शुक्र पर मिला जीवन पृथ्वी से आया है! वैज्ञानिकों का स्टडी में दावा

शुक्र ग्रह के घने बादलों में सूक्ष्मजीवों के संभावित अस्तित्व को लेकर हालिया विवाद हुआ।

शुक्र पर मिला जीवन पृथ्वी से आया है! वैज्ञानिकों का स्टडी में दावा

Photo Credit: Unsplash

शुक्र ग्रह के घने बादलों में सूक्ष्मजीवों का अस्तित्व वैज्ञानिकों के लिए बहस का विषय रहा है।

ख़ास बातें
  • कंप्यूटर मॉडलिंग और पृथ्वी पर पाए गए उल्कापिंडों की हुई स्टडी
  • कार्बनिक पदार्थ बादलों में जीवित रह सकते हैं
  • ग्रहों के द्वारा आपस में एक दूसरे पर संभव हो सकता है जीवन का फैलाव
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ब्रह्मांड में जीवन कैसे फैला? इस बारे में कई थ्योरी मौजूद हैं। इसी तरह पैन्स्पर्मिया की थ्योरी (Theory of Panspermia) कहती है कि अनंत अंतरिक्ष में जीवन एस्टरॉयड (क्षुद्र ग्रह), धूमकेतु, और अन्य खगोलीय वस्तुओं के माध्यम से फैला है। जब किसी एक ग्रह जीवन की उत्पत्ति हुई, तब इस जीवन को एस्टरॉयड्स, धूमकेतुओं ने दूसरे ग्रहों पर पहुंचाया। इस तरह जीवन के बीज एक से दूसरे और दूसरे से तीसरे खगोलीय पिंडों पर पहुंचते हुए विभिन्न ब्रह्मांडीय संसारों पर फैल गए। 

दशकों से वैज्ञानिक इस बात पर बहस कर रहे हैं कि क्या पृथ्वी और मंगल के बीच (दोनों दिशाओं में) ऐसा हो सकता था। यानी क्या पृथ्वी का जीवन मंगल पर पहुंचा, या मंगल से जीवन पृथ्वी पर आया? क्या यह भी कभी हुआ था। खैर, शुक्र ग्रह यहां पर अहम बिंदु बनकर आता है। शुक्र ग्रह के घने बादलों में सूक्ष्मजीवों के संभावित अस्तित्व को लेकर हालिया विवाद हुआ। इसने शुक्र, पृथ्वी और मंगल के बीच अंतरग्रहीय स्थानांतरण की चर्चाओं को जन्म दिया है। 

चंद्र एवं ग्रहीय विज्ञान सम्मेलन (LPSC) 2026 में एक स्टडी प्रस्तुत की गई। जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी एप्लाइड फिजिक्स लेबोरेटरी (JHUAPL) और सैंडिया नेशनल लेबोरेटरीज ने इस विचार का विस्तार से अध्ययन किया। नोआम इज़ेनबर्ग और अन्य द्वारा 2021 में विकसित "वीनस लाइफ इक्वेशन" (VLE) ढांचे का उपयोग करते हुए, टीम के मॉडल अनुमान लगाते हैं कि पृथ्वी से निकले मैटिरियल के कारण शुक्र के बादलों में हरेक शताब्दी में कम से कम कुछ दिनों के लिए जीवन मौजूद हो सकता है।

टीम ने सबसे पहले इस बात पर विचार किया कि किसी भी जैविक पदार्थ को, चाहे वह किसी भी स्रोत से आया हो, अंतरिक्ष की यात्रा में जीवित रहना होगा। टकराव से होने वाले आघात और आघात के साथ-साथ इस प्रक्रिया में उत्पन्न होने वाली गर्मी, साथ ही अंतरिक्ष का अत्यधिक तापमान, विकिरण और वैक्यूम भी एक चुनौती है। कंप्यूटर मॉडलिंग और पृथ्वी पर पाए गए उल्कापिंडों के अध्ययन से पता चला है कि कार्बनिक पदार्थ, निष्कासन और अंतरग्रहीय स्थानांतरण की प्रक्रिया के दौरान बचे रह सकते हैं। शुक्र ग्रह पर पहुंचने पर, किसी भी कार्बनिक पदार्थ को जीवित रहने के लिए बादलों में या उसके ऊपर फैलना होगा।

इससे उन्हें पता चला कि पृथ्वी से शुक्र ग्रह के बादलों में सैकड़ों अरब कोशिकाएं स्थानांतरित हो सकती हैं, जबकि सैकड़ों अरब कोशिकाएं संभावित रूप से जीवित रह सकती हैं।
 

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हेमन्त कुमार

हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर सब-एडिटर हैं और विभिन्न प्रकार के ...और भी

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