अभी तक यूजर्स को इन कंपनियों के स्मार्ट टीवी पर इंटरनेट के माध्यम से 150 से ज्यादा टीवी चैनल फ्री देखने को मिलते हैं।
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Samsung, LG और Xiaomi जैसी कंपनियों के स्मार्ट TV पर मिलने वाले फ्री चैनल जल्द ही रेगुलेट हो सकते हैं।
फ्री टीवी चैनल सर्विस में जल्द ही नए नियम लागू हो सकते हैं। अभी तक आप अपने स्मार्ट TV में इंटरनेट के माध्यम से जो Free TV Channel देख रहे थे वे जल्द ही नियमों के घेरे में आ सकते हैं। हो सकता है कि अब आपको इंटरनेट के माध्यम से टीवी चैनल देखने के लिए पैसे भी चुकाने पड़ें! टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया इस मामले में जल्द ही कोई फैसला लेकर आ सकती है जिसके बाद विज्ञापन आधारित फ्री टीवी चैनल्स की स्ट्रीमिंग नियमों के दायरे में आ सकती है। अभी तक ये सर्विसेज बिना किसी रेगुलेशन के यूजर्स तक पहुंचाई जा रही हैं। आइए जानते हैं कैसे प्रभावित होगा आपका एंटरटेनमेंट।
Samsung, LG और Xiaomi जैसी कंपनियों के स्मार्ट TV पर मिलने वाले फ्री चैनल अब फ्री नहीं रहेंगे। ये सर्विसेज नियमों के दायरे में आ सकती हैं। अभी तक यूजर्स को इन कंपनियों के स्मार्ट टीवी पर इंटरनेट के माध्यम से 150 से ज्यादा टीवी चैनल फ्री देखने को मिलते हैं। ये टीवी चैनल एड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टेलीविजन (FAST) प्लेटफॉर्म के तहत दिखाए जाते हैं। ET की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी TRAI ने अब एक परामर्श पत्र जारी किया है जिसमें इन सर्विसेज को औपचारिक निगरानी के दायरे में लाने के लिए एक स्ट्रक्चर्ड फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया है।
ये प्लेटफॉर्म यूजर को बिना किसी सब्सक्रिप्शन फीस के फ्री चैनल्स देखने की आजादी देते हैं। पिछले कुछ समय में ये तेजी से बढ़े हैं क्योंकि भारत में एक तरफ जहां इंटरनेट सस्ते में उपलब्ध है उसके साथ ही स्मार्ट टीवी भी यूजर्स द्वारा व्यापक रूप में अपनाया जा रहा है। TRAI इन्हें एक व्यापक रेगुलेशन कैटिगरी के तहत लाना चाहती है जिसे एप्लिकेशन बेस्ड लिनीयर टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन (ALTD) सर्विसेज कहा गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, पारंपरिक केबल ऑपरेटर्स और DTH ऑपरेटर्स ने यह मुद्दा उठाया है कि ये प्लेटफॉर्म उनकी तरह किसी नियम के दायरे में नहीं आते। इन्हें न तो लाइसेंस चाहिए, न ही ये कंटेंट और विज्ञापन कोड्स का अनुसरण करते हैं। सर्विसेज हैं लेकिन कोई रेगुलेटरी बंधन नहीं। टीवी पर बहुत सा कंटेंट ऐसा है जो पेड है लेकिन ये प्लेटफॉर्म उसे फ्री में दिखाते हैं। इससे कंटेंट और विज्ञापन मानकों का उल्लंघन होता है।
TRAI अब इन्हें नियमों के दायरे में लाने का प्रस्ताव पेश कर चुकी है। जिसके बाद प्लेटफॉर्म एक लाइसेंस के तहत काम करेंगे जैसे कि केबल और अन्य DTH ऑपरेटर करते हैं। यानी लाइसेंस की अनिवार्यता होगी। इन्हें विज्ञापन कोड्स को फॉलो करना होगा। कंटेंट रेगुलेशन को मानना होगा और उसकी जिम्मेदारी भी लेनी होगी। इन सभी बंधनों के चलते यूजर्स से कुछ सब्सक्रिप्शन फीस भी ली जा सकती है। इसलिए हो सकता है कि आने वाले कुछ दिनों में आपको फ्री टीवी चैनल्स की सर्विसेज मिलना बंद हो जाए और इसके लिए दाम चुकाने पड़ें। TRAI ने इसके लिए स्टेकहोल्डर्स से जवाब मांगा है जिसकी अंतिम तिथि 4 मई है। काउंटर कमेंट्स को 18 मई तक सब्मिट किया जा सकता है। जिसके बाद इस पर रेगुलेशन पॉलिसी लागू हो सकती है।
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