• होम
  • विज्ञान
  • ख़बरें
  • अंतरिक्ष में तैनात सबसे बड़ी दूरबीन ने एक एक्‍सोप्‍लैनेट से खोजा ‘सुराग’, क्‍या वहां एलियंस हैं?

अंतरिक्ष में तैनात सबसे बड़ी दूरबीन ने एक एक्‍सोप्‍लैनेट से खोजा ‘सुराग’, क्‍या वहां एलियंस हैं?

Nasa : WASP-39b नाम के एक्‍सोप्‍लैनेट (Exoplanet) की स्‍टडी से पता चलता है कि वहां बादल छाए हुए हैं। इस ग्रह के वातावरण में एक केमिकल रिएक्‍शन है और ग्रह की उत्पत्ति के बारे में सुराग भी हैं।

अंतरिक्ष में तैनात सबसे बड़ी दूरबीन ने एक एक्‍सोप्‍लैनेट से खोजा ‘सुराग’, क्‍या वहां एलियंस हैं?

Nasa : WASP-39b जिस तारे की परिक्रमा करता है, वह Virgo तारामंडल में स्थित है।

ख़ास बातें
  • एक्‍सोप्‍लैनेट को स्‍टडी किया वैज्ञानिकों ने
  • WASP-39b नाम के एक्‍सोप्‍लैनेट में मिली खास चीजें
  • ग्रह के वातावरण में होता है केमिकल रिएक्‍शन
विज्ञापन
पृथ्‍वी के बाहर जीवन की खोज में जुटे वैज्ञानिक वर्षों से एक्‍सोप्‍लैनेट (Exoplanet) पर रिसर्च कर रहे हैं। ऐसे ग्रह जो सूर्य के अलावा किसी और तारे की परिक्रमा करते हैं, एक्‍सोप्‍लैनेट कहलाते हैं। जब से जेम्‍स वेब स्‍पेस टेलिस्‍कोप (James Webb Space Telescope) लॉन्‍च हुआ है, वैज्ञानिकों की उम्‍मीद बढ़ गई है। अंतरिक्ष में तैनात सबसे बड़ी दूरबीन के जरिए वैज्ञानिक ऐसे सुराग तलाशना चाहते हैं, जिससे वह एलियंस को ढूंढने के करीब पहुंच जाएं। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की मदद से वैज्ञानिकों ने हमारे सौर मंडल से 700 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित एक एक्सोप्लैनेट से जुड़ी असाधारण खोज है। WASP-39b नाम के एक्‍सोप्‍लैनेट (Exoplanet) की स्‍टडी से पता चलता है कि वहां बादल छाए हुए हैं। इस ग्रह के वातावरण में एक केमिकल रिएक्‍शन है और ग्रह की उत्पत्ति के बारे में सुराग भी हैं।

नासा ने बताया है कि वेब के लेटेस्‍ट डेटा में इस एक्‍सोप्‍लैनेट पर परमाणुओं, यौगिकों के अलावा एक्टिव केमिस्‍ट्री और बादलों के होने का पता चलता है। WASP-39b जिस तारे की परिक्रमा करता है, वह Virgo तारामंडल में स्थित है। अगस्‍त महीने में जेम्‍स वेब टेलीस्‍कोप को इस एक्‍सोप्‍लैनेट के वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड के सबूत मिले थे। 

नासा का कहना है कि उसने कई इंस्‍ट्रूमेंट्स की मदद से इस एक्सोप्लैनेट को ऑब्‍जर्व किया। रिसर्चर्स ने एक्‍सोप्‍लैनेट के वायुमंडल से गुजरने वाली तारों की रोशनी को देखने के लिए ट्रांसमिशन स्पेक्ट्रोस्कोपी का इस्तेमाल किया। ग्रह के वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में और भी कई गैसें हैं। करीब 300 खगोलविदों की टीम इनका पता लगाने में जुटी रही। उन्‍हें सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) का भी पता चला। बताया जाता है कि वहां SO2 का निर्माण तब होता है, जब एक्‍सोप्‍लैनेट के तारे की रोशनी ग्रह पर पड़ती है। रिसर्चर्स को पहली बार किसी एक्‍सोप्‍लैनेट के वातावरण में SO2 मिली, जो बड़ी खोज है। 

रिसर्च पेपर के लेखक और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शांग-मिन त्साई ने कहा है कि पहली बार किसी एक्सोप्लैनेट पर तारे की रोशनी के कारण शुरू हुई रासायनिक प्रतिक्रियाओं के ठोस सबूत देखे गए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि एक्सोप्लैनेट के वायुमंडल को समझने में यह स्‍टडी काम आएगी। हालांकि यहां पृथ्‍वी की तरह जीवन का पनपना नामुमकिन होगा। 


 

Comments

लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।

Share on Facebook Gadgets360 Twitter ShareTweet Share Snapchat Reddit आपकी राय google-newsGoogle News

विज्ञापन

Follow Us

विज्ञापन

#ताज़ा ख़बरें
  1. Redmi 15A 5G की सेल शुरू, जानें कितने में मिल रहा 6300mAh बैटरी वाला फोन
  2. Zepto बेच रहा 24 हजार रुपये सस्ता iPhone 17 Pro Max, सबसे तगड़ा डिस्काउंट
  3. Google Pixel 11 Pro XL के रेंडर लीक, Tensor G6 चिप, 4K वीडियो रिकॉर्डिंग जैसे फीचर्स का खुलासा
  4. Vivo V70 FE vs Oppo Reno 15C 5G vs OnePlus Nord 5: जानें कौन सा फोन है बेस्ट
  5. Truecaller पर अपना अकाउंट कैसे करें डिलीट, ऐसे अनलिस्ट होगा फोन नंबर
  6. 7300mAh बैटरी, 50MP कैमरा वाले OnePlus फोन पर बंपर डिस्काउंट, जानें कितना मिल रहा सस्ता
  7. Ola की इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल Roadster X+ पर भारी डिस्काउंट, प्राइस में हुई 60,000 रुपये की कमी
  8. Motorola Edge 70 सीरीज में शामिल हो सकते हैं 3 नए Pro मॉडल्स
  9. ईरान और रूस में ड्रोन खरीदने के लिए हो रहा क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल
  10. WhatsApp, Telegram के बाद VPN पर वार, यूजर्स के लिए बढ़ी मुश्किलें!
© Copyright Red Pixels Ventures Limited 2026. All rights reserved.
ट्रेंडिंग प्रॉडक्ट्स »
लेटेस्ट टेक ख़बरें »