Space Mission

Space Mission - ख़बरें

  • धरती से टकराने से पहले रोके जाएंगे एस्टेरॉयड! जानिए क्या है Blue Origin का बड़ा मिशन
    Jeff Bezos की कंपनी Blue Origin ने NASA और Caltech के साथ मिलकर NEO Hunter मिशन पर काम शुरू किया है, जिसका उद्देश्य पृथ्वी को एस्टेरॉयड जैसे खतरों से बचाना है। यह मिशन Blue Ring स्पेसक्राफ्ट प्लेटफॉर्म पर आधारित होगा, जो पहले एस्टेरॉयड का अध्ययन करेगा और जरूरत पड़ने पर उसकी दिशा बदलने की कोशिश करेगा। इसके लिए आयन बीम और टक्कर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। मिशन के दौरान छोटे सैटेलाइट्स डेटा इकट्ठा करेंगे और “Slamcam” इम्पैक्ट को रिकॉर्ड करेगा।
  • NASA ने टाला SpaceX Crew-12 मिशन! अब इस इस दिन होगा लॉन्च
    Crew-12 मिशन को NASA ने एक दिन के लिए टाल दिया है। यह मिशन इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए केप केनेवरेल स्पेस फोर्स स्टेशन, फ्लोरिडा से रवाना होगा। मंगलवार की सुबह मिशन टीम ने इसके लिए वैदर रिव्यू पूरा किया। क्रू-12 के उड़ान मार्ग पर खराब मौसम का पूर्वानुमान किया गया है। जिसके कारण गुरुवार, 12 फरवरी को प्रक्षेपण को रद्द कर दिया गया है।
  • धरती में कहां से आया था पानी? अब चांद की मिट्टी से निकली बिल्कुल नई कहानी
    NASA की एक नई स्टडी ने धरती पर पानी की उत्पत्ति को लेकर अहम जानकारी दी है। अपोलो मिशनों के दौरान चांद से लाए गए सैंपल्स के विश्लेषण में वैज्ञानिकों को संकेत मिले हैं कि उल्कापिंडों ने धरती पर सिर्फ सीमित मात्रा में पानी पहुंचाया था। रिसर्च के मुताबिक, पृथ्वी का अधिकांश पानी उसके बनने के शुरुआती दौर में मौजूद मटेरियल से ही आया था। इस स्टडी में ट्रिपल ऑक्सीजन आइसोटोप्स का इस्तेमाल किया गया, जिससे अरबों साल पुराने इम्पैक्ट्स का रिकॉर्ड समझना संभव हुआ है।
  • चांद पर भेजें अपना नाम, NASA दे रहा है Free मौका, यहां जानें रजिस्टर करने का तरीका
    NASA अपने Artemis प्रोग्राम के तहत Artemis II मिशन लॉन्च करने की तैयारी कर रही है, जो इंसानों को अब तक की सबसे दूर की मानव अंतरिक्ष यात्रा पर ले जाएगा। इस मिशन में चार एस्ट्रोनॉट्स चांद के चारों ओर 10 दिन की यात्रा करेंगे। NASA ने इस मिशन के साथ आम लोगों को भी जोड़ते हुए “Send Your Name with Artemis” पहल शुरू की है। 21 जनवरी तक नाम रजिस्टर करने पर यूजर्स को डिजिटल बोर्डिंग पास मिलेगा और उनका नाम Orion स्पेसक्राफ्ट के जरिए चांद तक जाएगा।
  • 2026 का पहला ISRO मिशन फेल! PSLV-C62 के साथ कहां, कब और कैसे हुई गड़बड़? यहां पढ़ें पूरी कहानी
    ISRO ने 12 जनवरी 2026 को साल का पहला स्पेस मिशन PSLV-C62 लॉन्च किया था, लेकिन यह मिशन सफल नहीं हो सका। लॉन्च के शुरुआती मिनटों में सब कुछ सामान्य रहा, हालांकि तीसरे स्टेज के अंत में रॉकेट में अस्थिरता आ गई। इसके चलते रॉकेट जरूरी ऑर्बिटल स्पीड और दिशा हासिल नहीं कर पाया और सैटेलाइट्स पृथ्वी की ओर लौट गए। PSLV-C62 में EOS-N1 समेत कई पेलोड्स शामिल थे। ISRO ने फेल्योर के कारणों की जांच के लिए टीम गठित कर दी है।
