Cyber Security India

Cyber Security India - ख़बरें

  • Spam कॉल्स और मैसेज पर कसने वाली है लगाम! TRAI का Meta और Google के साथ बड़ा प्लान
    रिपोर्ट के मुताबिक, TRAI Meta और Google के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि WhatsApp और Google के इनबिल्ट फोन डायलर पर दर्ज स्पैम शिकायतों को टेलीकॉम ऑपरेटर्स के सिस्टम और DND पोर्टल से जोड़ा जा सके। प्रस्तावित सिस्टम के जरिए स्पैम कॉल और मैसेज भेजने वाले नंबरों की पहचान तेजी से हो सकेगी और उनके खिलाफ जल्दी कार्रवाई की जा सकेगी। फिलहाल इस योजना पर चर्चा जारी है और Meta, Google या TRAI की ओर से इसके लागू होने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
  • TRAI से क्यों भिड़ गया Truecaller? स्पैम कॉल्स को लेकर छिड़ी नई बहस
    Truecaller ने भारत के टेलीकॉम रेगुलेटर TRAI की एंटी-स्पैम नीतियों पर सवाल उठाए हैं। कंपनी का कहना है कि 1400 और 1600 नंबर सीरीज पर लागू नियमों के कारण वह कम्युनिटी-रिपोर्टेड स्पैम जानकारी नहीं दिखा पा रही है, जिससे यूजर्स का भरोसा कम हो रहा है। Truecaller के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में इन नंबरों से आने वाली बड़ी संख्या में कॉल्स को यूजर्स ने नजरअंदाज या ब्लॉक किया है। वहीं, रिपोर्ट्स के मुताबिक TRAI कॉलर आईडी ऐप्स पर निगरानी बढ़ाने के लिए अतिरिक्त अधिकार भी चाहता है।
  • Digital Arrest में ₹4 हजार करोड़ से ज्यादा गंवा चुके हैं भारतीय, आप भी भूलकर न करें ये गलतियां
    भारत में Digital Arrest Scam तेजी से बढ़ता साइबर अपराध बन गया है। सरकार के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, 2022 से मई 2026 के बीच इस तरह की ठगी से जुड़े 2.97 लाख से ज्यादा मामले दर्ज हुए और लोगों को 4,057.7 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। ठग खुद को पुलिस, CBI, ED या दूसरी सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल पर डराते हैं और उनसे पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं। साइबर क्राइम एजेंसियां साफ कर चुकी हैं कि भारत में Digital Arrest जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। ऐसे में किसी भी संदिग्ध कॉल पर सतर्क रहना जरूरी है।
  • ई-रिक्शा के बाद अब ATM हो रहे हैं बंद? मोबाइल ऐप से कंट्रोल करने का वीडियो वायरल
    BAT BMS ऐप विवाद के बाद अब सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में एक व्यक्ति मोबाइल ऐप के जरिए कथित तौर पर ATM मशीन को ऑन और ऑफ करता दिखाई देता है। इस वीडियो ने डिजिटल सिक्योरिटी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, किसी बैंक, ATM ऑपरेटर या सरकारी एजेंसी ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
  • WhatsApp Username फीचर लॉन्च से पहले फंसा! सरकार को क्यों सता रही है बड़ी चिंता?
    WhatsApp इस साल के आखिर तक Username फीचर लॉन्च करने की तैयारी में है, लेकिन इससे पहले भारत सरकार इसके रोलआउट को लेकर कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। ET की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार को चिंता है कि इस फीचर की मदद से फर्जी पहचान (Impersonation) और साइबर फ्रॉड के मामले बढ़ सकते हैं। अगर जरूरत पड़ी तो डिजिटल फ्रॉड रोकने के लिए नया कानून भी लाया जा सकता है। दूसरी ओर, एक्सपर्ट्स का कहना है कि Username फीचर से मोबाइल नंबर शेयर करने की जरूरत कम होगी, लेकिन इससे Name Squatting और फर्जी अकाउंट्स का जोखिम भी बढ़ सकता है।
  • सरकार दे रही फ्री Cyber Security Course, सिर्फ 2.5 घंटे में मिलेगा सर्टिफिकेट, ऐसे करें अप्लाई
    भारत सरकार के Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने फ्री ऑनलाइन Cyber Security Course शुरू किया है। यह कोर्स गृह मंत्रालय के तहत तैयार किया गया है और इसका मकसद लोगों को साइबर फ्रॉड से बचने के तरीके सिखाना है। कोर्स में फेक लिंक, स्कैम कॉल्स, डिजिटल पेमेंट सुरक्षा और सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल जैसे विषय शामिल हैं। इसे करीब 2.5 घंटे में पूरा किया जा सकता है और सफल प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा।
  • हर UPI यूजर को पता होनी चाहिए ये 7 सिक्योरिटी टिप्स, नहीं तो एक गलती पड़ेगी भारी!
