अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने बताया है कि ISS की शुरुआत के बाद से यह पहली बार हुआ है कि जब इसके सभी आठ डॉकिंग पोर्ट्स पर स्पेसक्राफ्ट मौजूद हैं
अमेरिका में NASA के केनेडी स्पेस सेंटर से ISS की दूसरी 400 किलोमीटर से अधिक की है
पिछले कुछ वर्षों में स्पेस मिशंस को कामयाब बनाने में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ISS को अमेरिका और कुछ अन्य देशों की स्पेस एजेंसियों के कोलेब्रेशन से बनाया गया था। इस महीने की शुरुआत में ISS ने एक रिकॉर्ड बनाया है। इसके सभी आठ डॉकिंग पोर्ट्स पर स्पेसक्राफ्ट मौजूद थे।
अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने बताया है कि ISS की शुरुआत के बाद से यह पहली बार हुआ है कि जब इसके सभी आठ डॉकिंग पोर्ट्स पर स्पेसक्राफ्ट मौजूद हैं। एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि इनमें क्रू के ट्रांसपोर्टेशन के साथ ही कार्गो की डिलीवरी करने वाले स्पेसक्राफ्ट्स शामिल हैं। ये स्पेसक्राफ्ट NASA, रूस की Roscosmos, जापान की JAXA और कमर्शियल पार्टनर्स के स्पेसक्राफ्ट हैं। ISS पर Roscosmos के Soyuz27 और Soyuz28 के क्रू के लिए स्पेसक्राफ्ट पार्क किए गए हैं। इसके अलावा रूस और ऑस्ट्रेलिया के कार्गो से जुड़े स्पेसक्राफ्ट भी मौजूद हैं।
एयरोस्पेस से जुड़ी अमेरिकी कंपनी Northrop Grumman का Cygnus 23 स्पेसक्राफ्ट के साथ ही बिलिनेयर Elon Musk की SpaceX के दो स्पेसक्राफ्ट भी ISS पर डॉक किए गए हैं। इस वर्ष जून में भारतीय एस्ट्रोनॉट Shubhanshu Shukla ने Axiom-4 मिशन के साथ इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर पहुंचकर एक बड़ी सफलता हासिल की थी। इस मिशन के चार सदस्यीय क्रू में शुक्ला के अलावा अमेरिका की Peggy Whitson, पोलैंड के Slawosz Uznanski Wisniewski और हंगरी के Tibor Kapu शामिल थे। ISS का इस्तेमाल माइक्रोगेविटी में वैज्ञानिक रिसर्च, टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग और मानव पर अंतरिक्ष के प्रवाहों की स्टडी करने के लिए होता है। आगामी वर्षों में ISS पर स्पेसक्राफ्ट्स और एस्ट्रोनॉट्स की संख्या में अधिक बढ़ोतरी हो सकती है।
Axiom-4 मिशन का क्रू SpaceX के Falcon 9 रॉकेट पर इस मिशन के स्पेसक्राफ्ट Dragon के साथ ISS पर पहुंचा था। अमेरिका में NASA के केनेडी स्पेस सेंटर से ISS की दूरी 400 किलोमीटर से अधिक की है। धरती के आसपास ISS तेजी से घूम रहा है और इसे एक ऑर्बिटल साइकल को पूरा करने में लगभग 90 मिनट लगते हैं। भारत की योजना भी स्पेस स्टेशन बनाने की है। इस स्टेशन का नाम "भारत अंतरिक्ष स्टेशन" होगा। इसकी स्थापना 2035 तक हो सकती है। इसके लिए भारतीय स्पेस एजेंसी ISRO और NASA के बीच टाई-अप किया जा सकता है।
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