Google Doodle में आज पारसी न्यू ईयर 'नवरोज' की धूम! जानें इसका पूरा इतिहास

इसी दिन के साथ दुनियाभर के कई हिस्सों में त्यौहारों की शुरुआत होती है। 13 दिन का यह उत्सव वसंत विषुव के साथ शुरू होता है जब सूर्य भूमध्य रेखा को पार कर रहा होता है।

Google Doodle में आज पारसी न्यू ईयर 'नवरोज' की धूम! जानें इसका पूरा इतिहास
ख़ास बातें
  • 13 दिन का यह उत्सव वसंत विषुव के साथ शुरू होता है।
  • इसी दिन के साथ दुनियाभर के कई हिस्सों में त्यौहारों की शुरुआत होती है।
  • दुनियाभर में लगभग 30 करोड़ से ज्यादा लोग नवरोज को मनाते हैं।
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Google आज अपने Doodle के माध्यम से पारसी या ईरानी नववर्ष मना रहा है। इसे नवरोज (Nowruz) भी कहा जाता है। नवरोज पारसी न्यू ईयर की शुरुआत माना जाता है जिसका इतिहास लगभग 3000 साल पुराना है। यह दुनिया के सबसे पुराने त्यौहारों में से एक है। जिस तरह से भारत में होली को साल का आखिरी समय माना जाता है, इसी तरह पारसी लोग नए साल का जश्न नवरोज के रूप में मनाते हैं। इसका अर्थ ही नया दिन है। इसे पारसी न्यू ईयर भी कहते हैं। इसी मौके पर गूगल ने खास डूडल तैयार किया है जो देखने में काफी रंग-बिरंगा और बेहद खूबसूरत है। 

आज के गूगल डूडल (Google Doodle) में आपको रंग बिरंगे फूल, मधुमक्खियां और एक वाद्य यंत्र दिखाई देगा। ये सभी चीजें वसंत के आगमन का संकेत देती हैं कि किस तरह से वसंत में नए पौधे पनपने लगते हैं, फूल खिल उठते हैं, मधुमक्खियां फूलों पर मंडराने लगती हैं। भारत में भी पारसी समुदाय के लोग, कश्मीरी और शिया मुसलमान नवरोज को मनाते हैं। नवरोज सीधे सूर्य की गति से जुड़ा हुआ है। पारसी कैलेंडर के हिसाब से वसंत विषुव की अवधि को नवरोज कहा जाता है। यहां पर वसंत और विषुव का मतलब है कि वसंत ऋतु और विषुवत रेखा। पुरानी मान्यताओं के अनुसार जब सूरज की किरणें विषुवत रेखा पर पड़ती हैं तो उस अवधि को नवरोज के त्यौहार के रूप में मनाते हैं।  

दुनियाभर में लगभग 30 करोड़ से ज्यादा लोग नवरोज को मनाते हैं। इस दिन कई तरह के अनुष्ठान भी किए जाते हैं। नवरोज के दिन जरथुस्त्र की तस्वीर के साथ मोमबत्ती, अगरबत्ती, कांच, मीठा पकवान, सिक्के, फूल, फल आदि घर की पवित्र जगह पर रखे जाते हैं और विशेष पूजा की जाती है। पारसी समुदाय के लोग मानते हैं कि इससे परिवार में सुख-शांति, प्रेम और धन की वृद्धि होती है। लोग मिलकर सामूहिक प्रार्थनाओं में शामिल होते हैं। कहा जाता है कि इस दिन पारसी लोग चन्दन की लकड़ी अग्नि में समर्पित करते हैं और एक दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हैं। 

इसी दिन के साथ दुनियाभर के कई हिस्सों में त्यौहारों की शुरुआत होती है। 13 दिन का यह उत्सव वसंत विषुव के साथ शुरू होता है जब सूर्य भूमध्य रेखा को पार कर रहा होता है। यह समय अपने आप में नए जन्म और प्रकृति के साथ जीवन के तालमेल का प्रतीक है। इस दिन लोग घरों की साफ सफाई करते हैं, मित्रों और पडो़सियों के घर बधाई देने जाते हैं और कई तरह के पारंपरिक पकवान और मिठाईयां बनाकर त्यौहार मनाते हैं।

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हेमन्त कुमार

हेमन्त कुमार Gadgets 360 में सीनियर सब-एडिटर हैं और विभिन्न प्रकार के ...और भी

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