    UPI पेमेंट आज के समय में सबसे आसान और तेज तरीका बन चुका है, लेकिन इसके साथ फ्रॉड का खतरा भी बढ़ा है। कई यूजर्स छोटी-छोटी गलतियों के कारण अपने पैसे गंवा देते हैं। ऐसे में UPI ऐप में मौजूद कुछ जरूरी सेटिंग्स को ऑन रखना बेहद जरूरी है, जैसे App Lock, ट्रांजैक्शन अलर्ट और डेली लिमिट सेट करना। इसके अलावा अनजान रिक्वेस्ट और फर्जी ऐप्स से बचना भी जरूरी है। सही सावधानी और सेटिंग्स के जरिए आप अपने अकाउंट को सुरक्षित रख सकते हैं और फ्रॉड के रिस्क को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
  • Microsoft Edge चलाते हैं तो कभी भी हैक हो सकता है लैपटॉप-PC, तुरंत करें ये काम
    CERT-In ने Microsoft Edge के लिए हाई सीवेरिटी साइबर सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है। एडवाइजरी CIVN-2026-0092 के अनुसार 144.0.3719.115 से पुराने वर्जन में heap buffer overflow से जुड़ी गंभीर खामी पाई गई है। इस कमजोरी का फायदा उठाकर रिमोट अटैकर्स विशेष रूप से तैयार वेब पेज के जरिए सिस्टम पर मनमाना कोड चला सकते हैं। एजेंसी ने सभी यूजर्स व ऑर्गेनाइजेशंस को तुरंत लेटेस्ट सिक्योरिटी अपडेट इंस्टॉल करने की सलाह दी है, ताकि अनऑथोराइज्ड एक्सेस और डेटा लीक से बचा जा सके।
  • Google Chrome चलाते हैं तो ये खबर आपके लिए! हैक हो सकता है सिस्टम, तुरंत करें ये काम
    सरकार की साइबर एजेंसी CERT-In ने Google Chrome यूजर्स के लिए हाई सीवेरिटी चेतावनी जारी की है। एडवाइजरी में बताया गया है कि Chrome के पुराने वर्जन में गंभीर “Use After Free” खामी पाई गई है, जिससे हैकर्स टारगेट सिस्टम पर मनमाना कोड चला सकते हैं। यदि ब्राउजर Linux पर 144.0.7559.75 या Windows/Mac पर 145.0.7632.75/76 से पुराना है, तो जोखिम बढ़ सकता है। एजेंसी ने यूजर्स को तुरंत लेटेस्ट वर्जन में अपडेट करने की सलाह दी है, ताकि डेटा चोरी और मालवेयर हमलों से बचा जा सके।
  • OTP ठगी रोकने के लिए Airtel का AI एक्शन, कॉल के वक्त तुरंत मिलेगा फ्रॉड वार्निंग अलर्ट!
