भारत में स्टारलिंक की सर्विस को अप्रूवल में देरी का असर मस्क की रॉकेट कंपनी SpaceX के इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) पर पड़ सकता है। इस IPO के लिए जल्द ही प्राइसिंग की घोषणा की जानी है
ईराम में लाइसेंस नहीं होने के बावजूद स्टारलिंक की सर्विस का इस्तेमाल हो रहा है
सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट सर्विस उपलब्ध कराने वाली Starlink को भारत में अप्रूवल मिलने में देरी हो सकती है। इसका कारण मिडल ईस्ट में युद्ध के दौरान स्टारलिंक के सैटेलाइट टर्मिनल्स के इस्तेनाल को लेकर आशंकाएं हैं। देश में पिछले कुछ महीनों से यह कंपनी अपनी सर्विस को लॉन्च करने की तैयारी कर रही है।
Bloomberg की एक रिपोर्ट में इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के तहत आने वाली सिक्योरिटी एजेंसियों ने देश में स्टारलिंक की सर्विस शुरू करने के लिए अंतिम मंजूरी को रोक दिया है। इसके पीछे ईरान में स्टारलिंक को लाइसेंस नहीं मिलने के बावजूद इसके सैटेलाइट टर्मिनल्स के इस्तेमाल से जुड़ी रिपोर्ट्स प्रमुख कारण है। इससे भू-राजनीतिक संकट की स्थिति में इस अमेरिकी कंपनी को कंट्रोल करने की अथॉरिटीज की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। बिलिनेयर Elon Musk की इस कंपनी को देश में लगभग एक वर्ष पहले ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट (GMPCS) लाइसेंस दिया गया था। हालांकि, इस लाइसेंस से कंपनी को सिर्फ अपने कामकाज के लिए तैयारी करने और एग्रीमेंट्स साइन करने की अनुमति मिली थी। स्टारलिंक को सर्विस लॉन्च करने से पहले अतिरिक्त रेगुलेटरी और सिक्योरिटी क्लीयरेंसेज की जरूरत है।
भारत में स्टारलिंक की सर्विस को अप्रूवल में देरी का असर मस्क की रॉकेट कंपनी SpaceX के इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) पर पड़ सकता है। इस IPO के लिए जल्द ही प्राइसिंग की घोषणा की जानी है। देश में अथॉरिटीज पिछले कुछ महीनों से स्टारलिंक के सिक्योरिटी से जुड़े उपायों की समीक्षा कर रही हैं और इसे सिक्योरिटी क्लीयरेंस नहीं मिला है।
हाल ही में एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया था कि सरकारी टेलीकॉम कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) और Starlink के बीच टाई-अप हो सकता है। केंद्र सरकार के पूरे देश में इंटरनेट को पहुंचाने के विजन को पूरा करने के लिए BSNL को स्टारलिंक से मदद मिल सकती है। BSNL और स्टारलिंक के एग्जिक्यूटिव्स के बीच संभावित पार्टनरशिप को लेकर बातचीत हुई है। इसमें इंटरनेट सर्विस के लिए सैटेलाइट का इस्तेमाल और एंटरप्राइज कस्टमर्स को सर्विसेज की पेशकश शामिल हो सकता है। हाला्ंकि, यह बातचीत शुरुआती दौर में है और दोनों कंपनियों के बीच कोई एग्रीमेंट नहीं हुआ है।
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