PSLV-C62 मिशन के दौरान तीसरे स्टेज में आई तकनीकी गड़बड़ी के बाद ISRO ने डेटा एनालिसिस शुरू कर दिया है। एजेंसी ने फिलहाल मिशन को न सफल बताया है, न असफल।
Photo Credit: ISRO
PSLV-C62 लॉन्च के दौरान श्रीहरिकोटा से उड़ान भरता ISRO का रॉकेट
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के भरोसेमंद माने जाने वाले Polar Satellite Launch Vehicle (PSLV) मिशन को सोमवार को लॉन्च के बाद एक झटका लगा है। PSLV-C62 मिशन के दौरान रॉकेट के तीसरे चरण में तकनीकी गड़बड़ी सामने आई, जिसके बाद मिशन की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ISRO ने पुष्टि की है कि लॉन्च के कुछ मिनट बाद तीसरे स्टेज में ट्रेजेक्टरी में झुकाव देखा गया, जिसके चलते मिशन तय रास्ते पर आगे नहीं बढ़ सका। फिलहाल स्पेस एजेंसी ने इसे न तो पूरी तरह सफल बताया है और न ही असफल घोषित किया है। डेटा का एनालिसिस जारी है और विस्तृत जानकारी बाद में शेयर की जाएगी। पूरे मिशन और इसमें आई तकनीकी गड़बड़ी के बारे में नीचे विस्तार से बताया गया है।
PSLV का 64वां मिशन, PSLV-C62, सोमवार सुबह 10:18 बजे सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च हुआ। यह मिशन 2025 में हुई PSLV की असफल उड़ान के बाद एक अहम कमबैक फ्लाइट माना जा रहा था। ISRO के मुताबिक, लॉन्च के शुरुआती चरण पूरी तरह सामान्य रहे और रॉकेट के पहले और दूसरे स्टेज ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किया।
समस्या PSLV की तीसरी स्टेज के दौरान सामने आई, जहां रॉकेट की दिशा में तय रास्ते से हटकर मूवमेंट देखी गई। ISRO चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने कहा कि मिशन अपेक्षित ट्रेजेक्टरी पर आगे नहीं बढ़ सका। हालांकि उन्होंने यह साफ किया कि अभी इसे सफल या असफल घोषित करना जल्दबाजी होगी और सभी टेलीमेट्री डेटा को बारीकी से स्टडी किया जा रहा है।
PSLV-C62 को 2026 की पहली PSLV उड़ान के तौर पर लॉन्च किया गया था। इससे पहले 2025 में PSLV की केवल एक ही लॉन्च हुई थी, जो तीसरे स्टेज में आई गड़बड़ी के चलते फेल हो गई थी। उस समय ISRO ने एक फेलियर एनालिसिस कमीट बनाई थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई थी।
इस मिशन में कुल 16 सैटेलाइट्स शामिल थे। इनमें मुख्य EOS-N1 और डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) द्वारा डेवलप की गई सर्विलांस सैटेलाइट Anvesha थे। इसके अलावा ब्राजील, नेपाल और यूके जैसे देशों के सैटेलाइट्स भी इस मिशन का हिस्सा थे। PSLV-C62 की संभावित असफलता का असर सिर्फ ISRO तक सीमित नहीं है। हैदराबाद की स्पेस स्टार्टअप Dhruva Space के 7 सैटेलाइट्स भी इसी मिशन में लॉन्च होने थे, जिससे यह भारत के निजी स्पेस सेक्टर के लिए भी एक अहम मिशन बन गया था।
अगर PSLV-C62 को अंततः असफल घोषित किया जाता है, तो यह 64 लॉन्च में पांचवीं असफलता होगी। आंकड़ों के लिहाज से यह रिकॉर्ड बहुत खराब नहीं माना जाता, लेकिन लगातार तीसरे स्टेज से जुड़ी समस्याएं ISRO के लिए एक गंभीर टेक्निकल चुनौती जरूर बनती दिख रही हैं।
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