ऑटोमोबाइल सेल्स की बढ़ी रफ्तार, पिछले महीने 10 प्रतिशत की हुई बढ़ोतरी

कमर्शियल व्हीकल्स की सेल्स में सात प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। पिछले महीने कमर्शियल व्हीकल्स की सेल्स 77,135 यूनिट्स की रही। यह पिछले वर्ष की समान अवधि में 71,964 यूनिट्स की थी

ऑटोमोबाइल सेल्स की बढ़ी रफ्तार, पिछले महीने 10 प्रतिशत की हुई बढ़ोतरी

कमर्शियल व्हीकल्स की सेल्स सात प्रतिशत बढ़कर 77,135 यूनिट्स की रही

ख़ास बातें
  • टू-व्हीलर्स की रिटेल सेल्स नौ प्रतिशत बढ़कर 14,93,234 यूनिट्स की रही
  • डिमांड में तेजी से पैसेंजर व्हीकल्स की सेल्स में रिकवरी हुई है
  • ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को सेमीकंडक्टर्स की कमी से मुश्किल हो रही है
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देश में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए पिछला महीना अच्छा रहा है। पैसेंजर व्हीकल्स और टू-व्हीलर्स की मजबूत डिमांड से ऑटोमोबाइल कंपनियों की रिटेल सेल्स लगभग 10 प्रतिशत बढ़कर 20,19,414 यूनिट्स पर पहुंच गई। पिछले वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 18,33,421 यूनिट्स का था। 

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के प्रेसिडेंट, Manish Raj Singhania ने बताया कि व्हीकल्स की उपलब्धता बढ़ने के साथ नए लॉन्च के कारण डिमांड में तेजी से पैसेंजर व्हीकल्स की सेल्स में रिकवरी हुई है। पिछले महीने टू-व्हीलर्स की रिटेल सेल्स नौ प्रतिशत बढ़कर 14,93,234 यूनिट्स की रही। यह पिछले वर्ष के इसी महीने में 13,65,924 यूनिट्स की थी। सिंघानिया ने कहा कि टू-व्हीलर्स की सेल्स बढ़ने के पीछे केंद्र सरकार की ओर से दी जाने वाली FAME में कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में डिमांड बढ़ना प्रमुख कारण रहे। 

कमर्शियल व्हीकल्स की सेल्स में सात प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। पिछले महीने कमर्शियल व्हीकल्स की सेल्स 77,135 यूनिट्स की रही। यह पिछले वर्ष की समान अवधि में 71,964 यूनिट्स की थी। इसके अलावा थ्री-व्हीलर्स की रिटेल सेल्स 79 प्रतिशत बढ़कर 79,433 यूनिट्स की थी। ट्रैक्टर की सेल्स में लगभग 10 प्रतिशत की बढ़त रही। FADA का कहना है कि आगामी महीनों में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी के इंटरेस्ट रेट्स को बरकरार रखने से ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए डिमांड में तेजी रह सकती है। 

हालांकि, ऑटोमोबाइल कंपनियों को सेमीकंडक्टर की कमी से कारों का प्रोडक्शन घटाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। बड़ी कार कंपनियों में शामिल Maruti Suzuki ने बताया है कि उसे इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की कमी से मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में प्रोडक्शन का नुकसान होगा। हालांकि, कंपनी को अगली तिमाही में स्थिति में कुछ सुधार होने की उम्मीद है। पिछले कई महीनों से मारुति को सेमीकंडक्टर की सप्लाई में कमी से प्रोडक्शन में कटौती करनी पड़ रही है। इस वजह से कंपनी को डिमांड को पूरा करने में मुश्किल हो रही है। पिछले वित्त वर्ष में मारुति को लगभग 1.7 लाख यूनिट्स के प्रोडक्शन का नुकसान हुआ था। कंपनी के सीनियर एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (सेल्स एंड मार्केटिंग), Shashank Srivastava ने कहा था, "पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में हमें लगभग 45,000 यूनिट्स का नुकसान हुआ था और चौथी तिमाही में नुकसान लगभग 38,000 यूनिट्स का था।" कंपनी के पास लंबित ऑर्डर्स की संख्या बढ़कर चार लाख यूनिट्स से अधिक हो गई है। 
 
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आकाश आनंद

Gadgets 360 में आकाश आनंद डिप्टी न्यूज एडिटर हैं। उनके पास प्रमुख ...और भी

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