दुनियाभर के वैज्ञानिक वर्षों से मंगल ग्रह का अध्ययन करने में जुटे हैं। उनकी उम्मीद इस ग्रह पर पानी के बड़े संभावित स्रोत को लेकर है। हालांकि नए डेटा से उम्मीद कुछ धुंधली होती नजर आती है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (Nasa) के इनसाइट (InSight) मिशन के भूकंपीय आंकड़ों (seismic data) के विश्लेषण से पता चला है कि लाल ग्रह शुष्क है। इनसाइट मिशन का मकसद मंगल के आंतरिक भाग का अध्ययन करना और सतह के नीचे महत्वपूर्ण संकेतों से जुड़ा डेटा इकट्ठा करना है। इनसाइट मिशन साल 2018 से मंगल ग्रह की स्टडी कर रहा है।
डेटा के विश्लेषण के दौरान रिसर्चर्स को इनसाइट के लैंडिंग एरिया के पास मंगल के सबसर्फेस के टॉप 300 मीटर एरिया में बहुत कम या कोई बर्फ नहीं मिली। सर्फेस का गहराई से अध्ययन करने पर पता चला कि मंगल ग्रह की क्रस्ट काफी कमजोर और छिद्रपूर्ण है। इसके अलावा, तलछट (sediments) अच्छी तरह से सीमेंटेड भी नहीं थे और छिद्रपूर्ण क्रस्ट में कोई बर्फ देखने को नहीं मिली।
इस बारे में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी सैन डिएगो में स्क्रिप्स इंस्टीट्यूशन ऑफ ओशनोग्राफी के जियोफिजिसिस्ट वाशन राइट ने कहा कि ये निष्कर्ष इस बात से इंकार नहीं करते कि बर्फ के दाने या छोटे गोले वहां हों जो दूसरे खनिजों को एकसाथ नहीं जोड़ रहे हों। सवाल है कि बर्फ के उस रूप में मौजूद होने की कितनी संभावना है? वाशन राइट ने अपने तीन सहयोगियों के साथ आंकड़ों का विश्लेषण किया और
जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स में अपने निष्कर्ष प्रकाशित किए। रिसर्चर्स ने मंगल ग्रह के बारे में एक और तथ्य का पता लगाया। उनका मानना था कि मंगल ग्रह के शुरुआती समय में ही महासागरों का ज्यादातर पानी मिनिरल्स में बदल गया होगा, जिससे अंडरग्राउंड सीमेंट बना।
हालांकि स्टडी के को-ऑथर ‘माइकल मंगा' के अनुसार, लैंडर के नीचे के क्षेत्र में सीमेंट कम है। यानी वहां थोड़ा पानी मौजूद है। इसके अलावा, मंगल ग्रह की भूमध्य रेखा के ठंडे तापमान से पता चलता है कि अगर वहां पानी मौजूद होता, तो वह जमने के लिए अनुकूल था। कई वैज्ञानिक लंबे समय से मानते हैं कि मंगल की सबसर्फेस बर्फ से भरी होगी। लेकिन नए ऑब्जर्वेशन उस भरोसे का खंडन करते हैं। इसके बावजूद वैज्ञानिकों का दावा है कि उनके मॉडल ने मंगल के ध्रुवों पर बड़ी बर्फ की चादरों और जमी हुई बर्फ की मौजूदगी का संकेत दिया है।
हाल ही में एक और प्रोजेक्ट में मंगल ग्रह पर मौजूद सैकड़ों-हजारों रॉक संरचनाओं की मैपिंग की गई है। अनुमान है कि अतीत में इन्हीं जगहों पर बड़ी मात्रा में पानी की मौजूदगी रही होगी। इस मैप को बनाने के लिए दो मार्स ऑर्बिटर के डेटा का इस्तेमाल किया गया। यह मैप सभी सवालों के जवाब नहीं देता, पर यह उन जगहों को पॉइंट आउट करता है, जहां पानी के सुराग मिलने के ज्यादा चांस हैं। पहचानी गई जगहें भविष्य में मंगल मिशनों के लिए बेहतरीन लैंडिंग साइट की उम्मीदवार हो सकती हैं। इनमें से कुछ साइट में अभी भी सतह के नीचे बर्फ दबी हो सकती है।
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