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Airtel की नई 5G सर्विस पर विवाद, सरकारी जांच के घेरे में मामला; क्या प्रीपेड यूजर्स पर पड़ेगा असर?

Airtel की नई Priority Network सर्विस सरकारी जांच के दायरे में आ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक TRAI और सरकार Net Neutrality नियमों के तहत इसकी समीक्षा कर रहे हैं।

Airtel की नई 5G सर्विस पर विवाद, सरकारी जांच के घेरे में मामला; क्या प्रीपेड यूजर्स पर पड़ेगा असर?

Photo Credit: Pexels/ Charlotte May

ख़ास बातें
  • Airtel की Priority Network सर्विस सरकारी जांच के दायरे में आई
  • TRAI नेट न्यूट्रैलिटी नियमों के तहत सर्विस की समीक्षा कर सकता है
  • Airtel पोस्टपेड यूजर्स को 5G network slicing आधारित नेटवर्क दे रहा है
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Bharti Airtel की नई प्रायोरिटी नेटवर्क सर्विस अब सरकारी जांच के दायरे में आ गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार और टेलीकॉम रेगुलेटर TRAI इस बात की जांच कर रहे हैं कि Airtel की यह नई सर्विस नेट न्यूट्रैलिटी नियमों के तहत सही है या नहीं। बताया जा रहा है कि अधिकारियों ने कंपनी से इस सर्विस के तकनीकी कामकाज को लेकर अतिरिक्त जानकारी मांगी है। खासतौर पर यह समझने की कोशिश की जा रही है कि पोस्टपेड यूजर्स को नेटवर्क प्रायोरिटी देने से दूसरे ग्राहकों के इंटरनेट एक्सपीरियंस पर कोई असर तो नहीं पड़ेगा।

ET की रिपोर्ट के मुताबिक संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी इस मामले को लेकर अधिकारियों के साथ चर्चा कर चुके हैं। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि रेगुलेटर यह भी जांच सकता है कि पोस्टपेड ग्राहकों को प्राथमिकता मिलने से प्रीपेड यूजर्स की नेटवर्क क्वालिटी प्रभावित तो नहीं हो रही।

दरअसल Airtel ने हाल ही में अपनी पोस्टपेड सर्विस के लिए 5G network slicing तकनीक आधारित प्रायोरिटी नेटवर्क एक्सपीरियंस शुरू किया है। कंपनी का दावा है कि इससे पोस्टपेड यूजर्स को ज्यादा स्थिर और भरोसेमंद नेटवर्क मिलेगा। Airtel के मुताबिक इसके लिए नेटवर्क का एक हिस्सा खासतौर पर पोस्टपेड ग्राहकों के लिए रिजर्व किया जाता है।

नेट न्यूट्रैलिटी इंटरनेट से जुड़ा एक अहम सिद्धांत माना जाता है। इसके तहत इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स को सभी वेबसाइट्स, ऐप्स और ऑनलाइन सेवाओं के साथ समान व्यवहार करना होता है। यानी किसी खास ऐप, वेबसाइट या यूजर कैटेगरी को अलग स्पीड या प्राथमिकता नहीं दी जा सकती। इसी वजह से अब Airtel की नई सर्विस को लेकर तकनीकी और रेगुलेटरी स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक अधिकारियों का फोकस खासतौर पर 5G standalone आर्किटेक्चर और नेटवर्क स्लासिंग तकनीक पर है। सरकार यह समझना चाहती है कि Airtel ने अपने नेटवर्क को किस तरह अलग-अलग हिस्सों में बांटा है और पोस्टपेड यूजर्स को प्राथमिकता देने का सिस्टम कैसे काम कर रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि UK, US और Singapore जैसे देशों में भी इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल पहले से हो रहा है। बता दें कि Reliance Jio इस तकनीक का इस्तेमाल अभी मुख्य रूप से अपने फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस यानी FWA सर्विस में कर रही है।

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नितेश पपनोई Nitesh has almost seven years of experience in news writing and reviewing tech products like smartphones, headphones, and smartwatches. At Gadgets 360, he is covering all ...और भी
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