NASA का Artemis II मिशन लॉन्च के करीब है। यह 50 साल से ज्यादा समय बाद इंसानों को चंद्रमा के आसपास ले जाएगा।
Photo Credit: NASA
SLS रॉकेट के साथ Artemis II मिशन लॉन्च के लिए तैयार खड़ा हुआ
NASA का Artemis II अब लॉन्च के बेहद करीब है और हालिया अपडेट्स के मुताबिक इसकी काउंटडाउन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। NASA ने अपने ऑफिशियल ब्लॉग में बताया है कि टीमें रॉकेट और सभी सिस्टम्स को लॉन्च के लिए तैयार कर रही हैं। यह मिशन 5 दशक बाद इंसानों को चंद्रमा के आसपास भेजने वाला पहला क्रूड मिशन होगा। मौजूदा जानकारी के अनुसार Artemis II का लॉन्च 1 अप्रैल 2026 (US टाइम) के लिए टारगेट किया गया है, जो भारत में 2 अप्रैल को तड़के लगभग 3:54 बजे (IST) पड़ सकता है। हालांकि सटीक टाइम लॉन्च विंडो और कंडीशन्स पर निर्भर करेगा। नीचे इस मिशन की सभी डिटेल्स शेयर की गई हैं।
Artemis II NASA के Artemis प्रोग्राम का दूसरा फेज है और यह पहला क्रूड (इंसानी) मिशन होगा। इससे पहले Artemis I में Orion स्पेसक्राफ्ट को बिना क्रू के टेस्ट किया गया था। इस बार चार अंतरिक्ष यात्री डीप स्पेस में भेजे जाएंगे, जिनमें NASA के तीन और Canadian Space Agency का एक एस्ट्रोनॉट शामिल है। यह मिशन चंद्रमा की सतह पर लैंड नहीं करेगा, बल्कि उसके चारों ओर फ्लाईबाय करके पृथ्वी पर लौटेगा।
इस मिशन का मुख्य फोकस Orion स्पेसक्राफ्ट के सभी क्रिटिकल सिस्टम्स को इंसानों के साथ टेस्ट करना है। इसमें लाइफ सपोर्ट सिस्टम, नेविगेशन, कम्युनिकेशन और डीप स्पेस में क्रू की सेफ्टी शामिल है। करीब 10 दिन तक चलने वाले इस मिशन में अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की लो ऑर्बिट से बाहर जाकर उन परिस्थितियों का सामना करेंगे, जिनके लिए भविष्य के मून लैंडिंग मिशन तैयार किए जा रहे हैं।
Space Launch System यानी SLS सिर्फ एक रॉकेट नहीं, बल्कि NASA का अब तक का सबसे ताकतवर लॉन्च सिस्टम है। इसे खास तौर पर इंसानों को चंद्रमा और आगे डीप स्पेस मिशन्स पर भेजने के लिए डिजाइन किया गया है। लॉन्च के समय SLS करीब 8.8 मिलियन पाउंड थ्रस्ट जनरेट करता है, जो इसे Saturn V के बाद सबसे पावरफुल रॉकेट्स में शामिल करता है। इस रॉकेट का कोर स्टेज चार RS-25 इंजनों से लैस है, जो पहले Space Shuttle प्रोग्राम में इस्तेमाल हो चुके हैं। इनके साथ दो बड़े सॉलिड रॉकेट बूस्टर्स लगाए गए हैं, जो लॉन्च के शुरुआती दो मिनट में ज्यादातर थ्रस्ट देते हैं। यही फेज सबसे क्रिटिकल होता है, जहां रॉकेट पृथ्वी की ग्रेविटी से बाहर निकलना शुरू करता है।
SLS की ऊंचाई करीब 98 मीटर है, यानी लगभग 30 मंजिला इमारत जितना लंबा। इसकी खास बात यह है कि यह भारी पेलोड, जैसे Orion स्पेसक्राफ्ट को सीधे चंद्रमा की ओर भेज सकता है, जबकि पुराने मिशन्स में कई बार अलग-अलग स्टेप्स की जरूरत पड़ती थी। Artemis II मिशन में SLS का Block 1 वर्जन इस्तेमाल होगा, जिसमें Orion कैप्सूल को ट्रांस-लूनर ट्रैजेक्टरी पर भेजा जाएगा। लॉन्च के कुछ मिनट बाद बूस्टर्स अलग हो जाएंगे, और फिर कोर स्टेज Orion को आगे बढ़ाएगा।
इंटरेस्टिंग बात यह है कि SLS पूरी तरह रीयूसेबल नहीं है, यानी इसका कोर स्टेज हर मिशन के बाद दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसके बावजूद NASA इसे डीप स्पेस मिशन्स के लिए सबसे भरोसेमंद प्लेटफॉर्म मानता है।
NASA के मुताबिक लॉन्च डे पर कई स्टेप्स लाइव दिखाए जाएंगे। रॉकेट में फ्यूल भरने की प्रक्रिया (tanking) की कवरेज 7:45 AM EDT (भारत में 5:15 PM) से शुरू होगी। वहीं पूरा लॉन्च कवरेज 12:50 PM EDT (10:20 PM IST) से शुरू होगा। इसी विंडो के दौरान actual liftoff होने की उम्मीद है, जिसे भारत में 2 अप्रैल की सुबह करीब 3:54 बजे (IST) के आसपास देखा जा सकता है, हालांकि यह अनुमानित समय है।
Artemis II, Artemis प्रोग्राम के अगले फेज के लिए रास्ता तैयार करेगा। इसके बाद आने वाले Artemis III मिशन में इंसानों को चंद्रमा की सतह पर उतारने की योजना है। NASA का लंबा लक्ष्य चंद्रमा पर स्थायी मानव मौजूदगी बनाना और आगे चलकर मंगल ग्रह के मिशन के लिए तैयारी करना है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस लॉन्च पर टिकी हुई है, क्योंकि यह मिशन स्पेस एक्सप्लोरेशन के नए दौर की शुरुआत का संकेत दे सकता है।
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