पिछले कुछ वर्षों में क्रिप्टो से जुड़े स्कैम के मामले तेजी से बढ़े हैं। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (CBI) ने क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े स्कैम के एक मामले में जांच का दायरा बढ़ाया है। GainBitcoin स्कैम की जांच में कई जगहों पर छापे मारे गए हैं। इनमें वर्चुअल डिजिटल एसेट्स और सबूत जब्त किए गए हैं।
इस स्कैम की जांच में CBI ने दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चंडीगढ़, पुणे, नांदेड़, कोल्हापुर, मोहाली, झांसी और हुबली कई बड़े शहरों में छापे मारे हैं। इस स्कैम की शुरुआत लगभग एक दशक पहले हुई थी। इसमं इनवेस्टर्स को मार्केट वैल्यू के लिहाज से सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी
Bitcoin में 18 महीनों के लिए रकम लगाने पर 10 प्रतिशत के मासिक रिटर्न का वादा किया था। यह स्कीम मल्टी-लेवल-मार्केटिंग के स्ट्रक्चर पर चलाई गई थी। इसमें इनवेस्टर्स को रेफरल पर कमीशन का लालच दिया गया था। इसमें शुरुआती भुगतान बिटकॉइन में किया गया था। हालांकि, बाद में यह भुगतान इस मामले के आरोपियों की ओर से शुरू की गई क्रिप्टोकरेंसी MCAP में होने लगा था। MCAP की वैल्यू काफी कम थी। इससे इनवेस्टर्स को भारी नुकसान हुआ था।
CBI ने छापों के दौरान लगभग 20 करोड़ रुपये से अधिक की
क्रिप्टोकरेंसी, कई हार्डवेयर क्रिप्टो वॉलेट्स, 34 लैपटॉप और हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन्स को जब्त किया है। जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज का एनालिसिस कर इस स्कैम के बारे में अधिक जानकारी हासिल की जाएगी।
हाल ही में एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने भी क्रिप्टो से जुड़े एक फ्रॉड के मामले में दिल्ली, मुंबई और जयपुर में फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत छापे मारे हैं। यह मामला क्रिप्टो एक्सचेंज की नकली वेबसाइट बनाकर लोगों के साथ ठगी से जुड़ा है। ED ने बताया था कि यह फ्रॉड लगभग 600 करोड़ रुपये का है। यह जांच समाचार पत्र में प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद शुरू की गई थी। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि एक भारतीय नागरिक Chirag Tomar को सैंकड़ों लोगों के साथ ठगी के लिए अमेरिका में जेल की सजा मिली है। इस मामले में क्रिप्टो एक्सचेंज Coinbase की नकली वेबसाइट बनाकर ठगी की गई थी। इसमें पीड़ितों के लॉगिन से जुड़ी डिटेल्स एंटर करने पर नकली वेबसाइट गलत जानकारी दिखाती थी, जिससे यूजर्स इस वेबसाइट पर दिए फोन नंबर पर संपर्क करते थे। यह फोन एक कॉल सेंटर का था जिसे तोमर और उसके साथी चलाते थे। ये लोग पीड़ितों के क्रिप्टोकरेंसी एकाउंट का एक्सेस लेने के बाद उनकी होल्डिंग्स अपने क्रिप्टो वॉलेट्स में ट्रांसफर कर लेते थे। इसके बाद चुराई इस क्रिप्टोकरेंसी को बेच दिया जाता था।
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)