश किया है। इस पहल का पहला चरण B1 AI Superpark होगा, जो सरजापुर में 5 लाख वर्ग फुट के कैंपस के रूप में विकसित किया जाएगा। कंपनी के मुताबिक यहां 10,000 से ज्यादा AI रिसर्चर और इनोवेटर के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। फोकस Agentic और Physical AI सिस्टम्स को रियल वर्ल्ड कंडीशंस में टेस्ट करने पर रहेगा। इस परियोजना को अगले 36 महीनों में सिटी स्केल AI टेस्टबेड के रूप में विस्तार देने की योजना है।
  • सस्ते मोबाइल भूल जाओ! नए स्मार्टफोन की औसत कीमत Rs 37 हजार के पार
    स्मार्टफोन की कीमतों में बड़ी बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है। 2025 के अंत में स्मार्टफोन मार्केट ने कीमतों के मामले में नई ऊंचाई को छू लिया है। अब एक नए स्मार्टफोन की कीमत 400 डॉलर के औसत प्राइस को पार कर गई है। यानी एक नए स्मार्टफोन की औसत कीमत अब लगभग 37 हजार रुपये पहुंच गई है।
  • धरती में कहां से आया था पानी? अब चांद की मिट्टी से निकली बिल्कुल नई कहानी
    NASA की एक नई स्टडी ने धरती पर पानी की उत्पत्ति को लेकर अहम जानकारी दी है। अपोलो मिशनों के दौरान चांद से लाए गए सैंपल्स के विश्लेषण में वैज्ञानिकों को संकेत मिले हैं कि उल्कापिंडों ने धरती पर सिर्फ सीमित मात्रा में पानी पहुंचाया था। रिसर्च के मुताबिक, पृथ्वी का अधिकांश पानी उसके बनने के शुरुआती दौर में मौजूद मटेरियल से ही आया था। इस स्टडी में ट्रिपल ऑक्सीजन आइसोटोप्स का इस्तेमाल किया गया, जिससे अरबों साल पुराने इम्पैक्ट्स का रिकॉर्ड समझना संभव हुआ है।
  • दुनिया का सबसे छोटा रोबोट तैयार, साइज रेत जैसा लेकिन सोचने और चलने की ताकत
    University of Pennsylvania और University of Michigan के वैज्ञानिकों ने दुनिया के सबसे छोटे पूरी तरह प्रोग्रामेबल और ऑटोनॉमस रोबोट तैयार किए हैं। ये माइक्रो रोबोट रेत के एक दाने से भी छोटे हैं और लाइट की मदद से चलते व प्रोग्राम होते हैं। रिसर्च के मुताबिक, ये रोबोट अपने आसपास के माहौल को सेंस कर सकते हैं और ग्रुप में मिलकर भी काम कर सकते हैं। Science Robotics और PNAS में प्रकाशित स्टडीज़ के अनुसार, इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भविष्य में मेडिकल ट्रीटमेंट, सेल-लेवल हेल्थ मॉनिटरिंग और प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।
  • 10 दिन बिस्तर पर लेटे रहने के मिलेंगे 4.75 लाख रुपये! यह कंपनी दे रही मौका
    यूरोप की स्पेस एजेंसी 10 दिनों के एक्सपेरिमेंट के लिए भागीदारों को 4.75 लाख रुपये देने का दावा कर रही है। भागीदारों से कोई काम नहीं करवाया जाएगा बल्कि उन्हें बस एक खास तरह के बिस्तर के अंदर लेटे रहना होगा। कंपनी अपने विवाल्डी (Vivaldi) एक्सपेरिमेंट का तीसरा और आखिरी कंपैन आयोजित करने जा रही है। यह फ्रांस के टूलूस के मेडेस स्पेस क्लिनिक में होगा।
  • वैज्ञानिकों का काम खत्‍म! AI भी कर सकता है सौर तूफान की भविष्‍यवाणी
    एक नई स्‍टडी में कहा गया है कि AI, पिछले साल मई में पृथ्वी पर आए शक्तिशाली सौर तूफान (solar storm) की भविष्यवाणी कर सकता था। वह तूफान सूर्य पर एक्टिव AR13664 नाम के सनस्‍पॉट से निकला था। जेनोआ यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स का मानना है कि ऐतिहासिक सौर घटनाओं पर एआई को ट्रेनिंग दी जाए तो वह कोरोनल मास इजेक्शन (CME) से पहले के पैटर्नों की पहचान कर सकता है।
  • पृथ्‍वी से 1.5 लाख किलोमीटर दूर से आई चिड़‍ियों के ‘चहचहाने’ जैसी आवाज! जानें पूरा मामला
    वैज्ञानिक वर्षों से ऐसी चहकती (chirping) तरंगों के बारे में जानते हैं, जो खतरनाक रेडिएशन से जुड़ी हैं। ये तरंगें इंसानों और सैटेलाइट्स दोनों को प्रभावित कर सकती हैं। अब खगोलविदों की एक इंटरनेशनल टीम ने अंतरिक्ष के एक नए क्षेत्र में इन तरंगों का पता लगाया है। इससे सवाल पैदा हुआ है कि आखिर इन तरंगों की उत्‍पत्‍त‍ि कहां से होती है। ये तरंगें अंतरिक्ष में मौजूद सबसे पावरफुल नेचुरल इलेक्‍ट्रोमैग्‍नेटिक रेडिएशन में से एक हैं।
  • क्‍या हमारी दुनिया से पहले भी पृथ्‍वी पर कोई दुनिया थी जो डूब गई? वैज्ञानिकों को मिला सबूत
    जियोफ‍िजिसिस्‍ट की एक टीम ने पृथ्वी के आंतरिक भाग को लेकर नई जानकारी जुटाई है। वैज्ञानिकों ने अंतरिक भाग की ट्रेडिशनल प्‍लेट बाउंड्री से दूर डूबी हुई टेक्टोनिक प्लेटों के अवशेषों का पता लगाया है। यह रिसर्च ETH ज्यूरिख और कैलिफोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्‍नॉलजी की एक टीम ने की है। उन्‍होंने पृथ्‍वी के नीचे ऐसे टेक्टोनिक प्लेटों जैसे क्षेत्र का पता लगाया है, जो महासागरों के नीचे हैं।
  • पानी ‘छुपाकर’ बैठा है यूरेनस का चंद्रमा मिरांडा! वैज्ञानिकों ने कर दी बड़ी खोज
    वैज्ञानिकों ने माना है कि यूरेनस के चंद्रमा मिरांडा की बर्फीली सतह के नीचे कोई महासागर छिपा हो सकता है। रिसर्चर्स ने वॉयजर 2 स्‍पेसक्राफ्ट से ली गई इमेजेस पर स्‍टडी के बाद यह सुझाव दिया है। खास यह है कि वॉयजर 2 स्‍पेसक्राफ्ट साल 1986 में मिरांडा के पास से गुजरा था। तब उसने इसके दक्षिणी गोलार्ध की तस्वीरें ली थीं।

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