    Airtel ने OTP आधारित बैंकिंग फ्रॉड से निपटने के लिए नया AI Fraud Alert सिस्टम पेश किया है। कंपनी के मुताबिक यह फीचर नेटवर्क लेवल पर काम करता है और संभावित जोखिम वाली कॉल के दौरान ग्राहक को रियल टाइम अलर्ट देता है। अगर बैंकिंग ट्रांजैक्शन से जुड़ा OTP संदिग्ध स्थिति में डिटेक्ट होता है, तो यूजर को चेतावनी दी जाएगी। Airtel का दावा है कि इस AI आधारित समाधान को व्यापक ट्रायल में परखा गया है। फिलहाल यह फीचर हरियाणा में लाइव है और अगले दो हफ्तों में देशभर में रोलआउट किया जाएगा।
  • Firefox और Thunderbird यूजर्स सावधाव! भारत सरकार ने जारी किया अलर्ट, तुरंत करें ये काम
    भारत सरकार ने Mozilla Firefox और Thunderbird यूजर्स के लिए एक अहम साइबर सिक्योरिटी चेतावनी जारी की है। CERT-In के मुताबिक, इन प्लेटफॉर्म्स में कई हाई-सीवेरिटी कमजोरियां पाई गई हैं, जिनका फायदा उठाकर साइबर हमलावर यूजर्स के डेटा और प्राइवेसी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जनवरी 2026 की सिक्योरिटी बुलेटिन में कहा गया है कि खास वेब कंटेंट या लिंक के जरिए इन खामियों को रिमोट तरीके से एक्सप्लॉइट किया जा सकता है। सरकार और Mozilla ने यूजर्स को तुरंत लेटेस्ट वर्जन पर अपडेट करने की सलाह दी है।
  • WinGo साइबर फ्रॉड केस ने खोली आंखें, कहीं आप भी न बन जाएं स्कैम का हिस्सा, इन बातों का रखें ध्यान
    WinGo ऐप से जुड़े साइबर फ्रॉड के खुलासे के बाद पुलिस और सरकार ने आम यूजर्स को सतर्क रहने की सलाह दी है। जांच में सामने आया है कि आसान कमाई का दावा करने वाले ऐप्स यूजर्स के मोबाइल नंबर और SMS एक्सेस का दुरुपयोग कर साइबर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे मामलों में अनजाने यूजर्स भी स्कैम नेटवर्क का हिस्सा बन सकते हैं। सरकार ने संदिग्ध ऐप्स से दूर रहने, अनावश्यक परमिशन न देने और किसी भी साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।
  • एक टच में डिजिटल अरेस्ट, स्कैम से बचाएगा 'Kill Switch', UPI और बैंक ऐप्स में मिलेगा इमरजेंसी बटन
    डिजिटल अरेस्ट स्कैम्स के बढ़ते मामलों के बीच केंद्र सरकार एक बड़े तकनीकी समाधान पर काम कर रही है। गृह मंत्रालय की ओर से गठित हाई-लेवल कमेटी UPI और बैंकिंग ऐप्स में एक ‘किल स्विच’ फीचर जोड़ने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, यह इमरजेंसी बटन किसी संभावित ऑनलाइन ठगी के दौरान यूजर को तुरंत सभी बैंक ट्रांजैक्शन्स रोकने की सुविधा देगा। इस कदम का मकसद उन मामलों को रोकना है, जहां स्कैमर्स वीडियो कॉल और फर्जी पुलिस पहचान के जरिए लोगों से पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।
  • तुरंत फोन अपडेट नहीं किया तो खतरा! भारतीय साइबर सिक्योरिटी एजेंसी की चेतावनी
    CERT-In ने Android यूजर्स के लिए एक अहम सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है। यह चेतावनी Google Android में सामने आए क्रिटिकल Dolby से जुड़े बग के बाद आई है। CERT-In के मुताबिक, यह खामी Android Dolby UDC वर्जन 4.5 से 4.13 तक को प्रभावित करती है और इससे रिमोट कोड एक्जीक्यूशन का खतरा बन सकता है। इस बग को लेकर Google पहले ही जनवरी 2026 का Android Security Bulletin जारी कर चुका है। अब CERT-In ने यूजर्स और संगठनों से बिना देरी किए लेटेस्ट सिक्योरिटी पैच इंस्टॉल करने की अपील की है।
  • सरकार मांग रही है मोबाइल का सोर्स कोड? Apple-Samsung ने जताई नाराजगी
    भारत सरकार स्मार्टफोन सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए नए नियमों पर विचार कर रही है, जिसके तहत Apple और Samsung जैसी कंपनियों से मोबाइल सॉफ्टवेयर का सोर्स कोड एक्सेस मांगा जा सकता है। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार करीब 83 नए सिक्योरिटी स्टैंडर्ड लागू करने की तैयारी में है। इनमें बड़े सॉफ्टवेयर अपडेट की जानकारी पहले देने और कुछ सिस्टम लेवल बदलाव भी शामिल हैं। टेक कंपनियों का कहना है कि ऐसा करने से उनकी प्रॉप्रायटरी टेक्नोलॉजी और यूजर प्राइवेसी को खतरा हो सकता है। फिलहाल इस प्रस्ताव पर सरकार और कंपनियों के बीच बातचीत जारी है।

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