अमेरिकी डिवाइसेज मेकर Apple और Samsung की देश में स्मार्टफोन्स की मैन्युफैक्चरिंग में बड़ी हिस्सेदारी है। हालांकि, भारतीय स्मार्टफोन ब्रांड्स की बिक्री कमजोर बनी हुई है
इस स्कीम का उद्देश्य मोबाइल फोन की मैन्युफैक्चरिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ाना है
भारत में पिछले कुछ वर्षों में स्मार्टफोन्स की मैन्युफैक्चरिंग तेजी से बढ़ी है। अमेरिकी डिवाइसेज मेकर Apple और Samsung की देश में स्मार्टफोन्स की मैन्युफैक्चरिंग में बड़ी हिस्सेदारी है। हालांकि, भारतीय स्मार्टफोन ब्रांड्स की बिक्री कमजोर बनी हुई है। केंद्र सरकार को उम्मीद है कि नई मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम से इंटरेशनल मार्केट में मजबूत स्थिति वाले भारतीय स्मार्टफोन्स ब्रांड्स को तैयार किया जा सकेगा।
हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को अप्रूवल दिया है। इस वर्ष मार्च में समाप्त हुई प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम की यह जगह लेगी। PLI स्कीम से देश में स्मार्टफोन्स सहित इलेक्ट्रॉनिक्स की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने में सहायता मिली है। एक मीडिया रिपोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड IT सेक्रेटरी, S Krishnan के हवाले से बताया गया है कि इन स्कीम्स से स्मार्टफोन्स की मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ा है। हालांकि, देश के स्मार्टफोन ब्रांड्स के मार्केट शेयर में कमी हुई है क्योंकि वे टेक्नोलॉजी में तेजी से होने वाले बदलाव के साथ चलने में नाकाम रहे हैं।
सरकार का मानना है कि नई स्कीम से इन कमियों को दूर किया जा सकेगा। कृष्णन ने कहा, "हमने पहली स्कीम से सीख ली है। MPMS इसकी तुलना में अधिक फोकस्ड होगी।" उनका कहना था कि भारत ने अपने इंटरनेशनल मैन्युफैक्चरिंग इमेज में बड़ा बदलाव किया है। उन्होंने कहा, "इंटरनेशनल मार्केट में प्रमुख स्मार्टफोन्स पर 'मेड इन इंडिया' का लेबल होता है। इस वजह से इंटरनेशनल लेवल पर भारत की इमेज में सुधार हुआ है।" अगले उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इंटरनेशनल मैन्युफैक्चरर्स के साथ भारतीय कंपनियां भी सामने आएं और वे कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स या असेंबलिंग तक ही सीमित न रहें।
हाल ही में मिनिस्ट्री ऑफ इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स ने बताया था कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 62,500 करोड़ रुपये के खर्च वाली मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को अप्रूवल दिया है। इस स्कीम का लक्ष्य देश में मोबाइल फोन की मैन्युफैक्चरिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ाना और सप्लाई चेन को मजबूत करना है। इस स्कीम में देश के ब्रांड्स की नई टेक्नोलॉजी हासिल करने और मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने में मदद की जाएगी। इस स्कीम के तहत, देश में सेल्स के आधार पर मोबाइल फोन के मैन्युफैक्चरर्स को 2.25 प्रतिशत से पांच प्रतिशत तक की दर पर इंसेंटिव उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा लोकल सोर्सिंग वाले कंपोनेंट्स पर भी अतिरिक्त इंसेंटिव दिया जाएगा।
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