• होम
  • विज्ञान
  • ख़बरें
  • आसान नहीं होते स्‍पेस मिशन! स्‍टडी में दावा पुरुष एस्‍ट्रोनॉट्स को इरेक्‍टाइल डिस्‍फंक्‍शन का खतरा

आसान नहीं होते स्‍पेस मिशन! स्‍टडी में दावा- पुरुष एस्‍ट्रोनॉट्स को इरेक्‍टाइल डिस्‍फंक्‍शन का खतरा

erectile dysfunction in astronauts : यह एक ऐसी समस्या है, जिसमें पुरुष के पेनिस में सेक्‍स के दौरान उत्तेजना नहीं होती या उत्तेजना को बनाए रखने में परेशानी होती है।

Share on Facebook Gadgets360 Twitter ShareTweet Share Snapchat Reddit आपकी राय google-newsGoogle News
आसान नहीं होते स्‍पेस मिशन! स्‍टडी में दावा- पुरुष एस्‍ट्रोनॉट्स को इरेक्‍टाइल डिस्‍फंक्‍शन का खतरा

Photo Credit: Unsplash

गैलेक्टिक कॉस्मिक किरणें और भारहीनता हो सकती है इसकी वजह।

ख़ास बातें
  • पुरुष अंतरिक्ष यात्रियों में बढ़ जाता है इरेक्‍टाइल डिस्‍फंक्‍शन का खतरा
  • एक नई स्‍टडी में किया गया दावा
  • हालांकि इसका ट्रीटमेंट किया जा सकता है
विज्ञापन
अंतरिक्ष में जाना कोई मामूली बात नहीं है। कड़ी मेहनत के बाद वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष में जाने का मौका मिलता है और जब वो वापस लौटते हैं, तब कई शारीरिक समस्‍याओं का सामना भी करना पड़ता है। एक स्‍टडी में दावा किया गया है कि आउटर स्‍पेस मिशन्‍स से लौटने वाले पुरुष अंतरिक्ष यात्रियों को इरेक्‍टाइल डिस्‍फंक्‍शन की समस्याओं से जूझना पड़ सकता है। यह एक ऐसी समस्या है, जिसमें पुरुष के लिंग (पेनिस) में संभोग (सेक्‍स) के दौरान उत्तेजना नहीं होती या उत्तेजना को बनाए रखने में परेशानी होती है। 

The FASEB जर्नल में पब्लिश स्‍टडी कहती है कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन का खतरा पुरुष अंतरिक्ष यात्रियों के लिए स्‍पेस में तो होता ही है, जब वो पृथ्‍वी पर लौटते हैं तब भी यह समस्‍या लंबे वक्‍त तक हो सकती है। इसकी वजह पर भी स्‍टडी में बात की गई है। बताया गया है कि अंतरिक्ष में रहने के दौरान वैज्ञानिक गैलेक्टिक कॉस्मिक किरणों (GCR) के संपर्क में आते हैं। वह भारहीनता (weightlessness) भी महसूस करते हैं। इन वजहों से उनकी सेक्‍सुअल हेल्‍थ प्रभावित होती है।   

स्‍टडी करने वाले रिसर्चर्स को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) ने फंड किया था। स्‍टडी में शामिल सीनियर लेखक डॉक्‍टर जस्टिन ला फेवर ने कहा कि इस तरह के इरेक्‍टाइल डिस्‍फंक्‍शन का ट्रीटमेंट मुमकिन है। उन्‍होंने कहा कि भविष्‍य में अंतरिक्ष मिशनों से जुड़ने वाले यात्रियों के स्‍वास्‍थ्‍य पर सख्‍त निगरानी की जरूरत है। जब वह स्‍पेस मिशन से लौटें तो उनकी सेक्‍सुअल हेल्‍थ पर अपडेट लिया जाना चाहिए। 

स्‍टडी में कहा गया है कि मौजूदा वक्‍त में जो स्‍पेस वीकल इस्‍तेमाल हो रहे हैं, GCR से नहीं बचा पाते। ना चाहते हुए भी वैज्ञानिक गैलेक्टिक कॉस्मिक किरणों के संपर्क में आते हैं। अच्‍छी बात है कि इस नुकसान को एंटीऑक्सिडेंट ट्रीटमेंट से रोका जा सकता है। गौरतलब है कि नासा समेत दुनिया के तमाम स्‍पेस एजेंसियां अपने वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष मिशनों के लिए भेजती रहती हैं। 
 
Comments

लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।

प्रेम त्रिपाठी प्रेम त्रिपाठी Gadgets 360 में चीफ सब एडिटर हैं। 10 साल प्रिंट मीडिया और भी... ...और भी

संबंधित ख़बरें

विज्ञापन

Follow Us

विज्ञापन

#ताज़ा ख़बरें
  1. Ola Electric ने शुरू की हायपर डिलीवरी, कस्टमर्स को कुछ घंटे में मिलेगा इलेक्ट्रिक स्कूटर
  2. CMF Phone 2 भारत में जल्द होगा लॉन्च? Flipkart पर लाइव हुआ टीजर पेज
  3. स्पैम कॉल,साइबर फ्रॉड पर DoT की बड़ी कार्रवाई, 1.75 लाख टेलीफोन नंबरों को किया बंद
  4. BSNL के Reliance Jio को बिल न देने से सरकार को हुआ 1,758 करोड़ रुपये का नुकसान
  5. Alcatel की भारत में वापसी! प्रीमियम स्मार्टफोन रेंज करेगी लॉन्च, Make in India के तहत भारत में बनेंगे डिवाइस
  6. 1399 रुपये में itel King Signal फोन लॉन्च, 3 सिम के साथ फास्ट नेटवर्क सपोर्ट और गजब फीचर्स
  7. WhatsApp ने फरवरी में 97 लाख से अधिक भारतीय अकाउंट्स किए बैन
  8. दुनिया का पहला डबल स्क्रीन वाला रग्ड फोन Ulefone Armor 30 Pro होगा 14 अप्रैल को लॉन्च
  9. अंतरिक्ष में रचा इतिहास! Elon Musk की SpaceX ने दिखाया पृथ्वी का अनदेखा हिस्सा, देखें वीडियो
  10. Hyundai Insteroid: गेमर्स के लिए सपनों की कार से कम नहीं है हुंडई का नया कॉन्सेप्ट
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2025. All rights reserved.
ट्रेंडिंग प्रॉडक्ट्स »
लेटेस्ट टेक ख़बरें »