  • रास्ते से भटका ISRO का रॉकेट! 16 सैटेलाइट लेकर गया है PSLV, जानें क्या हुआ तीसरे स्टेज में
    ISRO के Polar Satellite Launch Vehicle के 64वें मिशन PSLV-C62 में लॉन्च के कुछ मिनट बाद तकनीकी अनियमितता दर्ज की गई है। श्रीहरिकोटा से सुबह 10:18 बजे लॉन्च हुए इस मिशन में रॉकेट के पहले और दूसरे स्टेज ने सामान्य प्रदर्शन किया, लेकिन तीसरे स्टेज में ट्रेजेक्टरी में झुकाव देखा गया। ISRO चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन के मुताबिक, डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है और जल्द ही स्थिति स्पष्ट की जाएगी। यह मिशन 2025 में हुई PSLV की विफल उड़ान के बाद एक अहम वापसी माना जा रहा था।
  • ISRO बना ग्लोबल हीरो! 'बाहुबली' रॉकेट से स्पेस में पहुंचाई सबसे भारी विदेशी सैटेलाइट, सेट किया रिकॉर्ड
    ISRO के हेवी-लिफ्ट रॉकेट LVM3-M6 ने श्रीहरिकोटा से सफल उड़ान भरते हुए अमेरिका के BlueBird-6 कम्युनिकेशन सैटेलाइट को ऑर्बिट में स्थापित किया है। यह अब तक किसी भारतीय लॉन्च व्हीकल द्वारा ले जाया गया सबसे भारी पेलोड है। यह मिशन आम स्मार्टफोन्स तक सीधे स्पेस से ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाने के लक्ष्य से जुड़ा है। करीब 15 मिनट की उड़ान के बाद सैटेलाइट 520 किलोमीटर की ऊंचाई पर अपने तय ऑर्बिट में पहुंचा। यह भारत की कमर्शियल स्पेस लॉन्च क्षमता को ग्लोबल लेवल पर मजबूत करता है।
  • भारत का 2028 में चंद्रयान-4 लॉन्च करने का टारगेट
    केंद्र सरकार ने चंद्रयान-4 मिशन के लिए स्वीकृति दे दी है। इस मिशन में चंद्रमा से सैम्प्ल को लाया जाएगा। यह देश का सबसे जटिल लूनर मिशन होगा। इससे पहले अमेरिका, चीन और रूस ने चंद्रमा से सैम्प्ल लाने की क्षमता को प्रदर्शित किया है। Chandrayaan-4 मिशन को 2028 में लॉन्च करने का टारगेट है। ISRO की योजना अगले तीन वर्षों में स्पेसक्राफ्ट के मैन्युफैक्चरिंग की अपनी कैपेसिटी को तिगुना करने की है।
  • गगनयान मिशन में हुई बड़ी प्रगति, ISRO ने किया क्रू मॉड्यूल के लिए पैराशूट टेस्ट
    ISRO ने यह टेस्ट उत्तर प्रदेश में झांसी की बबीना फील्ड फायरिंग रेंज में किया है। इसमें भारतीय वायु सेना के IL-76 एयरक्राफ्ट से 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई से लगभग 2.5 टन के क्रू मॉड्यूल को गिराया था। क्रू मॉड्यूल के नीचे उतरने पर पैराशूट सिस्टम बिना किसी मुश्किल के खुला जिससे इसकी वास्तविक मिशन के दौरान अत्यधिक मुश्किल स्थिति को संभालने में इसकी क्षमता साबित हो गई है।
  • ISRO के NISAR सैटेलाइट का सफल लॉन्च, धरती की निगरानी में होगा मददगार
    इस सैटेलाइट को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA के साथ मिलकर बनाया है।इस सैटेलाइट के ऑर्बिट में पहुंचने के बाद इसके डुअल-फ्रीक्वेंसी राडार एक दिन में धरती का 14 बार चक्कर लगाएंगे। इससे प्रत्येक 12 दिनों में धरती पर सभी जमीन और बर्फ की सतहों की स्कैनिंग की जाएगी। यह सैटेलाइट धरती की सतह पर 1 सेंटीमीटर जितने बदलाव को भी रिकॉर्ड कर सकेगा।
