राज्य को भविष्य की प्रभावी तकनीक से सुसज्जित करने के लिए मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने ‘विकसित गुजरात डेटा सेंटर नीति 2026-29’ जारी की है। यह डेटा सेंटर नीति गुजरात को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक सशक्त वैश्विक केन्द्र के रूप में स्थापित करेगी
यह एक फाइल फोटो है
भारत के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में शामिल गुजरात ने सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर जैसे सेगमेंट का हब बनने की योजना बनाई है। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार के 13 सितंबर को पांच वर्ष पूर्ण हुए हैं। पिछले पांच वर्षों में उनके नेतृत्व में विकास के अनेक नए आयाम स्थापित किए हैं, जिनमें सेमीकंडक्टर क्षेत्र में राज्य का उभरना एक बड़ी उपलब्धि है। भारत को ग्लोबल सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में एक विश्वसनीय भागीदार बनाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन को साकार करने की दिशा में गुजरात महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
गुजरात में सेमीकंडक्टर से जुड़ी इंडस्ट्री में 13.66 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश हुआ है। केंद्र सरकार की ओर से मंजूर किए गए कुल 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट में से 6 प्रोजेक्ट गुजरात में हैं। यह आंकड़ा केवल निवेश की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली, टेस्टिंग, पैकेजिंग, डिजाइन और अनुसंधान के क्षेत्र में गुजरात की बढ़ती क्षमता का भी प्रमाण है। राज्य में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र साणंद और धोलेरा बन रहे हैं। साणंद में माइक्रोन टेक्नोलॉजी की DRAM और NAND मेमोरी चिप्स के लिए अत्याधुनिक ATMP (असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग) प्लांट लगाया गया है। इसके अलावा, साणंद में CG Power, रेनेसां और स्टार्स माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स की मॉडर्न आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्टिंग (OSAT) यूनिट और केन्स सेमीकॉन की हाई-एंड चिप पैकेजिंग यूनिट भी मौजूद है। गुजरात में चिप मैन्युफैक्चरिंग के साथ ही चिप असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग के लिए संपूर्ण क्षमता विकसित की जा रही हैं।
धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब का कंस्ट्रक्शन शुरू किया है। इसमें 110 से 28 नैनोमीटर प्रोसेस नोड्स का उपयोग करते हुए कॉम्प्लिमेंट्री मेटल-ऑक्साइड सेमीकंडक्टर (CMOS) लॉजिक चिप्स की मैन्युफैक्चरिंग की जाएगी। धोलेरा में क्रिस्टल मैट्रिक्स की मिनी एवं माइक्रो LED डिस्प्ले फैब्रिकेशन और पैकेजिंग यूनिट भी लगाई जा रही है। सूरत में सुचि सेमीकॉन ने छोटे पैमाने पर उत्पादन शुरू करते हुए बड़े स्तर का OSAT प्लांट लगाने की तैयारी की है। धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए आवश्यक विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराया जा रहा है। जमीन के बड़े पार्सल, बिजली और पानी की विश्वसनीय आपूर्ति, प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं और बंदरगाहों, एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से कनेक्टिविटी धोलेरा को सेमीकंडक्टर निवेश के लिए आकर्षक स्थल बनाती है।
गुजरात सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए विशेष प्रोत्साहनों की भी घोषणा की है। केंद्र सरकार की कैपिटल एक्सपेंडिचर सहायता के अतिरिक्त 40 प्रतिशत अतिरिक्त पूंजी निवेश सहायता, FAB प्रोजेक्ट के लिए आवश्यक प्रथम 200 एकड़ भूमि पर 75 प्रतिशत सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति तथा 10 वर्ष तक प्रति यूनिट 2 रुपए की पावर टैरिफ सब्सिडी जैसे प्रावधान राज्य की निवेशक-अनुकूल नीति को दिखाते हैं।
डेटा सेंटर के लिए इंसेंटिव
राज्य को भविष्य की प्रभावी तकनीक से सुसज्जित करने के लिए मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने हाल ही में ‘विकसित गुजरात डेटा सेंटर नीति 2026-29' जारी की है। यह डेटा सेंटर नीति गुजरात को टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक सशक्त वैश्विक केन्द्र के रूप में स्थापित करेगी। भूपेन्द्र पटेल ने कहा, 'गुजरात सरकार ने हमेशा भविष्य की टैक्नोलॉजी पर फोकस रखा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजनरी मार्गदर्शन में भारत को डिजिटल और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर का ग्लोबल हब बनाने के विजन को यह नीति आगे बढ़ाएगी। पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के साथ ही डिवेलपमेंट के लक्ष्य को सार्थक करना हमारा ध्येय है। इसे आगे बढ़ाते हुए डेटा सेंटर्स के लिए 51 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी का उपयोग करना अनिवार्य किया गया है। खेती और अन्य उद्योगों को कोई नुकसान से बचाने के लिए समुद्र के पानी को डीसेलिनेशन प्लांट से स्वच्छ बनाकर डेटा सेंटर्स को इसकी सप्लाई की जाएगी।
धोलेरा में डेटा सेंटर स्थापना के लिए 2.5 प्रतिशत अतिरिक्त पूंजी सहायता प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही स्टाम्प ड्यूटी से पूरी तरह मुक्ति देने का प्रावधान भी इस नीति में ही किया गया है। डेटा सेंटर स्थापना हेतु 10 साल के लिए 4 प्रतिशत ब्याज सहायता एवं आगामी 20 साल के लिए प्रति यूनिट एक रूपए की दर से विद्युत सहायता भी मिलेगी। गुजरात सरकार ने डेटा सेंटर्स को ‘आवश्यक सेवाओ' का दर्जा दिया है। प्रोजेक्ट की मंजूरी की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने का सिस्टम भी तैयार किया गया है। इस नीति के तहत, 7.5 गीगावॉट कैपेसिटी के डेटा सेंटर्स शुरू करने का लक्ष्य है। गुजरात को विभिन्न कंपनियों से 10 गीगावॉट कैपेसिटी के प्रपोजल मिले हैं।
ऑर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग के दौर में मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, विशेषतौर पर डेटा सेंटर के महत्व को ध्यान में रख कर यह नीति तैयार की गई है। इस नीति के कारण अब आने वाले समय में साणंद और धोलेरा हाईटेक डेटा सेंटर के तौर पर उभरेंगे। डेटा सेंटर स्थापित होने के साथ-साथ आगामी समय में धोलेरा को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) का बड़ा डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में भी राज्य सरकार मजबूती से कार्य कर रही है।
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