  • धरती की निगरानी के लिए कल NISAR सैटेलाइट लॉन्च करेंगे ISRO और NASA
    NISAR सैटेलाइट को आंध्र प्रदेश में सतीश धवन स्पेस सेंटर से 30 जुलाई को 8:10 a.m. (भारतीय समय के अनुसार) लॉन्च किया जाएगा। इसके लिए पिकअप ट्रक के साइज के स्पेसक्राफ्ट का इस्तेमाल होगा। इस सैटेलाइट के ऑर्बिट में पहुंचने के बाद इसके डुअल-फ्रीक्वेंसी राडार एक दिन में धरती का 14 बार चक्कर लगाएंगे। इससे प्रत्येक 12 दिनों में धरती पर सभी जमीन और बर्फ की सतहों की स्कैनिंग की जाएगी।
  • NASA के Perseverance रोवर ने बनाया मंगल ग्रह पर सबसे लंबी ड्राइव का रिकॉर्ड
    पिछले डेढ़ महीने से यह रोवर Jezero क्रेटर रिम की बाहरी ढलानों पर मौजूद Krokodillen पठार पर मिट्टी वाली चट्टानों की खोज कर रहा है। अगर चट्टानों के नमूनों में 'फिलोसिलिकेट्स' कहे जाने वाले मिनरल्स पाए जाते हैं तो इसका मतलब हो सकता है कि पहले इस ग्रह पर बड़ी मात्रा में पानी की मौजूदगी थी। NASA के Curiosity और Opportunity जैसे मंगल ग्रह पर अन्य रोवर्स की तुलना में इसकी स्पीड भी अधिक रही है।
  • भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक स्पेस मिशन के बाद धरती पर हुई वापसी, प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई
    इस मिशन के क्रू ने ISS पर कई एक्सपेरिमेंट्स किए हैं। इनमें से सात एक्सपेरिमेंट्स की अगुवाई शुक्ला ने की थी। इन एस्ट्रोनॉट्स के साथ शून्य ग्रेविटी के उनके संकेतक के तौर पर Joy कहे जाने वाले एक स्वैन टॉय को भी भेजा गया था। इस मिशन से भारतीय स्पेस एजेंसी ISRO को गगनयान की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण सबक मिल सकते हैं।
  • टेक्नोलॉजी की दुनिया से आपके लिए आज की 5 महत्वपूर्ण खबरें
    अमेरिका में कैलिफोर्निया के Kennedy Space Centre से बुधवार को SpaceX का Falcon 9 रॉकेट इस मिशन के स्पेसक्राफ्ट Dragon के साथ बुधवार को 12.01 PM पर लॉन्च किया गया था। इस स्पेसक्राफ्ट की लगभग 29 घंटे की उड़ान के बाद गुरुवार को 4.01 पर ISS के साथ डॉकिंग हुई है। Axiom-4 मिशन के क्रू के सदस्य ISS पर कई एक्सपेरिमेंट्स करेंगे।
  • भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला पहुंचे स्पेस स्टेशन, Dragon स्पेसक्राफ्ट की हुई डॉकिंग
    Axiom-4 मिशन के क्रू के सदस्य ISS पर कई एक्सपेरिमेंट्स करेंगे। इनमें से सात एक्सपेरिमेंट्स की अगुवाई शुक्ला करेंगे। इस मिशन में 31 देशों की भागीदारी है इस मिशन को सुरक्षा के साथ ISS पर पहुंचाने के लिए NASA और अमेरिकी स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपर Axiom Space ने कड़ी तैयारी की थी। इन एस्ट्रोनॉट्स के साथ शून्य ग्रेविटी के उनके संकेतक के तौर पर Joy कहे जाने वाले एक स्वैन टॉय को भी भेजा गया है।

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